बीजू पटनायक पर विवाद अनुचित

राजनीति में आलोचना का भी एक स्तर होना चाहिए। अब तक कंाग्रेस के नेता ही इस मामले में आगे रहे लेकिन अब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी स्तरहीन आलोचना पर उतर आयी है। भाजपा संासद निशिकांत दुबे इस प्रकार के बयान देने में आगे आ गये हैं। उन्होंने बीते 27 मार्च को ओडिशा (उड़ीसा) के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर राष्ट्रविरोधी कार्यों में लिप्त रहने का आरोप लगाया। बीजू पटनायक उड़ीसा के कद्दावर नेता थे और कांग्रेस का हिस्सा हुआ करते थे। उनके बेटे नवीन पटनायक ने उन्हीं के नाम पर अलग पार्टी बनायी और मुख्यमंत्री बने। इस बार वहां भाजपा ने सरकार बनायी है लेकिन बीजू पटनायक पर अब तक कोई आरोप नहीं लगा। अब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए काम करने का उन पर आरोप लगाया तो बीजद के सांसद सस्मित पात्रा ने उसका तीखा विरोध किया। सस्मित पात्रा ने स्वर्गीय बीजू पटनायक के राष्ट्रहित में किये कार्यों का उल्लेख भी किया है। वैसे भी गड़े मुर्दे उखाड़ना ठीक नहीं होता। उड़ीसा की पूर्व नवीन पटनायक सरकार ने विपक्षी दलों के महागठबंधन इंडिया के साथ जाने से इनकार करके भाजपा की एक तरह से मदद भी की है। इसलिए निशिकांत दुबे के आरोप किसी भी दृष्टि से उचित नहीं हैं। यह विवाद संसद की कार्य प्रणाली पर भी प्रभाव डाल रहा है। पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी आन कम्युनिकेशन एण्ड आईटी के निशिकांत दुबे अध्यक्ष हैं। इस कमेटी में बीजद सांसद सस्मित पात्रा भी शामिल हैं। उन्होंने समिति से इस्तीफा दे दिया है।
विवाद निशिकांत दुबे की ओर से 27 मार्च को दिए गए बयानों से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने 1960 के दशक में भारत के विदेश और रक्षा मामलों से जुड़े कई आरोप लगाए थे। उन्होंने यह दावा किया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध से पहले और उसके बाद के समय में, तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के संयुक्त राज्य अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी, सीआईए के साथ संबंध थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजू पटनायक ने अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच मध्यस्थ के तौर पर काम किया। उनका दावा है कि पटनायक को रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं और वह अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में थे। अपने आरोपों के समर्थन में दुबे ने नेहरू के कई कथित पत्रों का जिक्र भी किया।
बीजू जनता दल के सांसद सस्मित पात्रा ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की ओर से ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर कड़ी निंदा की और उन्हें “बेहद शर्मनाक और झूठा” बताया। पात्रा ने बयानों को लेकर कड़ी
आलोचना करते हुए उनकी अगुवाई
वाली संसदीय समिति से इस्तीफा भी दे दिया। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, सस्मित पात्रा ने आरोपों को खारिज कर दिया और सांसद दुबे के उन संदर्भों को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” करार दिया जिनमें उन्होंने बीजू पटनायक को जवाहरलाल नेहरू, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य संस्थाओं से जोड़ा था। साथ ही, उन्होंने इतिहास के अहम पलों में बीजू पटनायक की भूमिका की ओर इशारा किया, जिसमें दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उनका समर्थन और 1947 में कश्मीर संघर्ष के दौरान उनका योगदान शामिल है।
उन्होंने कहा, “मैं भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे की ओर से बीजू पटनायक के बारे में दिए गए बेहद शर्मनाक और झूठे बयानों की कड़ी निंदा करता हूं। मैं उनके बयानों को खारिज करता हूं। उन्होंने नेहरू और बाद में अमेरिका और अन्य लोगों के बारे में जो संदर्भ दिए हैं, वे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गलत हैं। जब द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूसियों को मदद की जरूरत थी, तो उन्होंने नाजियों के खिलाफ जाकर उनकी मदद की थी। यही नहीं 1947 में जब हमारे सैनिकों को कश्मीर ले जाया जा रहा था, तो उन्होंने खुद विमान उड़ाकर उन्हें पहुंचाया था।” सस्मित पात्रा ने कहा, “देश की आजादी के संघर्ष में बीजू पटनायक का योगदान पूरा देश जानता है पात्रा ने उन्हें एक “महान व्यक्तित्व” बताया और कहा कि ऐसी टिप्पणियां निंदनीय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इन बयानों के बाद वह बीजेपी सांसद दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और आईटी पर संसदीय स्थायी समिति के सदस्य के तौर पर काम जारी नहीं रख सकते।
पात्रा ने कहा, “स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, उनके योगदान को पूरा देश जानता है। ऐसे व्यक्ति के लिए, ऐसी महान हस्ती के लिए, दुबे के ये बयान दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं, क्योंकि मैं भी संचार और आईटी समिति में काम करता हूं, जहां वह अध्यक्ष हैं। मैं ऐसी समिति के सदस्य के तौर पर काम जारी नहीं रख सकता, जहां वह मौजूद हों, जिन्होंने बीजू बाबू के बारे में ऐसे कमेंट्स किए। इसीलिए मैंने संचार और आईटी समिति से इस्तीफा दे दिया है।
बीजू पटनायक का जन्म गंजाम के भंज नगर में कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके माता पिता का नाम लक्ष्मीनारायण और आशालता पटनायक था। उनकी शिक्षा कटक के रावेनशॉ कॉलेज में हुई। विमानन उद्योग में रुचि के कारण उन्होंने अपने कॉलेज छोड़ दिए और एक पायलट के रूप में प्रशिक्षित हुए। पटनायक निजी एयरलाइनों के साथ उड़ान भरी लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के शुरू में वह रॉयल इंडियन एयर फोर्स में शामिल हो गए। पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने भी भाजपा सांसद की समझ पर सवाल उठा दिए हैं। बीजू पटनायक के बेटे और ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने भाजपा सांसद के बयान पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और बयान की कड़ी निंदा की। बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि शायद टिप्पणी करने वाले सांसद को यह जानकारी नहीं है कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने चीन के साथ संघर्ष के दौरान बीजू पटनायक को रणनीति बनाने में मदद के लिए दिल्ली में अपने कार्यालय के पास ही एक दफ्तर दिया था, जबकि वह ओडिशा के मुख्यमंत्री थे। भुवनेश्वर में मीडिया से बात करते हुए नवीन पटनायक ने कहा, बीजू बाबू के बारे में जो अपमानजनक बातें की गईं, उन्हें सुनकर मैं हैरान हूं। मुझे नहीं लगता कि उन्हें ये पता है कि चीन के साथ लड़ाई के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बीजू पटनायक को रणनीति बनाने में मदद करने के लिए दिल्ली में अपने कार्यालय के पास ही एक दफ्तर दिया था, जबकि वे उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा, उस समय मैं लगभग 13 वर्ष का था, लेकिन मुझे अच्छी तरह याद है कि चीनी हमले को लेकर बीजू बाबू कितने गुस्से में थे और उसे रोकने के लिए उन्होंने कितने प्रयास किए थे। इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान देने के लिए उन सांसद को किसी मनोचिकित्सक को दिखाने की जरूरत है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 27 मार्च को एक बयान में दावा किया था कि 1960 के दशक में अमेरिका ने तिब्बत में अपने सैनिक और सीआईए एजेंट भेजे थे क्योंकि उसे डर था कि चीन तिब्बत पर कब्जा कर लेगा। दलाई लामा और उनके भाई लगातार अमेरिकी सरकार के संपर्क में थे। पंडित नेहरू ने पूरा युद्ध अमेरिका के पैसों और सीआईए के सहयोग से लड़ा। उस समय ओडिशा के मुख्यमंत्री बीजू पटनायक अमेरिका, सीआईए और नेहरू के बीच की कड़ी थे। बीजू जनता दल (बीजद) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक पर अपमानजनक बयान दिए जाने के विरोध में संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे दिया। राज्यसभा के सभापति को लिखे एक पत्र में पात्रा ने कहा, विरोध स्वरूप और सैद्धांतिक तौर पर मैं निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संचार और सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति से इस्तीफा दे रहा हूं। मैं ऐसे व्यक्ति के अधीन सेवा जारी नहीं रख सकता, जो दिवंगत बीजू पटनायक के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करता है, जैसा कि उन्होंने एक सार्वजनिक बयान में किया।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



