मैथिली का दायित्व और सियासत

राजनीति सीधे-सीधे नहीं चलती लेकिन कोई जनप्रतिनिधि जब अपना दायित्व सियासत से परे रखकर निभाता है तो अच्छी उम्मीदें जागती हैं। बिहार में लोकगायिका मैथिली ठाकुर पहली बार विधायक बनी हैं।उन्होंने भाजपा के बैनर तले चुनाव जीता। भाजपा नीतीश कुमार की सरकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सबसे ज्यादा विधायक उसी के पास हैं। दलगत राजनीति को किनारे रखकर हालंाकि विधायक के दायित्व का निर्वहन करते हुए मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र के जर्जर अस्पताल का मामला उठाया लेकिन राजनीति की गणित में यह फिट नहीं बैठता है। मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया कि सरकार जब हर वर्ष स्वास्थ्य बजट में बढ़ोत्तरी कर रही है, तब अस्पतालों की इमारतें जर्जर क्यों हैं? स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय असहज हो गये क्योंकि सदन में विपक्षी सदस्य मैथिली ठाकुर के सवाल का मेजें थपथपाकर स्वागत कर रहे थे। असहज स्थिति के बीच भी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सियासी जवाब दिया कि राज्य सरकार अस्पतालों के भवनों की जर्जर स्थिति को लेकर गंभीर है। कुछ जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है। मैथिली ठाकुर ने अस्पतालों मंे दवाइयों और डाक्टरां की कमी का सवाल भी उठाया था। मंत्री ने इस पर भी सियासी शब्दावली मंे जवाब दिया। मैथिली ठाकुर की तारीफ करनी पड़ेगी कि उन्होंने अपने कत्र्तव्य से समझौता नहीं किया। मंत्री के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए कहा कि मेरे क्षेत्र के जर्जर अस्पताल का नाम पुनर्निर्माण की सूची मंे कई वर्षों से दर्ज है लेकिन आज तक मरम्मत नहीं हुई। विधायक मैथिली ठाकुर का यह सवाल सभी विधायकों के लिए प्रेरणा बनना चाहिए। हमंे ऐसे ही जनप्रतिनिधियों की जरूरत है। मैथिली ने अलीनगर सीट से राजद नेता विनाद मिश्र को 11700 मतों से पराजित किया है।
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की जर्जर हालत का मुद्दा सदन में गूंजा। इस बार चर्चा के केंद्र में रहीं अपने बेबाक सवालों के लिए जानी जाने वाली विधायक मैथिली ठाकुर। उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के सरकारी अस्पताल के जर्जर भवन को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से सवाल किया, लेकिन मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होने पर उन्होंने उसी मुद्दे पर दोबारा तीखा सवाल दाग दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में मैथिली ठाकुर ने अपने क्षेत्र के अस्पताल भवन की हालत का जिक्र करते हुए कहा कि अस्पताल की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि छत से प्लास्टर गिरता रहता है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात के मौसम में वार्डों में पानी टपकता है। विधायक ने कहा कि इसी भवन में मरीजों का इलाज होता है, गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है और बच्चों को रखा जाता है, जो सीधे तौर पर लोगों की जान से खिलवाड़ है।
मैथिली ठाकुर ने सवाल उठाया कि जब सरकार हर साल स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी कर रही है, तो फिर अस्पतालों की इमारतें इस हालत में क्यों हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर और दवाइयों की कमी एक समस्या है, लेकिन उससे भी बड़ा खतरा जर्जर भवन है, जो कभी भी गिर सकता है। विधायक ने सदन में पूछा कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है, तभी नए भवन का निर्माण होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने सियासी जवाब दिया और कहा सरकार जर्जर भवनों पर गंभीर है। इन भवनों की मरम्मत या नवनिर्माण होगा। स्वास्थ्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि राज्य सरकार अस्पतालों के भवनों की स्थिति को लेकर गंभीर है। मंत्री ने बताया कि कई अस्पतालों के लिए नए भवनों की स्वीकृति दी जा चुकी है और कुछ जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन अस्पतालों की इमारतें बेहद जर्जर हैं, उन्हें चिह्नित किया गया है और चरणबद्ध तरीके से उनकी मरम्मत या नए भवन का निर्माण किया जाएगा। हालांकि मंत्री का यह जवाब मैथिली ठाकुर को संतुष्ट नहीं कर पाया। मैथिली ठाकुर ने स्पष्ट रूप से कहा कि मैं मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं हूं। उन्होंने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उनके क्षेत्र के अस्पताल का नाम वर्षों से सूची में है, लेकिन आज तक न मरम्मत हुई और न ही नए भवन का काम शुरू हुआ। विधायक ने दोबारा सवाल करते हुए कहा कि हर साल सिर्फ योजना और “स्वीकृति की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि मरीज और उनके परिजन डर के साए में इलाज कराने को मजबूर हैं।
मैथिली ठाकुर का जन्म जुलाई 2000 में हुआ। वह एक भारतीय गायिका व राजनीतिकर्मी हैं। वह मैथिली और भोजपुरी गाने गाती है जिसमें छठ गीत और कजरी शामिल हैं। वह अन्य भारतीय भाषाओं की कई तरह के बॉलीवुड कवर और अन्य पारंपरिक लोक संगीत भी गाती हैं। भारतीय जनता पार्टी की सदस्य के रूप में अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से 2025 बिहार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद, 25 वर्ष की आयु में भारत की सबसे कम उम्र की विधायक बनकर उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया है। उनके पिता रमेश ठाकुर, जो खुद अपने क्षेत्र के लोकप्रिय संगीतकार थे, और माता भारती ठाकुर, एक गृहिणी। उसका नाम उसकी मां के नाम पर रखा गया था। उनके दो छोटे भाई हैं, जिनका नाम ऋषभ और अयाची है, जो मैथिली की संगीत यात्रा का अनुसरण करते हैं, दोनों भाई तबला बजाकर और गायन में उनका साथ देते हैं। मैथिली ने अपने पिता से संगीत सीखा। अपनी बेटी की क्षमता को महसूस करते हुए और अधिक अवसर प्राप्त करने के लिए, रमेश ठाकुर ने खुद को और अपने परिवार को नई दिल्ली के निकट द्वारका में स्थित किया। मैथिली और उनके दो भाइयों की शिक्षा वहाँ के बाल भवन इंटरनेशनल स्कूल में हुई थी। यहां तक कि उनकी पढ़ाई के दौरान, तीन भाई-बहनों को उनके पिता ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, हारमोनियम और तबला में प्रशिक्षित किया था। उनकी प्रसिद्धि 2017 में बढ़ी जब उन्होंने राइजिंग स्टार के सीजन 1 में भाग लिया। मैथिली शो की पहली फाइनलिस्ट थीं, उन्होंने ओम नमः शिवाय गाया, जिसने फाइनल में उनको सीधे प्रवेश दिया। वह दो वोटों से हारकर दूसरे स्थान
पर रहीं। शो के बाद, उनकी इंटरनेट लोकप्रियता बढ़ गई। यू-ट्यूब और फेसबुक पर उनके वीडियो अब
70,000 से 7 मिलियन के बीच मिलते हैं। यह कलाकार अब राजनीति मंे आयी है तो ढेर सारी उम्मीदें भी दिख रही हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



