मादुरो की गिरफ्तारी और तेल की राजनीति

दक्षिण अमेरिका के इतिहास में एक बार फिर ऐसा अध्याय जुड़ गया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को झकझोर कर रख दिया है। अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और उन्हें देश से बाहर ले जाकर न्यूयॉर्क में मुकदमे का सामना कराने की घटना ने न केवल वेनेजुएला की राजनीति को, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन को भी नए सिरे से सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार यह कार्रवाई एक “विशेष सैन्य अभियान” थी, जिसका उद्देश्य मादुरो को सत्ता से हटाकर वेनेजुएला में “उचित और सुरक्षित सत्ता संक्रमण” सुनिश्चित करना है। तड़के 2.01 बजे अमेरिकी विशेष बलों ने कराकास में मादुरो के आवास पर धावा बोला। राजधानी की बिजली काटी गई, सैन्य ठिकानों पर हमले हुए और अंततः मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेंस को हिरासत में लेकर अमेरिका ले जाया गया। इस पूरे अभियान में 150 से अधिक विमानों के उपयोग की बात कही जा रही है, जबकि अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि उनके किसी सैनिक की मृत्यु नहीं हुई।
हालांकि, वेनेजुएला के रक्षा मंत्री व्लादिमिर पाद्रीनो ने इस कार्रवाई में मादुरो की सुरक्षा टीम, सैनिकों और “निर्दोष नागरिकों” के मारे जाने का आरोप लगाया है। सरकार ने इसे अमेरिकी आक्रामकता और संप्रभुता पर सीधा हमला बताया है। अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रीगेज को शपथ दिलाई गई है, जिन्होंने मादुरो की रिहाई की मांग करते हुए कहा है कि वही देश के वैध राष्ट्रपति हैं।
अमेरिका ने मादुरो और उनकी पत्नी पर नशीले पदार्थों की तस्करी, हथियार रखने और “नार्को-आतंकवाद” के आरोप लगाए हैं। अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से मादुरो पर ड्रग कार्टेल से संबंध होने का आरोप लगाता रहा है, जिसे मादुरो सिरे से खारिज करते आए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वेनेजुएला मुख्यतः ड्रग ट्रांजिट देश रहा है, जबकि फेंटेनाइल जैसे नशीले पदार्थों का उत्पादन मुख्यतः मैक्सिको में होता है।
इस पूरे घटनाक्रम में वेनेजुएला का तेल एक अहम कारक बनकर उभरा है। दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार रखने वाला यह देश वर्षों से आर्थिक संकट में है। ट्रंप का यह कहना कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में जाकर “इन्फ्रास्ट्रक्चर ठीक करेंगी और मुनाफा कमाएंगी”, कई देशों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि क्या यह कार्रवाई लोकतंत्र की बहाली है या संसाधनों पर कब्जे की कोशिश।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तीखी रही है। रूस, चीन, ईरान, क्यूबा और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता जताई है कि इस कार्रवाई में वैश्विक नियमों की अनदेखी की गई। वहीं अर्जेंटीना जैसे कुछ देशों ने इसे “स्वतंत्रता की ओर कदम” बताया है।
आज वेनेजुएला एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां सत्ता, संप्रभुता और संसाधनों की लड़ाई खुलकर सामने आ चुकी है। सवाल यह नहीं है कि मादुरो जाएंगे या नहीं, सवाल यह है कि क्या किसी
देश का भविष्य बाहरी ताकतें तय
करेंगी- और अगर हां, तो इसकी कीमत केवल वेनेजुएला ही नहीं, पूरी दुनिया चुकाएगी।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



