हरिवंश बने राज्यसभा के उपसभापति

संसद के उच्च सदन अर्थात् राज्यसभा का सदस्य होना ही गौरव की बात है। हमारे संविधान की भावना तो यही है लेकिन राजनीति के स्वार्थी तत्व ने उस भावना को बेशर्मी के साथ ताख पर रख दिया है। इसलिए राज्यसभा मंे पार्टी का हित साधने वालों को भेज दिया जाता है। इनका चुनाव सीधे जनता नहीं करती लेकिन विधानसभाओं में जनता के प्रतिनिधि करते है। इस राज्यसभा का सभापति देश का उपराष्ट्रपति होता है और उपसभापति आमतौर पर विपक्ष से नामित किया जाता है। अब 17 अप्रैल 2026 को मोदी सरकार ने सहयोगी दल जद(यू) के नेता हरिवंश जी को राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। हरिवंशस के लिए यह गौरव की बात है कि उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा का उपसभापति नामित किया गया और यह भी सुखद संयोग है कि उन्होंने 17 अप्रैल को अपना तीसरा कार्यकाल प्रारम्भ किया। इसी दिन पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती भी मनायी जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हरिवंश को बधाई देते हुए इसका उल्लेख भी किया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर श्रीमती इंदिरा गांधी की सरकार के दौरान युवा तुर्क कहे जाते थे और राजीव गांधी ने जब चंद्रशेखर सरकार से समर्थन वापस लिया तब भी चंद्रशेखर के वही तेवर थे। बताते हैं कि राजीव गांधी ने यह संदेश चंद्रशेखर को भिजवाया कि कांग्रेस समर्थन जारी रखने को तैयार है लेकिन युवा तुर्क चंद्रशेखर ने तब राजीव गांधी के भेजे गये नेता को जवाब दिया था कि तुम्हारे नेता (राजीव गांधी) अपना बयान बदल सकते हैं लेकिन चंद्रशेखर अपनी बात से पीछे नहंी हटते। इसके साथ ही चंद्रशेखर ने पीएम पद से इस्तीफा दे दिया था। पीएम मोदी का तात्पर्य भी संभवतः यही है कि राज्यसभा के उपसभापति के रूप में हरिवंश नारायण सिंह भी उसी दृढ़निश्चय से अपना दायित्व निभाएंगे।
राज्य सभा सदस्य हरिवंश नारायण सिंह को सदन का उपसभापति चुना गया है। यह उनका तीसरा कार्यकाल है। उन्हें हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य सभा का सदस्य नामित किया था।तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी है। उन्होंने कहा कि हरिवंश का तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जाना अनुभव और सहज कार्यशैली का सम्मान है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि हरिवंश जी अपना तीसरा कार्यकाल पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जयंती पर शुरू कर रहे हैं, जिनके साथ उनके अच्छे संबंध रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हरिवंश जी अपने जीवन के अनुभव का इस्तेमाल बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सदन की कार्यवाही और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व बनाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि उपसभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई उंचाई प्राप्त होगी।
हरिवंश जी का जन्म जेपी के गांव में हुआ था। ग्रामीण पृष्ठिमूमि से आने के कारण वो अपने गांव के विकास के लिए छात्र जीवन से ही काम करते रहे। राज्यसभा उपसभापति पद के लिये राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार हरिवंश नारायण सिंह को ध्वनि मत से राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। सामाजिक कार्यों और पत्रकारिता के जरिए हरिवंशजी ने एक ईमानदार पहचान बनाई है। इसके बाद वे टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग में 1981 तक उप संपादक रहे। 1981-84 तक हैदराबाद एवं पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की और वर्ष 1984 में इन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्तूबर तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित रविवार साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे।90 के दशक में हरिवंश बिहार के एक बड़े मीडिया प्रभात खबर से जुड़े, जहां पर उन्होंने दो दशक से ज्यादा वक्त तक काम किया। अपने कार्यकाल के दौरान हरिवंश ने बिहार से जुड़े गंभीर विषयों को प्रमुखता से उठाया। इसी दौरान वह नीतीश कुमार के करीब आए। इसके बाद हरिवंश को जेडीयू का महासचिव बना दिया गया। साल 2014 में जेडीयू ने हरिवंश को राज्यसभा के लिए नामांकित किया और इस तरह से हरिवंश पहली बार संसद तक पहुंचे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में नवनियुक्त उपसभापति हरिवंश से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग साझा किया। पीएम मोदी ने बताया कि 1994 में अपने पहले अमेरिका दौरे के दौरान हरिवंश अपने तय कार्यक्रम से अलग उन विश्वविद्यालयों में गए थे, जहां से पढ़े हुए युवाओं ने अमेरिका को विकसित देश बनाने में अहम भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री ने इसे हरिवंश की दूरदर्शिता और सीखने की प्रवृत्ति का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, सदन के उनके प्रति गहरे विश्वास का प्रमाण है।
पीएम मोदी ने कहा, यह अपने आप में आपके अनुभव का सम्मान है, आपकी सहज कार्यशैली की स्वीकृति है। बीते वर्षों में सदन को आपके अनुभव का लाभ मिला है और सबको साथ लेकर चलने के आपके प्रयासों पर आज सदन ने मोहर लगाई है। उन्होंने कहा कि हरिवंश के नेतृत्व में राज्यसभा की भूमिका को अधिक प्रभावी होते सभी सदस्यों ने देखा है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि आगामी कार्यकाल में भी वे सदन की गरिमा और कार्यकुशलता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हरिवंश नारायण सिंह को इस अवसर पर बधाई दी। राज्यसभा में इस दौरान खरगे ने लोकसभा के डिप्टी स्पीकर के पद का मुद्दा भी उठाया। कांगेस के वरिष्ठ नेता ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 7 साल से लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद खाली क्यों छोड़ा गया है? ये कैसी डेमोक्रेसी है?
मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में डिप्टी चेयरमैन चुने जाने पर हरिवंश नारायण सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा, बड़ी हैरान करने वाली बात है कि इतना तेजी से ये चुनाव हुआ है। यह पहली बार है, जब इस पद के लिए किसी सदस्य को मनोनीत किया गया है। इससे पता चलता है कि हरिवंश नारायण सिंह इस पद के लायक हैं। इसलिए मैं उनको बधाई देता हूं लेकिन मुझे इस बात से तकलीफ है कि संविधान के अनुच्छेद-93 में निहित संविधानिक भावना के विपरीत लोकसभा में 2019 से उपाध्यक्ष का पद खाली है। 7 साल से ये पद खाली है, क्या ये अच्छा नहीं होता कि राज्यसभा की तरह लोकसभा में भी ऐसा ही होता। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, संविधान सदन में
उपाध्यक्ष का कक्ष मेरे पुराने कमरे के पड़ोस में ही है। जब भी मैं वहां से गेट नंबर 7 पर जाता हूं, तब मुझे वहां कमरे पर लटका ताला दिख जाता है। ये मुझे तकलीफ देता है कि हम प्रजातंत्र की बात करते हैं और 7 साल से आप डिप्टी स्पीकर को चुनते नहीं हैं, तो इस पद का मतलब क्या है? हर आदमी डेमोक्रेसी की बात करता है। डेमोक्रेसी को हम टूटने नहीं देंगे। खरगे ने कहा कि 16 अप्रैल को मैंने एक महाशय को सुना वो कह रहे थे कि डेमाक्रेसी को तोड़ने की बहुत कोशिश हुई, फिर डिप्टी स्पीकर के पद को लेकर आप क्या कहेंगे? 7 साल से सदन के डिप्टी स्पीकर नहीं हैं, ये क्या है? आपको जिस किसी को भी इस पद नियुक्त करना है कीजिए, लेकिन इसे खाली क्यों छोड़ा गया है?(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



