जया ने लिखी थी कहानी, बड़े पर्दे पर छा गये अमिताभ

सदी के महानायक पिछले 5 दशकों से बॉलीवुड में सक्रिय हैं और लगातार फिल्मों में काम कर रहे हैं। अमिताभ ने अपने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं, लेकिन अपनी पत्नी जया बच्चन के सहयोग से वे हर चुनौती का डटकर सामना करते रहे हैं। उस फिल्म का नाम शहंशाह था। यह फिल्म 12 फरवरी 1988 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और रिलीज के साथ ही यह बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचाने लगी थी। इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और देखते ही देखते अमिताभ फिर से बड़े पर्दे पर छा गए। यह एक एक्शन फिल्म थी, जिसका निर्माण और निर्देशन टीनू आनंद ने किया था। इसकी कहानी जया बच्चन ने और पटकथा इंदर राज आनंद ने लिखी है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ मीनाक्षी शेषाद्रि, प्राण, अमरीश पुरी, प्रेम चोपड़ा और शरत सक्सेना भी अहम भूमिकाओं में थे। विकिपीडिया के अनुसार, अनिल कपूर की तेजाब, आमिर खान की डेब्यू फिल्म कयामत से कयामत तक और रेखा की खून भरी मांग से कड़ी टक्कर के बावजूद अमिताभ की शहंशाह 1988 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। फिल्म शहंशाह का एक डायलॉग श्रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप होते हैं, नाम है शहंशाह तो आज भी लोगों के बीच काफी पॉपुलर है। इस फिल्म में अमिताभ डबल रोल में थे। वहीं, बात करें रेखा की फिल्म खून भरी मांग की तो इसका बजट भी शहंशाह के बराबर ही था, लेकिन कमाई के मामले में यह शहंशाह से काफी पिछड़ गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो खून भरी मांग का बजट 1.76 करोड़ और शहंशाह का 1.5 करोड़ था, लेकिन एक तरफ जहां शहंशाह ने 12 करोड़ की कमाई के साथ 1988 की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी, तो वहीं रेखा की फिल्म खून भरी मांग महज 6 करोड़ की कमाई के साथ चैथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी थी। (हिफी)



