आपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने तेजी, सटीकता और रणनीति के साथ जवाब दिया। 6-7 मई 2025 की उस ऐतिहासिक रात को, जब पूरा देश पहलगाम के आतंकी हमले के दुख को भूल नहीं पा रहा था। तब भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (च्वज्ञ) में ऑपरेशन सिंदूर लांच कर पहलगाम में पत्नियों के उजड़े सिंदूर का बदला ले लिया था।ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति का बड़ा संदेश भी था। इस ऑपरेशन की सफलता के पीछे दो सबसे अहम फैक्ट रहे। पहला सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति और पूरे देश का एकजुट आक्रोश। इन्हीं दोनों कारणों से भारत ने पाकिस्तान को सिर्फ 88 घंटे में सीजफायर के लिए मजबूर कर दिया। ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी ताकत भारत सरकार का स्पष्ट और सख्त रुख था। सरकार ने सेना को बिना किसी हिचक के खुली छूट दी। सेना को साफ निर्देश दिए गए कि आतंकियों और उनके मददगारों को निशाना बनाना है, लेकिन किसी भी आम नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 बड़े आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया। इन ठिकानों का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठन करते थे। इसके अलावा सियालकोट, बहावलपुर और नूर खान एयरबेस जैसे अहम सैन्य ठिकाने भी भारत की जद में आए। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए। इनमें आईसी-814 विमान हाईजैकिंग से जुड़ा यूसुफ अजहर और पुलवामा हमले से जुड़े आतंकी भी शामिल थे। भारत ने सिर्फ पीओके तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पाकिस्तान के अंदर तक कार्रवाई की।
सरकार ने सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान को घेरने की रणनीति अपनाई। भारत ने दुनिया के कई देशों में डेलिगेशन भेजकर आतंकवाद के खिलाफ अपना पक्ष मजबूती से रखा और पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिश की। ऑपरेशन सिंदूर की दूसरी सबसे बड़ी ताकत थी देशभर में आतंकवाद के खिलाफ गुस्सा और लोगों का एकजुट समर्थन। इस ऑपरेशन में सिर्फ सेना ही नहीं, बल्कि सरकार, निजी कंपनियां, स्टार्टअप और कई सरकारी एजेंसियां भी साथ काम करती नजर आईं।



