क्यूबा ने बदला साम्यवादी चेहरा

क्यूबा ने क्रांति के 70 साल बाद बड़ा यू-टर्न लिया है। इस कम्युनिस्ट देश ने अब प्राइवेट कंपनियों, प्राइवेट बैंकों और विदेशी निवेश के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। फिदेल कास्त्रो की क्रांति के बाद पहली बार क्यूबा में इतना बड़ा आर्थिक बदलाव हो रहा है। क्यूबा के प्रधानमंत्री मैनुएल मारेरो ने गुरुवार, 18 जून को लगभग 200 फ्री-मार्केट सुधारों का एक बड़ा पैकेज पेश किया, जिसे संसद ने पास कर दिया है। इसका उद्देश्य अमेरिका की तेल नाकाबंदी से और भी गंभीर हुए आर्थिक संकट से इस कम्युनिस्ट देश को बचाना है।
पीएम मारेरो ने क्यूबा के संसद में लगभग दो घंटे के भाषण में 176 सुधारों की जानकारी दी। इनमें बैंकिंग, वेतन, कंपनियों का स्वामित्व, विदेशी निवेश और कृषि समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार लंदन में रहने वाले क्यूबाई अर्थशास्त्री डेनियल टोराल्बास ने इन कदमों को 1959 की फिदेल कास्त्रो क्रांति के बाद का सबसे बड़ा और गहरा आर्थिक सुधार कार्यक्रम बताया है। उन्होंने कहा कि यह देश के आर्थिक विकास मॉडल में एक बड़ा बदलाव है। टोराल्बास के अनुसार, सबसे बड़े बदलाव क्यूबा की अर्थव्यवस्था में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका से जुड़े हैं। पहली बार 100 से अधिक कर्मचारियों वाली प्राइवेट कंपनियों को अनुमति दी जाएगी।
क्यूबा के लोगों को एक से अधिक कंपनियों का मालिक बनने की अनुमति होगी, प्राइवेट बैंकों को मंजूरी दी जाएगी और प्राइवेट सेक्टर में विदेशी निवेश की भी इजाजत होगी। पर्यटन, कृषि और मुद्रा बाजार जैसे कई अन्य क्षेत्रों को भी प्राइवेट निवेशकों (इन्वेस्टर्स) के लिए खोल दिया जाएगा, चाहे वे क्यूबाई हों या विदेशी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जनवरी में लगाई गई तेल नाकाबंदी ने पहले से ही कमजोर क्यूबा की अर्थव्यवस्था को लगभग ढहने की स्थिति में पहुंचा दिया है। देश में कई बार 30 घंटे से ज्यादा की बिजली कटौती हो रही है और भोजन, फ्यूल, पीने का पानी तथा दवाइयों की भारी कमी देखने को मिल रही है।



