मानवाधिकार कार्यकर्ता ने पाक की नाक में किया दम

पाकिस्तान की मानवाधिकार वकील और कार्यकर्ता ईमान मजारी एक बार फिर सुर्खियों में बनी हुई हैं। ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्ठा पर सेना और राज्य संस्थाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप है। उन्हें अक्टूबर 2024 में आरोपित किया गया था और हाल ही में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की गई हैं। इस बीच अब वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्ठा ने 7 जनवरी को इस्लामाबाद की एक अदालत में अर्जी दाखिल कर सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक को गवाह के रूप में तलब करने की मांग की है। ईमान मजारी ने लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चैधरी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने जनवरी 2026 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्हें “देशद्रोहियों की वकील” और “विदेशी एजेंट” कहा, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ा। उन्होंने अदालत में उन्हें गवाह के तौर पर बुलाने की मांग की थी, लेकिन, अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष को गवाह पेश करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने औपचारिक रूप से इस याचिका पर संज्ञान लिया और इसकी एक कॉपी अभियोजन टीम को जवाब दाखिल करने के लिए दे दी। न्यायाधीश माजोका ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद वो प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं देखी है और डीजी आईएसपीआर को तलब करने से संबंधित कोई भी फैसला लेने से पहले अभियोजन पक्ष को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
ईमान मजारी और उनके पति हादी अली चट्ठा पर प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट के तहत मुकदमा चल रहा है। आरोप है कि उनके सोशल मीडिया पोस्ट्स ने भाषाई आधार पर विभाजन भड़काने की कोशिश की और सशस्त्र बलों को आतंकवाद से जोड़कर पेश किया। सुनवाई के दौरान दोनों ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मोहम्मद अफजल माजोका के सामने लिखित आवेदन पेश किया। इस आवेदन में 6 जनवरी को सेना के प्रवक्ता की ओर से की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला दिया गया। अर्जी में आरोप लगाया गया कि इस प्रेस ब्रीफिंग में ऐसे मुद्दों पर टिप्पणियां की गईं, जो इस समय अदालत में विचाराधीन हैं। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह शह्रोज रियाज से जिरह भी हुई। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी है।
एफआईआर में यह भी कहा गया कि उन्होंने सशस्त्र बलों को प्रतिबंधित संगठनों, जैसे बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ नाकाम दिखाने की कोशिश की।
ईमान मजारी और हादी अली चट्ठा ने सभी आरोपों से इनकार किया है।



