लेखक की कलम

अग्निवीरों को मिला न्याय

देश की अन्दरूनी और बाहरी शत्रुओं से रक्षा करने मंे जान की भी बाजी लगाने वाले सैनिकों का ही एक हिस्सा अग्निवीर बने थे। आज से लगभग 4 साल पहले शुरू की गयी यह योजना युवाओं को सैनिक बनने का अवसर भले ही दे रही थी लेकिन भविष्य के अनिश्चित होने की चिंता भी थी। इसका समय चार साल का था। सवाल था उसके बाद? इसे राजनीति का मुद्दा भी बनाया गया। अग्निवीरों को लेकर आम जनता के बीच भी सवाल उठ रहे थे। इसलिए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने कुछ फौरी समाधान भी तलाशे। उदाहरण के लिए सुरक्षा बलों मंे अग्निवीरों को प्राथमिकता। इसके बाद भी युवा भविष्य को लेकर निश्चिंत नहीं थे। अब 4 नवम्बर 2026 को केन्द्र सरकार की कैबिनेट ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसे अग्निवीरों को तोहफा बताया जा रहा है। वास्तव मंे यह उनके लिए तोहफा नहीं बल्कि उनके साथ न्याय है। डा. कुमार विश्वास के शब्दों मंे कहें तो वेतन के लिए बहुत लोग काम करते हैं लेकिन सैनिक वतन के लिए सर्दी, गर्मी और बरसात झेलते हैं। इसलिए मोदी सरकार ने अग्निवीरों के लिए भविष्य सुरक्षित करके सराहनीय कार्य किया है। इस फैसले के तहत 4 साल की नौकरी वाले अग्निवीरों को 2 साल का सेवा विस्तार दिया गया है। योग्यता के आधार पर 25 फीसद अग्निवीर स्वतः नियमित सैनिक बन जाएंगे और शेष को भी भविष्य में नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। यह सही है कि केन्द्र सरकार ने यह निर्णय तब लिया जब पांच राज्यों मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं और दो राज्य-पंजाब व उत्तराखंड- ऐसे हैं जहां सबसे
ज्यादा अग्निवीर भर्ती हुए हैं इसलिए इस फैसले को लेकर राजनीति भी होगी।
अग्निवीर को लेकर मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। 4 साल की नौकरी वाले अग्निवीर को 2 साल का सेवा विस्तार दिया गया है। मोदी कैबिनेट ने अग्निवीर को दो साल का सेवा विस्तार देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे लाखों अग्निवीर जवानों को फायदा होगा। कार्यकाल विस्तार पाने वाले अग्निवीरों को बढ़ा हुआ वेतन-भत्ता भी मिलेगा। इस फैसले की जानकारी देते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने कहा, आज का दिन भारतीय रक्षा बलों और हमारे अग्निवीरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। कैबिनेट ने सभी अग्निवीरों के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने बताया कि जैसा कि आप जानते हैं, अग्निपथ योजना 14 जून 2022 को शुरू की गई थी। उस समय यह बताया गया था कि अग्निवीरों के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन किया जाएगा और समय-समय पर इस योजना की समीक्षा की जाएगी। अग्निवीरों का पहला बैच अब अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने के करीब है। इन चार वर्षों में किए गए प्रदर्शन मूल्यांकन के आधार पर, हमें उनके काम को लेकर बहुत सकारात्मक फीडबैक मिला है। जैसा कि आप जानते हैं, योग्यता के आधार पर 25 फीसद अग्निवीरों को नियमित सेना में शामिल किया जाना है। पहले, 75 फीसद अग्निवीरों के लिए यह प्रावधान था कि वे अनुशासित और प्रेरित युवाओं के रूप में वापस समाज में लौटेंगे। हालाँकि, इस अपडेट की गई योजना के तहत, बाकी 75ः अग्निवीरों को अब दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा। यह दो साल की अवधि पूरी होने पर जो भी इच्छुक होंगे, उन्हें एक तय चयन प्रक्रिया के आधार पर सशस्त्र बलों में शामिल कर लिया जाएगा। ये इस योजना के चार मुख्य पहलू हैं।
मालूम हो कि अग्निपथ स्कीम शुरू होने पर 4 साल की नौकरी को लेकर भारी बवाल मचा था। बिहार, यूपी सहित कई राज्यों में युवाओं ने भारी विरोध-प्रदर्शन किया था। लेकिन धीरे-धीरे चीजें सामान्य हुई। अग्निपथ योजना शुरू होने के बाद युवाओं को सेना में शामिल होने का नया रास्ता तो मिला लेकिन चार साल बाद ज्यादातर जवानों के बाहर होने से अनुभव की कमी और भविष्य की अनिश्चितता जैसे मुद्दे उठे। अब दो साल का विस्तार मिलने से बड़ा फायदा होगा। इससे सेना को प्रशिक्षित बल का फायदा मिलेगा और जवानों को अतिरिक्त अनुभव तथा स्थिरता का मौका मिलेगा। सेवा निधि के अलावा विस्तार अवधि में वेतन और अन्य सुविधाएं भी जारी रहेंगी। यह कदम युवाओं के बीच योजना की स्वीकार्यता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
अग्निपथ योजना में अधिकारियों के पद से नीचे के सैनिकों की भर्ती के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक नई योजना है। इसकी घोषणा 16 जून 2022 को की गई। इस योजना के तहत सेना में शामिल होने वाले जवानों को ‘अग्निवीर’ के नाम से जाना गया। अग्निपथ के लिए 17.5 साल से 23 साल के बीच के उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। हालांकि असल में अग्निपथ स्कीम के तहत सेना का हिस्सा बनने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित तय आयु सिमा 17.5 साल से 21 वर्ष की है। कोरोना महामारी के कारण पिछले 2 सालों से रुकी हुई भर्ती के कारण अधिक से अधिक युवाओं को मौका देने के लिए केवल पहले साल की भर्ती में उम्र सीमा में 2 साल की छूट दी गयी है। आवेदन करने वाले युवा कम से कम 50 फीसदी नंबरों के साथ 12वीं पास होने चाहिए। भर्ती होने वाले युवाओं को छह महीने तक ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद 3.5 साल तक सेना में सर्विस तय हुई थी।
हालांकि अग्निपथ स्कीम को लेकर देश के युवा, पूर्व सेना अधिकारी और नागरिकों में विभिन्न प्रतिक्रियाएं और मतभेद की स्तिथि बनी हुई थी। इसके बावजूद भारत सरकार की रक्षा मंत्रालय द्वारा अग्निपथ स्कीम को लेकर युवा आगे आये।
इसमें जात-पात या धर्म के आधार पर आरक्षण की बातें नहीं की गयी। इस योजना के जरिये भर्ती होने वाले सेना के जवान को अग्निवीर के नाम से जाना गया। चार वर्ष की सेवा के पश्चात 25 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी कौशलता के आधार पर स्थाई करने की बात तय थी। स्थाई कैडर का हिस्सा बन जाने के पश्चात अग्निवीर को बाकी जवानों की ही तरह पेंशन और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।
सेवा समाप्ति के पश्चात अग्निवीरों को उनकी कौशलता के अनुरूप स्किल सर्टिफिकेट दिया जाएगा जो भविष्य में उनके लिए रोजगार के रास्ते खोलेगा। रक्षा मंत्रालय और विभिन्न राज्यों द्वारा उनकी बहाली प्रक्रिया जैसे केंद्रीय बल, राज्य पुलिस बल इत्यादि में अग्निवीरों को तरजीह दी जाएगी।
सेवा के दौरान किसी प्रकार की अनहोनी होने की अवस्था को मद्देनजर अग्निवीरों को 48 लाख रूपए
का बीमा किया गया। अग्निपथ स्कीम के तहत सेना के जवान अर्थात् अग्निवीरों को भी उत्त्कृष्ट प्रदर्शन के एवज में गैलेंट्री अवार्ड से सम्मानित किया।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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