फिर टकराएंगे ममता व सुवेन्दु

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में यूं तो सभी महत्वपूर्ण हैं लेकिन देश भर की निगाहें पश्चिम बंगाल पर लगी हुई हैं। पश्चिम बंगाल मंे ममता बनर्जी हैट्रिक लगा चुकी हैं और लगातार चार बार सरकार बनाने का वह रिकार्ड बनाएंगी इसके अलावा उनके प्रतिद्वन्द्वी सुवेन्दु अधिकारी फिर से टक्कर दे रहे हैं। पिछली बार ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव हार गयी थीं। उनको पराजित करने वाले सुवेन्दु अधिकारी ही थे। बाद में ममता बनर्जी ने भवानीपुर से उपचुनाव लड़ा और बड़े बहुमत से जीत हासिल की। भवानीपुर तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है। ममता बनर्जी फिर इसी सीट से चुनाव लड़ रही हैं। सुवेन्दु अधिकारी अपनी परम्परा गत सीट नंदीग्राम से तो चुनाव लड़ ही रहे हैं, साथ ही भवानीपुर से भी उन्होंने नामांकन दाखिल किया है। नंदीग्राम मंे भी तृणमूल कांग्रेस ने सुवेन्दु को टक्कर देने की रणनीति बनायी है। उनके मुकाबले में टीएमसी ने सुवेन्दु के ही पूर्व करीबी पवित्र कर को मैदान मंे उतारा है। सुवेन्दु ने दावा किया है कि वह इस बार भवानीपुर में ममता बनर्जी को पराजित करेंगे। पश्चिम बंगाल में इस बार दो चरणों मंे चुनाव सम्पन्न कराया जाएगा। मतदान का पहला चरण 23 अप्रैल 2026 और दूसरा चरण 29 अप्रैल को समपन्न होगा। पिछली बार 2021 मंे सम्पन्न हुए चुनाव में ममता बनर्जी की टीएमसी ने 48.2 फीसदी मत पाकर 215 विधायक जुटा लिये थे जबकि
37.7 फीसद मत पाकर भी भाजपा को सिर्फ 77 विधायक मिल पाये थे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए राज्य के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने हल्दिया में भारी हुजूम के साथ अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस बार सुवेंदु केवल अपनी पारंपरिक सीट नंदीग्राम से ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अभेद्य दुर्ग भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं। नामांकन के दौरान उनके साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मौजूद रहे, जिन्होंने सुवेंदु को ‘बंगाल के परिवर्तन का नायक’ बताया। नामांकन के साथ ही सुवेंदु अधिकारी का चुनावी हलफनामा भी सार्वजनिक हो गया है, जो चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच सीधी जंग है। चुनावी हलफनामों के अनुसार, ममता बनर्जी देश की सबसे कम संपत्ति वाली मुख्यमंत्री बनी हुई हैं, जबकि सुवेंदु अधिकारी की संपत्ति में पिछले 5 वर्षों में बढ़ोत्तरी हुई है। सुवेंदु ने भी हुंकार भरते हुए कहा कि वे भवानीपुर में ममता बनर्जी को दूसरी बार हराएंगे और बंगाल को ‘बांग्लादेश’ बनने से रोकेंगे। भवानीपुर में सुवेंदु अधिकारी ममता को ‘बाहरी’ बनाम ‘भीतरी’ के मुद्दे पर घेर रहे हैं, जबकि ममता बनर्जी अपनी ‘सादगी’ और ‘जनसेवा’ के रिकॉर्ड के साथ मैदान में हैं। नंदीग्राम में, सुवेंदु अपनी जीत बरकरार रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जहां टीएमसी ने उनके ही पूर्व करीबी पवित्र कार को मैदान में उतारा है। पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच कांटे की टक्कर है। इस बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट ही सबसे हॉट सीट बन गई है। भाजपा ने ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि इस सीट पर खुद ममता बनर्जी बुरी तरह घिरती दिख रही हैं। हालांकि यह उनकी पारंपरिक सीट है और वह यहां से कई बार विधायक बनी हैं।
दक्षिण कोलकाता की इस सीट पर भाजपा के सुवेंदु अधिकारी मैदान में है। टीएमसी अपने संगठनात्मक ताकत और भावनात्मक जुड़ाव के सहारे इस गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है। भाजपा का फोकस सोशल गणित और प्रतीकात्मक मुद्दे हैं। यह मुकाबला 2021 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाता है, जब ममता बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी और अब भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके गृह क्षेत्र नंदीग्राम में चुनाव लड़ा था। उस समय ममता हार गई थीं, हालांकि भाजपा को पूरे राज्य में शिकस्त का सामना करना पड़ा था। बाद में ममता ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं।
टीएमसी भवानीपुर में ‘घर की बेटी’ (घोरेर मेये) का भावनात्मक पिच चला रही है। पार्टी राज्य अध्यक्ष सुब्रत बक्शी की अध्यक्षता में हुई रणनीति बैठक में काउंसलरों को निर्देश दिया गया कि वे स्लोगन को घर-घर पहुंचाएं। संदेश साफ है- भवानीपुर सिर्फ मुख्यमंत्री चुन नहीं रहा, बल्कि अपनी बेटी के साथ खड़ा हो रहा है। पार्टी ने आक्रामकता के बजाय भावनात्मक, जुड़ाव और विकास कार्यों पर फोकस करने का फैसला किया है। काउंसलरों को घर-घर जाकर पर्चे बांटने और ममता बनर्जी के विकास कार्यों को हाइलाइट करने को कहा गया है। पूरे क्षेत्र में फोटो कॉर्नर सेट किए गए हैं, जहां लोग ममता बनर्जी के लाइफ-साइज कटआउट के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं। वॉर्ड 73 के मुक्तदल मोड़ पर पहला ऐसा बूथ लगा है, जहां ममता रहती हैं। यहां का अपील है- ममता बनर्जी के साथ खड़े होइए, फोटो खींचिए, बंगाल के लिए बोलिए। एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा कि हम इस चुनाव को आक्रामकता से नहीं, बल्कि भावनात्मक, कनेक्ट और ममता जी के भवानीपुर में किए गए काम से लड़ रहे हैं। भाजपा का मानना है कि जमीन बदली है। भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहां बंगाली भद्रलोक, मारवाड़ी-गुजराती व्यापारी, सिख-जैन परिवार और अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है। लगभग 42 प्रतिशत मतदाता बंगाली हिंदू, 34 प्रतिशत गैर-बंगाली हिंदू और 24 प्रतिशत मुस्लिम हैं। भाजपा ने महीनों से बूथ-बूथ और समुदाय-समुदाय स्तर पर मैपिंग की है। पार्टी के अनुसार यहां कायस्थ 26.2 प्रतिशत, मुस्लिम 24.5 प्रतिशत, पूर्वी भारतीय प्रवासी समुदाय 14.9 प्रतिशत, मारवाड़ी 10.4 प्रतिशत और ब्राह्मण 7.6 प्रतिशत हैं।
इसी रणनीति के तहत सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में भवानीपुर से गुजरने वाली राम नवमी शोभायात्रा में हिस्सा लिया, जो हाजरा क्रॉसिंग पर समाप्त हुई। यानी ठीक ममता बनर्जी के घर के पास। अधिकारी ने कहा कि राज्य अब राम राज्य चाहता है। लोग तुष्टिकरण की राजनीति से थक चुके हैं। वे अच्छे शासन चाहते हैं।
चुनावी रोल की विशेष गहन समीक्षा ने मुकाबले में नया आयाम जोड़ दिया है। भवानीपुर से लगभग 47,000 नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, जो 2021 के उपचुनाव में ममता की 58,832 वोटों की बढ़त से करीब 11,000 कम है। अन्य 14,000 नाम अभी जांच के अधीन हैं। जांच के अधीन नामों में 56 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम हैं, जबकि समुदाय कुल मतदाताओं का सिर्फ 24 प्रतिशत है। भाजपा का मानना है कि अगर अल्पसंख्यक वोट थोड़ा भी कम हुआ और हिंदू वोट उसकी तरफ एकजुट हुए तो भवानीपुर कड़ी टक्कर दे सकता है। टीएमसी इसे अल्पसंख्यक और पारंपरिक समर्थकों पर असर मान रही है। इसलिए फिरहाद हाकिम, सुब्रत बक्शी जैसे नेता व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं। अभिषेक बनर्जी ने ममता के लिए कम से कम 60,000 वोटों की बढ़त का लक्ष्य रखा है।
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने भवानीपुर में अपनी उपस्थिति दिखाई थी। 2014 में तो उसने ममता के अपने वॉर्ड 73 में भी जीत हासिल की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भवानीपुर सेगमेंट में टीएमसी की बढ़त महज 8,297 वोट रह गई, जबकि 2021 उपचुनाव में यह 58,832 थी। आठ वॉर्डों में से पांच में भाजपा आगे रही, टीएमसी सिर्फ तीन में। ये आंकड़े बताते हैं कि भवानीपुर अब अजेय नहीं रहा। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



