बिहार को सुंदर व समृद्ध बनाएंगे निशांत

बिहार की राजनीति में एक नया
अध्याय प्रारम्भ हुआ है। कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी से सत्ता छीनकर स्थानीय दलों ने लगभग 22 साल तक राज किया। इस बीच दो महत्वपूर्ण बातें आम चर्चा मंे रहीं। पहली थी लालू यादव का जंगलराज। उस समय उनके साले साहेब साधु यादव पटना रेलवे स्टेशन के जिस प्लेटफार्म पर ट्रेन रुकवाना चाहते थे, वहीं पर गाड़ी रुकती थी। शोरूम से कारें निकालकर बारात का स्वागत करती थीं, ऐसी भी चर्चा हुई थी। इसी दौर मंे चारा घोटाला और नौकरी के बदले जमीन घोटाले भी चर्चित रहे। जाहिर है जनता इससे तंग आ चुकी थी। विशेष रूप से सरकारी अमला बिहार मंे काम करना पसंद नहीं करता था। इसीलिए नीतीश कुमार को सुशासन कुमार का रुतबा मिला था। सभी ने बिहार मंे इस बदलाव को महसूस किया था। इस बीच रामबिलास पासवान और जीतन राम मांझी जैसे नेता भी उभरे। ये दोनों दलित समुदाय से थे। जीतनराम तो लालू यादव की कृपा से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गये जबकि जार्ज फर्नांडीज जैसे खांटी समाजवादी को किनारे कर नीतीश कुमार लगातार 10 बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे। इस प्रकार की उथल-पुथल भरी सियासत के बाद भाजपा ने पहली बार सरकार बनायी और निष्कंटक राज के लिए नीतीश कुमार को राज्यसभा में बुला लिया। इससे यह नहीं समझ लेना चाहिए कि नीतीश कुमार बिहार की राजनीति से पूरी तरह दूर हो जाएंगे। उन्होंने अपने बेटे निशांत को सम्राट चैधरी के मंत्रिमंडल में शामिल करा दिया है। उनको स्वास्थ्य विभाग दिया गया है लेकिन मंत्री पद की शपथ लेते ही निशांत ने कहा वह बिहार को सुंदर व समृद्ध बनाएंगे। हालांकि सम्राट चैधरी ने उनको स्वास्थ्य विभाग सौंपा है जिसकी विधानसभा में सरेआम आलोचना भाजपा विधायक और लोकगायिका मैथिली ठाकुर ने की थी। जाहिर है सम्राट चैधरी ने निशांत को बहुत ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
बिहार में 7 मई को सम्राट चैधरी की कैबिनेट का विस्तार किया गया। पटना के गांधी मैदान में हुए कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह समेत एनडीए के तमाम नेता मौजूद थे। इस दौरान 32 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली है। जिन नेताओं ने मंत्री पइ की शपथ ली उनमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम भी शामिल है। शपथ लेने के बाद सभी मंत्रियों को उनके विभागों का बंटवारा कर दिया गया। निशांत कुमार को सम्राट चैधरी की सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रभार मिला है। अब स्वास्थ्य मंत्री का पद संभालने के बाद निशांत कुमार ने अपना पहला बयान जारी किया है। निशांत कुमार ने कहा- सम्राट जी ने जो मुझे जिम्मेदारी दी है, ईमानदारी से उसे निभाने की कोशिश करूंगा। पिताजी (नीतीश कुमार) ने 20 सालों में जो कुछ भी किया स्वास्थ्य समेत सभी विभागों में उसे आगे बढ़ाऊंगा। मेरी कोशिश होगी कि ईमानदारी और सच्चाई से अपना काम करूं और जनता की सेवा करूं। सोशल मीडिया पर जारी अपने एक पोस्ट में निशांत ने कहा- आज बिहार सरकार के मंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद मैं जद(यू) प्रदेश कार्यालय पहुंचा। भारी संख्या में प्यारे कार्यकर्ता भाइयों और बहनों के अलावा माननीय सांसदों,विधायकों तथा पार्टी पदाधिकारियों ने गर्मजोशी से मेरा स्वागत किया। सभी का मेरे प्रति प्यार ही मेरी ताकत है। मैंने भी सभी का दिल से अभिवादन किया। आनेवाले दिनों में बिहार को सबसे विकसित राज्य बनाने के मिशन पर लगना है। सभी के सपनों को पूरा करना है। पिताजी के दिखाए रास्ते पर चलकर अपने बिहार को सुंदर और समृद्ध बनाना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी ने गृह समेत 6 अहम विभाग अपने पास रखे हैं जिनमें सामान्य प्रशासन, गृह, मंत्रिमंडल सचिवालय, निगरानी, निर्वाचन, सिविल विमानन और ऐसे सभी विभाग शामिल हैं जो किसी अन्य मंत्री को अलॉट नहीं किया गया हो। जबकि डिप्टी सीएम विजय कुमार चैधरी को जल संसाधन और संसदीय कार्य विभाग दिया गया है। वहीं दूसरे डिप्टी सीएम बिजेन्द्र प्रसाद यादव को वित्त और वाणिज्य कर विभाग सौंपे गए हैं। मंत्री श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास और सूचना जनसंपर्क विभाग मिला है, वहीं पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा को कृषि विभाग दिया गया है। दिलीप कुमार जायसवाल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग सौंपा गया है।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जद(यू) नेता नीतीश कुमार के बेटे निशांत आम तौर पर राजनीति से दूर रहे हैं और एक शांत तथा निजी जीवन जीना पसंद करते हैं। निशांत ने अपनी शिक्षा इंजीनियरिंग क्षेत्र में प्राप्त की है और उनका झुकाव आध्यात्मिकता और सादगी की ओर अधिक बताया जाता है। उन्होंने अब तक सक्रिय राजनीति में औपचारिक रूप से प्रवेश नहीं किया था लेकिन अब वह सीधे मंत्री बनकर सियासत में एंट्री ले रहे हैं। निशांत ने हालांकि पहले यह कहते हुए मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया था कि वह पहले पार्टी कार्यकर्ता के रूप में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
ध्यान रहे बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी अस्पतालों की दयनीय स्थिति चर्चा का विषय बन गई थी। इस बार बेबाक सवालों के लिए मशहूर मैथिली ठाकुर ने इस मुद्दे को उठाया। ठाकुर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की जर्जर हालत को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से सवाल किया। मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होकर उन्होंने तीखा सवाल पूछा। इस पूरी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ, जिसमें एक नई विधायक ने अपनी ही पार्टी के मंत्री को सवालों के घेरे में ले लिया था। मिथिलांचल की मशहूर लोक गायिका मैथिली ठाकुर ने भाजपा में शामिल होने के बाद नवंबर में अलीनगर से अपना पहला चुनाव जीता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरण से प्रेरित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। उन्होंने कहा, मैं इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं… क्योंकि इसमें लिखा है कि इमारत खराब हालत में नहीं है। इसे सिर्फ मरम्मत की जरूरत है।
लेकिन मैं मंत्री जी से एक बार फिर स्पष्टीकरण चाहती हूं क्योंकि मैंने खुद देखा है कि इमारत की हालत खराब है। एक छोटे से कमरे में स्वास्थ्य सेवा चल रही है। वहां कोई एमबीबीएस डॉक्टर नहीं है। पहले वहां दो एमबीबीएस डॉक्टर थे, लेकिन अब नहीं हैं, उन्होंने अपनी चिंताओं को विस्तार से गिनाया था।
ठाकुर ने सवाल उठाया था कि सरकार द्वारा हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ाने के बावजूद अस्पतालों की इमारतें इतनी खराब हालत में क्यों हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और दवाओं की कमी एक समस्या है, लेकिन इससे भी बड़ा खतरा जर्जर इमारतें हैं जो कभी भी गिर सकती हैं। विधायक ने सदन से पूछा कि क्या सरकार नए भवनों के निर्माण से पहले किसी बड़ी दुर्घटना के होने का इंतजार कर रही है। मैं मंत्री जी से सवाल नहीं कर रही हूं। मैं उनसे सिर्फ एक अनुरोध कर रही हूं। मैं चाहती हूं कि वे जनता के
हित में इस समस्या का समाधान करें, अब इन सवालों के जवाब पहली
बार मंत्री बने निशांत कुमार को देने होंगे। बिहार स्वस्थ होगा तभी सुंदर दिखेगा।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



