सेवा तीर्थ से चलेगी मोदी सरकार

नाम, कार्य और स्थल का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध होता है। इसीलिए भोजन कक्ष, शयन कक्ष, स्नानागार और सीता रसोई अलग-अलग बनायी जाती हैं। मंदिर बनाने की धारणा के पीछे भी यही मंतव्य है। ईश्वर तो हर जगह है। सर्वत्र व्यापक है लेकिन जब हम किसी मंदिर के प्रांगण मंे पहुंचते हैं तो वहां ईश्वर के प्रति एक अलग ही भाव पैदा होता है। इसीलिए नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कामकाज के लिए एक नया भवन बनवाया है जिसका नाम सेवातीर्थ रखा गया हैं सरकार देश की जनता के कल्याण और विकास के साथ राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानती है। मौजूदा समय में वैश्विक प्रतिस्पद्र्धा मंे टिके रहना आसान नहीं है। रूस-यूक्रेन संघर्ष और इजरायल की फिलिस्तीन ही नहीं ईरान से भी तनातनी इसी प्रतिस्पद्र्धा की कड़ियां हैं। इसलिए सरकार जिस स्थान और उसके नाम से संचालित हो रही है, उसका प्रभाव उसके कार्य पर पड़ना भी स्वाभाविक है। तीर्थ का महत्व भारतवासियों को बताने की जरूरत नहीं है। वहां विभिन्न स्थानों से लोग श्रद्धा और विश्वास की भावना लेकर आते हैं। तीर्थराज प्रयाग में जब भाई राम को वनवास से वापस लाने के लिए भरत जी पहुंचे थे, तब उन्होंने ऋषि भरद्वाज से कहा था कि तीर्थ स्थल पर सच्ची शपथ भी कठिनाई मंे डाल सकती है और झूठी शपथ तो महाविनाश कर देगी। इसलिए सेवातीर्थ से जो सरकार कामकाज करेगी, वो छल-कपट का रंचमात्र भी सहारा नहीं ले सकती। सेन्ट्रल बिस्टा परियोजना के तहत बने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 व 2 का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 फरवरी को उद्घाटन किया है। पूर्व मंे जिसे हम प्रधानमंत्री आफिस (पीएमओ) कहते हैं, वह अपने पूर्व ठिकाने साउथ ब्लाक से हटकर अब सेवातीर्थ स्थल पर आ जाएगा। उधर, भारतीय वायुसेना मंे इजाफा होने जा रहा है। मोदी सरकार ने फ्रांस से 114 नये राफेल खरीदने का सौदा किया है।
सरकार के कामकाज का यह नया भवन सेवा तीर्थ करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है। इसके निर्माण पर 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके परिसर में 3 मुख्य इमारतें हैं- सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3। सेवा तीर्थ प्रथम में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर स्थित थे। सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय का नया मुख्यालय है। सेवा तीर्थ-3 में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (एनएससीएस) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के कार्यालय होंगे। सेवा तीर्थ को ओपन फ्लोर जैसा बनाया गया है। इसका मकसद औपचारिकताओं को कम करना, अधिकारियों के बीच तालमेल बढ़ाना और आपसी पारदर्शिता की भावना को विकसित करना है। सेवा तीर्थ को एन्क्रिप्टेड संचार प्रणालियों, उन्नत साइबर सुरक्षा नेटवर्क और एकीकृत सुरक्षा वास्तुकला के लैस किया गया है। यह इमारत भूकंप प्रतिरोधी है। सेवा तीर्थ परिसर में कर्तव्य भवन 1 और 2 में कानून, रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, कृषि और कई अन्य महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालय स्थित हैं। दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, संरचित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं हैं। यहां 4-स्टार गृह (जीआरआईएचए) (ग्रीन रेटिंग फॉर इंटीग्रेटेड हैबिटैट असेसमेंट) मानकों के अनुरूप डिजाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं।
इन भवन परिसरों में व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी की गई हैं जैसे कि स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना, जिससे अधिकारियों और आगंतुकों के लिए सुरक्षित एवं सुगम वातावरण सुनिश्चित होता है।
प्रधानमंत्री आफिस अर्थात् पीएमओ द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि यह उद्घाटन भारत की प्रशासनिक शासन संरचना में मील का पत्थर है और यह आधुनिक, कुशल, सुलभ एवं जन-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसमें कहा गया है कि दशकों तक, कई प्रमुख सरकारी कार्यालय और मंत्रालय सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर बने और पुराने बुनियादी ढांचे से संचालित होते रहे हैं। कार्यालयों के एक साथ नहीं होने के कारण परिचालन में अक्षमताएं, समन्वय संबंधी चुनौतियां, रखरखाव लागत में वृद्धि और कार्य के उचित वातावरण की समस्या पैदा हुई। इसमें कहा गया है कि नए भवन परिसर आधुनिक एवं भविष्य के लिए तैयार सुविधाओं के भीतर प्रशासनिक कार्यों को समेकित करके इन समस्याओं का समाधान करते हैं।
उधर, भारतीय वायुसेना की ताकत में इजाफा होने जा रहा है। इसके लिए मोदी सरकार ने फ्रांस से नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दे दी है। पूरी दुनिया ने पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फाइटर जेट राफेल का दम देखा था कि कैसे भारत ने पाकिस्तान पर एयर डॉमिनेंस बनाए रखा था और पलक झपकते ही पाकिस्तान के नूर खान समेत तमाम एयरबेस पर अटैक किया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में नए राफेल जेट्स की खरीद को मंजूरी दी गई है।रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने प्रमुख उच्च-मूल्य रक्षा खरीद के लिए एओएन अर्थात् एक्सेप्टेन्स आफ नेसेस्टीदे दी है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सशस्त्र सेनाओं के अलग-अलग प्रस्तावों के लिए करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित कीमत की मंजूरी दी गई। फ्रांस से राफेल वाली डील के लिए लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये की डील को मंजूरी मिली है। इसमें 2.5 लाख करोड़ रुपये, 114 राफेल लड़ाकू विमानों के लिए और शेष राशि हथियारों, पुर्जों और सहायक पैकेजों के लिए है। खरीदे जाने वाले ज्यादा एमआरएफए राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा। कॉम्बैट मिसाइलें स्टैंड-ऑफ ग्राउंड अटैक क्षमता को गहरी मारक ताकत और अत्यधिक सटीकता के साथ मजबूत करने वाली हैं। वहीं, एएस-एचएपीएस का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए लगातार इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर), इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस, दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग के लिए होगा।
भारत ने फ्रांस से पूर्व में 36 राफेल विमानों को खरीदा था, जिसकी डिलीवरी दिसंबर, 2024 में पूरी हो गई थी। ये लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के 2 स्क्वाड्रनों- अंबाला में ‘गोल्डन एरोज’ और हाशिमारा में फाल्कन्स में हैं। राफेल में घातक हथियार प्रणाली होती है। यह मेटोर मिसाइल से लैस है जो हवा से हवा में मार करने वाली विश्व की सबसे उन्नत मिसाइलों में से एक है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर से ज्यादा है।(मनीषा-हिफी फीचर)



