महाराष्ट्र निकाय चुनाव के समीकरण

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)
महाराष्ट्र में कुछ ही दिनांे बाद राजनीति के अलग-अलग समीकरण दिखाई पड़ सकते हैं। राज्य के स्थानीय निकाय चुनाव भी विधानसभा चुनाव से कम महत्वपूर्ण नहीं होते हैं। महाराष्ट्र मंे निकाय चुनाव बहुत पहले हो जाना चाहिए थे लेकन मराठा आरक्षण और अन्य कारणों से इन चुनावों को, टाला गया। मामला देश की सबसे बड़ी अदालत अर्थात् सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 31 जनवरी 2026 तक हर हालत मंे निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया है। सत्तापक्ष मंे मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने इन चुनावों के माध्यम से महायुति के घटक दलों- श्विसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजित पचार) को उनकी औकात बताने की ठान रखी है। पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा समय के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे भले ही घोषित रूप से कह रहे हैं कि उनका देवेन्द्र फडणवीस से कोई विवाद नहीं है लेिकन कई मौके ऐसे आये जब एकनाथ शिंदे की नाराजगी जाहिर हो गयी। अभी ताजा मामला मराठों को आरक्षण के लिए अनशन का था। इस मामले को सुलझाने का श्रेय मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को मिला। अब संभाजी नगर मंे मराठवाड़ा के भाजपा नेताओं ने देवेन्द्र फडणवीस से निकाय चुनाव अकेले दम पर लड़ने की सलाह दी है। उधर, विपक्षी दलों के महागठबंधन मंे उद्धव ठाकरे की शिवसेना और उनके भाई राजठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना मिलकर निकाय चुनाव लड़ेगी। इससे कांग्रेस और शरद पवार की एनसीपी भी अपनी अलग राह पकड़ सकती है। फिलहाल, राजनीतिक समीकरणों मंे बदलाव की प्रबल संभावना है।
महाराष्ट्र में दिवाली के तुरंत बाद स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को 31 जनवरी, 2026 तक 29 नगर निगमों, 34 में से 32 जिला परिषदों, 248 नगर पालिका परिषदों और 351 में से 336 पंचायत समितियों के चुनाव पूरे करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय में अन्य पिछड़ा वर्ग कोटा मुकदमे के कारण ये चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। ये चुनाव 2020 और 2024 के बीच होने थे। मराठवाडा के बीजेपी नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से महाराष्ट्र निकाय चुनाव अकेले लड़ने की सलाह दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आगामी स्थानीय निकाय चुनाव खुद के दम पर लड़ना चाहिए। अगर गठबंधन करना है तो शिंदे सेना से करिए, एनसीपी(अजित) पवार से नहीं होना चाहिए। दरअसल, संभाजी नगर में भारतीय जनता पार्टी के मराठवाड़ा यूनिट की बैठक हुई। इस बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, चंद्रशेखर बावनकुले सहित मराठवाड़ा के सभी 8 जिलों के भाजपा पदाधिकारी मौजूद थे। इस बैठक के दौरान आगामी स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारी का जायजा लिया गया। बैठक में स्थानीय पदाधिकारियों ने प्रमुख नेताओं के सामने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि मराठवाड़ा में बीजेपी काफी अच्छी स्थिति में है। ऐसे में आगामी स्थानीय चुनाव अगर खुद के दम पर लड़ते हैं तो अच्छे नतीजे आ सकते हैं, साथ ही पार्टी के लिए वर्षों से काम करने वाले कई स्थानीय कार्यकर्ताओं को मौका मिल सकता है। फिर भी अगर गठबंधन करना ही है तो शिंदे सेना के साथ गठबंधन करिए। शिंदे सेना के साथ अच्छी ट्यूनिंग हो सकती है लेकिन अजित पवार के साथ गठबंधन मत करिए। बैठक में मौजूद महाराष्ट्र बीजेपी के प्रमुख नेताओं ने कार्यकर्ताओं के दिल की बात सुनी।
बहरहाल सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 31 जनवरी, 2026 तक राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव कराने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने महाराष्ट्र के अधिकारियों को इस वर्ष 10 अक्टूबर तक राज्य में परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने का भी निर्देश दिया था। शीर्ष न्यायालय ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि 6 मई को जारी उसके तर्कसंगत आदेश, जिसमें स्थानीय निकाय चुनावों की अधिसूचना चार सप्ताह के भीतर और चुनाव चार महीने के भीतर कराने का निर्देश दिया गया था, के बावजूद राज्य चुनाव आयोग इस संबंध में शीघ्र कार्रवाई करने में विफल रहा। अदालत ने अब महाराष्ट्र में स्थानीय चुनाव कराने के लिए उपरोक्त कार्यक्रम निर्धारित करते हुए समय सीमा को और बढ़ा दिया है। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संबंध में आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा।
महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई थी। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा- क्या चुनाव हो चुके हैं? इस पर सरकार के वकील ने कहा कि प्रक्रिया चल रही है। मई में आदेश पारित हुआ था। चुनाव 4 महीने में होने थे। परिसीमन हो चुका है और राज्य चुनाव आयोग कुछ समय विस्तार की मांग कर रहा है। एक अंतरिम अर्जी दायर की गई है। सरकार के वकील का जवाब सुनकर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम आपको जनवरी तक का समय क्यों दें? सुनवाई के दौरान एक वकील ने कहा कि 29 नगर निगम हैं। पहली बार एक साथ चुनाव हो रहे हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-आपकी निष्क्रियता अक्षमता को दर्शाती हैं। हमें मौखिक रूप से कारण बताएं। इस पर वकील ने कहा कि हमारे पास 65 हजार ईवीएम मशीनें हैं। 50 हजार और चाहिए, हमने ऑर्डर दे दिए हैं। दरअसल, मई में सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित किया था। जो ओबीसी के लिए आरक्षण लागू करने से संबंधित मुकदमेबाजी के कारण 2022 से रुके हुए थे।
मुंबई नगर निगम चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है। प्रमुख पार्टियाँ- सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी, अजित पवार की राकांपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना- अपनी तैयारियों के अंतिम चरण में हैं, साथ ही उनकी प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस, और शरद पवार व उद्धव ठाकरे की राकांपा और शिवसेना भी अपनी तैयारियों में जुटी हैं। भाजपा ने कैडर निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया है और सप्ताह दर सप्ताह नेताओं को शामिल करना जारी रखा है, जबकि अन्य अधिकांश दल खोई हुई जमीन और मतदाता संपर्क को फिर से बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। नवंबर 2024 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने राज्य की 288 सीटों में से 132 सीटें जीतकर स्पष्ट जीत हासिल किया। यह एक बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि छह महीने पहले ही लोकसभा चुनाव में उसका (और उसके सहयोगियों का) प्रदर्शन बेहद खराब रहा था। भाजपा ने 28 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़कर केवल नौ सीटें जीती थीं। भाजपा अब 2029 में एक और प्रभावशाली परिणाम पर नजर गड़ाए हुए है, लेकिन एक शर्त के साथ। इस बार वह एक ज्यादा स्वतंत्र ताकत बनना चाहती है यानी, जीत हासिल करना और अपने दम पर सरकार बनाना चाहती है। (हिफी)



