शशि थरूर व कांग्रेस नेतृत्व

केरल से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दिया है। कांग्रेस ने गत 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट चोरी गद्दी छोड़ रैली’ की थी। शशि थरूर इस रैली में मौजूद नहीं थे। शशि थरूर ने समय पर सफाई दे दी। वह कहते हैं कि उनका एक अपरिहार्य कार्यक्रम विदेश में था जिसके चलते वह रैली में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर सब सामान्य है लेकिन वह अपने तय कार्यक्रमों के तहत ही कार्य करते हैं। शशि थरूर और कांग्रेस नेतृत्व को लेकर मनमुटाव की खबरें उस समय से चल रही हैं जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हुआ था। चुनाव के लिए शशि थरूर ने नामांकन किया लेकिन सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खरगे को समर्थन दिया। इसलिए कांग्रेस नेतृत्व भी इस मामले में बेदाग नहीं कहा जा सकता। शशि थरूर पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनसे भी सलाह-मशविरा करना चाहिए। गत दिनों दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली से पहले भी यदि शशि थरूर से बात की गयी होती तो संभवतः ऐसी नौबत नहीं आती। इसी तरह कांग्रेस नेतृत्व हर उस मौके पर थरूर से दूरी बनाकर खड़ा रहा जब दोनों में मतभेद की खबरें आयीं। शशि थरूर मोदी सरकार के आग्रह पर विदेश गये और आपरेशन सिंदूर की सच्चाई बताई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष अवसरों पर तारीफ की लेकिन जहां जरूरत होती है वहां सरकार की आलोचना भी करते हैं। उन्होंने वीर सावरकर अवार्ड लेने से मनाकर दिया था। इसलिए केरल के तिरुवंतपुरम में स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की जीत को शशि थरूर से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व अपने इस वरिष्ठ नेता की उपेक्षा न करे तो बेहतर होगा।
दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की बड़ी रैली ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ आयोजित की गई थी। इस रैली का मकसद केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर दबाव बनाना था। इस रैली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने दूरी बनाए रखी, जिसके बाद उनकी गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया। तमाम चर्चाओं के बीच शशि थरूर ने खुद सामने आकर स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि वह पार्टी से नाराज नहीं हैं और सब कुछ ठीक है। शशि थरूर ने बताया कि वह देश से बाहर थे और यह यात्रा उन्होंने करीब छह महीने पहले तय की थी। इसी वजह से वह रैली में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि मैं विदेश में था। यह एक ऐसा कमिटमेंट था, जो मैंने छह महीने पहले किया था। उनके इस बयान के बाद रैली में उनकी गैरहाजिरी को लेकर चल रही अफवाहों पर काफी हद तक विराम लग गया है।
यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर की किसी कांग्रेस कार्यक्रम में गैरहाजिरी सुर्खियों में आई हो। इससे पहले भी वह राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई लोकसभा सांसदों की एक बैठक में शामिल नहीं हुए थे। उस समय पार्टी सूत्रों ने स्पष्ट किया था कि थरूर ने अपनी अनुपस्थिति की जानकारी पहले ही दे दी थी। इसके अलावा, हाल के दिनों में शशि थरूर तब भी चर्चा में आए थे, जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक भाषण की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी। इस बयान के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई थी और केरल से सांसद थरूर को आलोचना का सामना करना पड़ा था। कुल मिलाकर, शशि थरूर ने साफ कर दिया है कि उनकी गैरहाजिरी को लेकर किसी तरह के राजनीतिक मतलब नहीं निकाले जाने चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर सब सामान्य है और वह अपने तय कार्यक्रमों के अनुसार काम कर रहे हैं।
यहां पर ध्यान देने की बात है कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर को वीर सावरकर इंटरनेशनल इम्पैक्ट अवॉर्ड 2025 दिए जाने की खबर आई थी। आयोजकों की ओर से दावा किया गया कि शशि थरूर उन छह लोगों में शामिल हैं, जिन्हें यह पुरस्कार दिया जाएगा। यह अवॉर्ड समारोह 10 दिसंबर को ही दिल्ली के एनडीएमसी कन्वेंशन हॉल में आयोजित किया जाना था। इस मामले पर खुद शशि थरूर ने स्थिति साफ कर दी थी। थरूर ने साफ शब्दों में कहा कि वह न तो इस पुरस्कार को स्वीकार कर रहे हैं और न ही इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘मुझे कुछ नहीं मिल रहा है। मुझे इसके बारे में पता चला और मैं वहां नहीं जा रहा हूं।’ थरूर ने आयोजकों के रवैये को ‘गैर-जिम्मेदाराना’ बताते हुए कहा कि बिना किसी सहमति के उनका नाम सार्वजनिक कर देना पूरी तरह गलत है। अपने बयान में थरूर ने यह भी कहा कि जब तक पुरस्कार की प्रकृति, उसे देने वाली संस्था और उसके पीछे के उद्देश्य को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तब तक इस पुरस्कार को स्वीकार करने या समारोह में शामिल होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उनका साफ कहना था कि इस पूरे मामले में उन्हें अंधेरे में रखा गया और अचानक उनका नाम घोषित कर दिया गया।
इसके बावजूद कुछ बाते हैं। राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की एक बैठक की। शशि थरूर राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद भवन में हुई लोकसभा सांसदों की बैठक से गायब रहे। शशि थरूर लगातार तीसरी बार पार्टी की बड़ी बैठकों से गैर हाजिर रहे थे। बीजेपी और खासतौर पर पीएम मोदी से कथित नजदीकी के बीच शशि थरूर की गैरहाजिरी ने तब सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस के भीतर से भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। केरल के प्रमुख अखबार मनोरमा के मुताबिक, कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन ने दो टूक कहा कि कांग्रेस पार्टी का कोई भी नेता सावरकर के नाम से जुड़े किसी भी पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेगा। उनके इस बयान को शशि थरूर के रुख के समर्थन के तौर पर देखा गया।
एक और मौके की चर्चा हुई थी। संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पार्टी की संसद में रणनीतिक समूह की बैठक सोनिया गांधी के आवास पर हुई तो उसमें भी शशि थरूर नहीं पहुंचे थे। उनके दफ्तर ने उस वक्त बताया कि वो केरल में लोकल बॉडी चुनाव में प्रचार के साथ ही अपनी बूढ़ी मां की देखभाल में व्यस्त होने के चलते नहीं आ पाए। तीसरी बार 12 दिसंबर को भी शशि थरूर राहुल गांधी के नेतृत्व में संसद भवन में हुई कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक को लेकर कांग्रेस के नेता के. सुरेश और शशि थरूर के दफ्तर का अलग वर्जन रहा। हालांकि पार्टी के कुछ नेता यह दावा कर रहे थे कि शशि थरूर ने अपनी अनुपलब्धता पहले ही बता दी थी लेकिन लोकसभा में पार्टी के चीफ व्हिप के. सुरेश कुछ और कह रहे थे। के सुरेश ने कहा कि शशि थरूर क्यों नहीं आए मुझे क्या पता? वो संसद तो आते हैं, आप उनसे पूछिए क्यों नहीं आए? इस प्रकार कांगे्रस नेतृत्व और शशि थरूर दोनों अकड़ दिखा रहे हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



