राघव चड्ढा को सियासी दाना

आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा पर भाजपा की केन्द्र सरकार यूं ही मेहरबान नहीं है। इसके पीछे पंजाब मंे भगवा लहराने की रणनीति साफ-साफ झलक रही है। पंजाब की राजनीति में दो प्रमुख प्रतिद्वन्द्वी कांग्रेस और अकाली दल हुआ करते थे। अकाली दल बिखर गया है और कांग्रेस में भी पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह को भाजपा ने अपने खेमे में शामिल कर लिया। इस प्रकार पंजाब की जनता ने अरविन्द केजरीवाल की पार्टी को इस बार सत्ता सौंप दी थी। आम आदमी पार्टी ने अभी हाल ही अपने राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को राज्यसभा मंे उपनेता के पद से हटाकर अशोक मित्तल को उपनेता बना दिया।
राघव चड्ढा को उपनेता के पद से ही नहीं हटाया बल्कि उनकी सुरक्षा भी वापस ले ली थी। राघव चड्ढा ने इसका खुलकर विरोध भले ही नहीं किया लेकिन उनकी नाराजगी को भाजपा ने भी महसूस किया है। इसीलिए उन पर सियासी दाना डाला गया है। केन्द्र सरकार ने सांसद राघव चड्ढा को जेड प्लस की सुरक्षा उपलब्ध करा दी और उनके वर्तमान प्रतिद्वन्द्वी अशोक मित्तल को सबक भी सिखा दिया है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य अशोेक मित्तल से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 15 अप्रैल को छापेमारी की है। आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई भले ही बताए लेकिन ईडी अधिकारियों के अनुसार मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) की जांच के तहत इन शैक्षणिक संस्थानों के कुछ विदेशी वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। दिल्ली की सियासत में राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी ‘आप’के बीच टकराव को लेकर फिर हलचल तेज हो गई है। दोनों के टकराव के केंद्र में फिर से भारतीय जनता पार्टी भाजपा है।
प्रवर्तन निदेशालय ईडी की कार्रवाई और राघव चड्ढा को लेकर किए गए एक निर्णय से राजनीतिक ताप बढ़ गया है। इसके साथ ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। पहला मामला जुड़ा है राज्य सभा में आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर अशोक मित्तल के आवास पर पड़े छापों से। आप ने इन छापों को राजनीतिक साजिश करार दिया है।आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को केंद्र सरकार की ओर से जेड श्रेणी की सुरक्षा दी गई है। पंजाब सरकार ने सुरक्षा वापस ले ली है। आप की मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीति में कोई भी चीज संयोग से नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ एक बैठक हुई थी।
कक्कड़ के मुताबिक, उस बैठक में दो बड़े फैसले लिये गए हैं। पहला राघव चड्ढा को सिक्योरिटी देने का निर्णय था, जबकि दूसरा अशोक मित्तल के खिलाफ ईडी की छापेमारी का लिया गया।उनका कहना है कि मित्तल को हाल ही में राज्यसभा में डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी दी गई थी और राघव चड्ढा को हटाया गया था। यह कार्रवाई उसी से जुड़ी सियासी खींचतान का हिस्सा हो सकती है। आप इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है।
गृह मंत्रालय ने आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा को जेड श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की है। सूत्रों के अनुसार खुफिया ब्यूरो (आईबी) की खतरे की आशंका को लेकर दी गई रिपोर्ट के आधार पर राघव चड्ढा को यह सुरक्षा प्रदान की गई है। उन्हें दिल्ली और पंजाब में अर्धसैनिक बलों द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाएगी। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पंजाब सरकार द्वारा राघव चड्ढा को दी गई वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली गई है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला आप नेता के संसद में पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने में कथित विफलता के चलते उठाया गया है।आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा पर संसद में पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने में विफल रहने का आरोप लगाया था। आप ने कहा था कि उनकी निष्क्रियता पार्टी के सिद्धांतों के विरुद्ध है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा, राज्य आप अध्यक्ष अमन अरोड़ा और पार्टी नेता कुलदीप सिंह ढींगरा ने एक संयुक्त बयान में कहा कि चड्ढा की कई महत्वपूर्ण मामलों पर चुप्पी निराशाजनक थी।
पंजाब के वित्त मंत्री ने संसद में नहीं उठाए गए कई वित्तीय मामलों पर प्रकाश डाला। इनमें ग्रामीण विकास निधि के लगभग 8,500 करोड़ रुपये के लंबित होने और लगभग 60,000 करोड़ रुपये के जीएसटी-संबंधित नुकसान का मामला शामिल है। चीमा ने जीएसटी मुआवजे में बदलाव से जुड़े वित्तीय झटकों और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत धन की कमी के मुद्दों का भी उल्लेख किया। इसी के चलते पंजाब की भगवंत मान सरकार की ओर से राघव चड्ढा को दी जा रर्ही ़ सिक्योरिटी कवर को हटा लिया गया है। आम आदमी पार्टी द्वारा राघव को राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर के पद से हटाने के कुछ दिनों बाद पंजाब सरकार की ओर से यह कदम उठाया गया है। आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल ही में पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता के पद से भी हटा दिया था। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए चड्ढा ने कहा था कि उन्हें हराया नहीं गया, बल्कि चुप कराने की कोशिश की गई है। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सीधे संदेश के तौर पर देखा गया। पार्टी के कुछ नेताओं ने चड्ढा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने संसद में पंजाब से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया और केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के बजाय सॉफ्ट पीआर में ज्यादा ध्यान दिया। इन आरोपों के चलते पार्टी और चड्ढा के बीच दूरी और बढ़ती नजर आ रही है। राघव चड्ढा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि संसद में उनका काम जनहित के मुद्दों को उठाना है, न कि केवल हंगामा करना। इस बीच, राघव चड्ढा सोशल मीडिया के जरिए लगातार अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं। उन्होंने कई वीडियो और पोस्ट साझा कर अपने कामकाज को सामने रखा है और पार्टी की आलोचनाओं का जवाब दिया है। बहरहाल, राघव चड्ढा क्या कदम उठाते हैं इसका इंतजार है। भाजपा पंजाब कमें मजबूत विल्प के प में प्रयास कर रही है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



