लेखक की कलम

प्रशांत किशोर की दूरदर्शिता

चुनावी रणनीतिकार से सीधे राजनीति में आये प्रशांत किशोर ने सबसे पहले उपचुनाव मंे जोर आजमाइश की थी। उनकी पार्टी जनसुराज पार्टी (जसुपा) को किसी भी सीट पर सफलता नहीं मिल पायी लेकिन वोट प्रतिशत से वह संतुष्ट थे। अब राज्य के विधानसभा चुनाव मंे वह सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ने की रणनीति बना रहे है।ं प्रशांत किशोर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। उन्हांेने सबसे पहले अपने प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी। उस समय तक यह कहा जा रहा था कि प्रशांत किशोर दो सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। प्रशांत किशोर के लिए चुनाव में जीत से ज्यादा पार्टी की प्रतिष्ठा की चिंता है। इस तरह वह आम जनता को यह संदेश भी देना चाहते हैं कि जसुपा को सत्ता का लालच नहीं हैं। जनसुराज पार्टी के संस्थापक कहते हैं कि हमारी पार्टी को अगर 120 या 130 सीटें भी मिल जाती हैं तो वह मेरी नजर मंे हार होगी। वह कहते हैं कि अगर जनता ने हमारे ऊपर पर्याप्त भरोसा नहीं जताया, तब भी हम अपनी सड़क और समाज की राजनीति को आगे बढ़ाते रहेंगे। इस प्रकार प्रशांत किशोर एक ऐसी सहानुभूति की लहर पैदा करना चाहते हैं जो बिहार की राजनीति मंे दिल्ली जैसी क्रांति ला सकती है। प्रशांत किशोर ने बिहार को हर प्रकार के माफियाओं से मुक्त कराने का वादा कर रखा है। अपनी पार्टी मंे असंतोष को दबाने के लिए पीके ने यह भी घोषणा की है कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे। इस फैसले को वह पार्टी के व्यापक हित में बताते हैं। प्रशांत किशोर ने मुफ्त की रेवड़ी बांटने का कोई वादा नहीं किया है लेकिन केजरीवाल की तरह बिहार मंे भ्रष्टाचार की नब्ज जरूर पकड़ ली है। अब मतदाताओं पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह तो 14 नवम्बर को ही पता चल सकेगा। जसुपा ने 13 अक्टूबर को 65 उम्मीदवारों की दूसरी सूची भी जारी कर दी है।
बिहार विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी ने आज अपने 65 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। इससे पहले जनसुराज पार्टी ने 51 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इस सूची में 7 सुरक्षित और 44 सामान्य सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की गई है। पार्टी ने जातीय संतुलन का ध्यान रखते हुए अति पिछड़ा वर्ग से 17 (16 हिंदू और 1 मुस्लिम), अन्य पिछड़ा वर्ग से 11, सामान्य वर्ग से 9 और अल्पसंख्यक वर्ग से 7 उम्मीदवार उतारे हैं। इसके अलावा, वाल्मीकिनगर विधानसभा सीट से एक अनुसूचित जनजाति उम्मीदवार को टिकट दिया गया है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि हमने बिहार को भू-माफिया, बालू माफिया और तमाम तरह के माफियाओं से मुक्त करने का वादा किया है। इसी दिशा में हमने छह बड़े वादे किए हैं, जिनमें फर्जी शराबबंदी नीति को खत्म करना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के एक महीने के भीतर एक कानून बनाया जाएगा, जिसके तहत 100 सबसे भ्रष्ट नेताओं और अफसरों की पहचान की जाएगी। मुझे पूरा यकीन है कि ये लोग अभी से पूजा-पाठ कर रहे होंगे कि हम सत्ता में न आएं। इन भ्रष्ट लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा और उनकी अवैध संपत्ति जब्त कर राज्य के खजाने में जमा की जाएगी, ताकि बिहार के विकास में उसका इस्तेमाल हो सके। यह वही विकास है जो इन लोगों की वजह से रुका पड़ा है। उनसे उनकी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया, तो 48 वर्षीय प्रशांत किशोर ने कहा कि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि हम या तो भारी जीत दर्ज करेंगे या पूरी तरह हार जाएंगे। मैंने पहले भी कहा है कि हमें या तो 10 से कम सीटें मिलेंगी या 150 से ज्यादा। बीच का कोई रास्ता नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि अगर बिहार में त्रिशंकु विधानसभा बनती है, तो क्या जन सुराज एनडीए या इंडिया गठबंधन को समर्थन देगा, इस पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि त्रिशंकु जनादेश की कोई संभावना नहीं है। पीके ने यह भी कहा कि अगर हमें 150 से कम सीटें मिलती हैं। अगर जनसुराज को 120 या 130 सीटें भी आती हैं तो वह मेरी नजर में हार होगी। अगर हम अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो हमें बिहार को देश के 10 सबसे विकसित राज्यों में शामिल करने का जनादेश मिलेगा लेकिन, अगर जनता ने हमारे ऊपर पर्याप्त भरोसा नहीं जताया। हम अपनी सड़क और समाज की राजनीति को आगे बढ़ाते रहेंगे।
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की पार्टी ने विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी दूसरी लिस्ट जारी कर दी है। जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने पहले ही कहा था कि समाज में जिसकी जितनी हिस्सेदारी है, उन्हें उतनी ही हिस्सेदारी मिलेगी। बिहार में अतिपिछड़ा समाज के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इसीलिए हमलोगों ने अब तक एक तिहाई सीटों पर इन्हें ही टिकट दिया है। दूसरी लिस्ट में 65 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की गई है। इससे पहले 51 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की गई थी। अब तक 116 प्रत्याशी के नाम की घोषणा की गई है। इसमें सबसे अधिक संख्या अतिपिछड़ा समाज के लोगों की है। पीके ने कहा कि बिहार के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी राजनीतिक दल ने इतने अधिक संख्या में अतिपिछड़ों को टिकट दिया है। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने 65 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है।
प्रशांत किशोर, जिन्हें आमतौर पर पीके के नाम से जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिक और पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार हैं। उन्होंने आठ वर्षों तक एक संयुक्त राष्ट्र समर्थित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में कार्य किया, उसके बाद भारतीय राजनीति में प्रवेश किया और राजनीतिक रणनीतिकार बन गये।
किशोर ने कई प्रमुख भारतीय राजनीतिक दलों के लिए सफलतापूर्वक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया है, जिनमें बीजेपी, जेडीयू, कांग्रेस, आप, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, डीएमके और टीएमसी शामिल हैं। उनका पहला प्रमुख राजनीतिक अभियान 2011 में था, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को तीसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद पर पुनः निर्वाचित करने में सहायता की। हालांकि, उन्हें व्यापक पहचान तब मिली जब उन्होंने सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस नामक एक चुनावी अभियान समूह की स्थापना की, जिसने भारतीय जनता पार्टी को भारतीय आम चुनाव, 2014 में पूर्ण बहुमत से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रशांत किशोर का जन्म बिहार के रोहतास जिले में सासाराम के पास कोनार गाँव में हुआ था। उनके पिता श्रीकांत पांडे एक डॉक्टर थे और माँ, सुशीला पांडे, एक गृहिणी थीं। बाद में उनका परिवार बक्सर आकर बस गया, जहाँ से उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की। उनकी पत्नी डॉ. जाह्नवी दास असम के गुवाहाटी की रहने वाली हैं और पेशे से चिकित्सक हैं। दोनों का एक बेटा भी है। किशोर ने भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.पा.) या गुजरात सरकार में किसी पद को स्वीकार किए बिना, वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा की पूर्व-चुनावी रणनीति को लेकर एक प्रमुख राजनीतिक रणनीतिकार के रूप में कार्य किया।
साल 2013 में, किशोर ने रॉबिन शर्मा और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर “सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस नामक एक मीडिया एवं जनसंपर्क संस्था की स्थापना की, जिसका उद्देश्य था मई 2014 के आम चुनाव के लिए अभियान तैयार करना। किशोर और उनकी टीम को नरेंद्र मोदी के लिए अभिनव विपणन और प्रचार अभियान तैयार करने का श्रेय दिया गया, जिनमें प्रमुख थे चाय पर चर्चा कार्यक्रम, रैलियाँ, रन फॉर यूनिटी कार्यक्रम, मंथन और कई सोशल मीडिया अभियानों की संकल्पना। वर्ष 2015 में, उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली महागठबंधन को बिहार विधानसभा चुनाव, 2015 में जीत दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 16 सितंबर 2018 को जनता दल (यूनाइटेड) में उपाध्यक्ष के रूप में प्रवेश किया। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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