हिजाब उठाकर बुरे फंसे नीतीश

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीति के बहुत बड़े खिलाड़ी हैं। उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर यह साबित भी कर दिया लेकिन कभी-कभी ऐसा कर या कह देते हैं कि हंगामा होने लगता है। अभी पिछले दिनों एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक मुस्लिम महिला डाक्टर नुसरत परवीन का हिजाब हटा दिया। इसका वीडियो बहुत तेजी से वायरल हुआ। भाजपा के सांसद गिरिराज ने हालांकि नीतीश कुमार का समर्थन किया है लेकिन विपक्षी दलों के नेता इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। अल्पसंख्यक आयोग तक शिकायत की गयी है और कुछ लोगों ने नीतीश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तो यहां तक कह दिया कि नीतीश कुमार के साथ एक हेल्पर चलना चाहिए। बिहार में एनडीए के सहयोगी संजय निषाद ने तो आग में घी डालने का काम किया है। हालांकि जब उनकी तीखी आलोचना हुई तो उन्होंने लीपापोती करते हुए कहा कि मैंने हंसी-हंसी में यह कह दिया अगर किसी को बुरा लगा हो तो अपनी बात वापस लेता हूं। बहरहाल, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से इस पर कोई कमेंट नहीं आया। इससे लगता है कि नीतीश कुमार महिला डाक्टर का हिजाब उठाकर बुरे फंस गये।
बिहार में नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब हटाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्षी दल और मुस्लिम संगठन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर लगातार निशाना साध रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कड़ी आलोचना की और इस हरकत को अपमानजनक बताया और मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। वहीं, एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने हिजाब और बुर्के को मुस्लिम महिलाओं के सम्मान, गरिमा और इज्जत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
वहीं, मुस्लिम समाज ने नीतीश कुमार के खिलाफ महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग में शिकायत की है। महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने कहा कि इस संबंध में वो केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री को पत्र लिखकर इस बात का जिक्र करेंगे कि दोबारा इस तरीके का कृत्य किसी भी राज्य में न हो। प्यारे खान ने कहा कि नीतीश कुमार ने जो भी किया वह गलत किया है। यह भारतीय जनता पार्टी के विचारधारा नहीं है, न भारतीय जनता पार्टी के संस्कृति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक क्लियर नारा है, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबके लिए प्रयास, इन सब चीजों के लिए बिल्कुल जगह नहीं है। प्यारे खान ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने जो कृति किया है वह बिल्कुल गलत है। कोई भी सरकार इसका समर्थन नहीं कर सकती। यह मामला बिहार का है इसलिए महाराष्ट्र में कुछ कार्रवाई वो नही कर सकते है, मुस्लिम समाज में इस पर काफी ज्यादा रोष है, क्योंकि धर्म से जुड़ा हुआ मुद्दा है, एक बेटी के साथ किया गया अभद्र व्यवहार है। मुस्लिम समाज के लोगों की तरफ से शिकायत आ रही है। इस मामले में जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा-हमने ऐसी घटनाएं पहले भी देखी हैं। मेरे चुनाव के दौरान, लोग शायद भूल गए होंगे कि महबूबा मुफ्ती ने एक पोलिंग स्टेशन के अंदर एक वैध वोटर का बुर्का कैसे हटवाया था। यह उसी सोच का सिलसिला है। तब जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था, और यह घटना (सीएम नीतीश से जुड़ी हुई) भी उतनी ही शर्मनाक है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी हालत में किसी महिला को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा-अगर मुख्यमंत्री खुद अपॉइंटमेंट लेटर नहीं देना चाहते थे, तो वह पीछे हट सकते थे। लेकिन किसी को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना पूरी तरह गलत है। धीरे-धीरे, नीतीश कुमार की सच्चाई सामने आ रही है, जिन्हें कभी एक धर्मनिरपेक्ष और समझदार नेता माना जाता था।
ध्यान रहे कि 15 दिसंबर को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र बांट रहे थे। इस दौरान एक महिला डॉक्टर हिजाब पहनकर आई तो नीतीश कुमार ने पूछा कि यह क्या है और उसे अपने हाथ से हटा दिया। सीएम नीतीश के इस कदम से भारत में सियासत गर्मा गई है तो उधर पाकिस्तान में भी हाहाकार मचा हुआ है। हिजाब मामले में शहजाद भट्टी ने वीडियो जारी करके कहा है कि नीतीश कुमार सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें वरना बाद में ये मत कहना की चेतावनी नहीं दी गई थी। पटना में नवनियुक्त महिला डॉक्टर उस समय असहज हो गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियुक्ति पत्र प्रदान करने के दौरान उसके चेहरे से हिजाब हटा दिया। हिजाब खींचने का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि महिला डॉक्टर नुसरत को सीएम नीतीश ने पहले नियुक्ति पत्र दिया। इसके बाद पूछा कि ये क्या है? फिर उन्होंने हिजाब को नीचे किया। पीछे से डिप्टी सीएम सम्राट चैधरी ऐसा करने से रोक भी रहे थे। बगल में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय और अन्य अधिकारी हंसते
दिखाई पड़े।
इस प्रकरण में वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बचाव किया है। मुख्यमंत्री द्वारा हिजाब हटाने पर उन्होंने कहा, नीतीश कुमार ने कोई गलत काम नहीं किया है। अगर कोई नियुक्त पत्र लेने के लिए जा रहा है तो क्या वो अपना चेहरा नहीं दिखाएगी? ये कोई इस्लामिक देश है? भारत में कानून का राज चलेगा। नीतीश कुमार ने सही किया। संजय निषाद ने तो मानो आग में घी डाल दिया। हिजाब हटाने पर नीतीश की तरफदारी करते हुए कहा वो भी तो आदमी हैं। नकाब छू दिया तो इतना हो गया, कहीं और छूते तब क्या हो जाता। कहीं चेहरा वेहरा छुआ जाता, कहीं और उंगली पड़ जाती तो क्या होता। संजय निषाद के इस बयान पर भी विवाद हो रहा है।
विवाद बढ़ने और भारी आलोचना का सामना करने के बाद संजय निषाद ने सफाई दी है। मंत्री ने कहा मैंने सिर्फ बात को टालने और विवाद न बढ़े इसलिए ऐसा कहा था। गांव देहात में, पूर्वांचल में बात टालनी होती है तो कहते हैं कि फलनवा ई बतिया कहल अउर कुछ नाहीं कहल नै, छोड़ै जाए दा आगे उन्होंने कहा, मैंने हंसते हुए सहज भाव में ऐसी बात कही थी। अगर किसी को उनके बयान का बुरा लगा तो मैं अपनी बात वापस लेता हूं। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



