भारत के लिए खाड़ी देश रणनीतिक बाजार

वैश्विक व्यापार में मंदी के बीच खाड़ी देश भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजार के रूप में उभर रहे हैं। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) जिसमें सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक ब्लॉक बन चुका है, जो यूरोपीय संघ, आसियान, अमेरिका और चीन जैसे अन्य प्रमुख साझेदारों से भी बड़ा है।
2024-25 वित्तीय वर्ष में भारत और जसीसी के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग $178-179 बिलियन तक पहुंच गया। इसमें भारत का निर्यात करीब $57 बिलियन रहा, जबकि आयात $121.7 बिलियन के आसपास था। यह व्यापार मुख्य रूप से ऊर्जा पर आधारित है। भारत ळब्ब् से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस आयात करता है, जबकि इन देशों को रत्न-आभूषण, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, लोहा-इस्पात, मशीनरी और अन्य उत्पाद निर्यात करता है।
जीसीसी क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और यहां करीब 10 मिलियन भारतीय प्रवासी कार्यरत हैं। एफटीए की दिशा में नया कदम ट्रेड वॉर के दौर में बदलती संभवानाओं को दिखाता है। इसी का नतीजा कह सकते हैं कि भारत और जीसीसी के बीच मुक्त व्यापार समझौता पर बातचीत तेज हो रही है। इस बीच 5 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में संदर्भ की शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए गए। ये टीओआर प्रस्तावित एफटीए के दायरे, तरीकों और वार्ता की रूपरेखा तय करते हैं। यह कदम 2004 में शुरू हुई वार्ताओं को फिर से गति देता है, जिनके 2 दौर 2006 और 2008 में हो चुके थे लेकिन, इसके बाद वार्ता रुक गई थी। अब यूएई के साथ लागू सीईपीए (2022 से) और ओमान के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित सीईपीए (18 दिसंबर 2025) पर आधारित यह व्यापक समझौता अन्य जीसीसी देशों के साथ भी व्यापारिक बाधाओं को कम करेगा। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ावा देगा, नीतिगत स्थिरता लाएगा, निवेश को प्रोत्साहित करेगा और दोनों पक्षों के लिए खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करेगा। भारत खाद्यान्न उत्पादक है, जबकि जीसीसी तेल-गैस निर्यातक। यही बात दोनों के लिए फायदेमंद होगी। पेट्रोकेमिकल, सूचना-प्रौद्योगिकी, इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड प्रोसेसिंग और सेवाओं के क्षेत्र में भारतीय कंपनियों को बड़ा बाजार मिलेगा।



