पाक को मिला नहले पर दहला

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। तालिबान प्रशासन के अनुसार, सीमा पार झड़पों में कम से कम 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, जबकि पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उसके केवल दो सैनिक मारे गए और 36 अफगान लड़ाके ढेर किए गए। दोनों देशों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटनाक्रम ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया के कुछ इलाकों में हवाई हमले किए। उन्होंने इसे “कायरतापूर्ण कार्रवाई” बताते हुए कहा कि सौभाग्य से इन हमलों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अफगान रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह जवाबी अभियान गत दिनों रात 8 बजे शुरू हुआ, जब कथित तौर पर पाकिस्तान की ओर से सीमा उल्लंघन में महिलाओं और बच्चों की मौत हुई थी।अफगान मंत्रालय का दावा है कि पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों के समीप ड्यूरंड रेखा के पार समन्वित जवाबी हमले किए गए। चार घंटे चली इस लड़ाई में दो पाकिस्तानी सैन्य अड्डों और 19 चैकियों पर कब्जे का दावा किया गया है। एक टैंक नष्ट करने और सैन्य वाहन कब्जे में लेने की बात भी कही गई है। अफगान पक्ष ने अपने आठ लड़ाकों के मारे जाने और 11 के घायल होने की पुष्टि की है। साथ ही नंगरहार में एक शरणार्थी शिविर पर मिसाइल हमले में 13 नागरिकों के घायल होने का आरोप लगाया गया है।दूसरी ओर पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तरार ने कहा कि तालिबान ने बिना उकसावे के गोलीबारी शुरू की, जिसका “मजबूत और प्रभावी जवाब” दिया जा रहा है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता ने किसी भी पाकिस्तानी सैनिक के पकड़े जाने से इनकार किया। वहीं राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करेगा।झड़पें टोरखम सीमा क्षेत्र तक फैल गईं, जो दोनों देशों के बीच एक प्रमुख व्यापारिक और आवागमन मार्ग है। यहां शरणार्थी शिविरों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। पाकिस्तान पहले ही 2023 से अवैध प्रवासियों के खिलाफ अभियान चलाते हुए लाखों अफगान शरणार्थियों को वापस भेज चुका है, जिससे मानवीय और कूटनीतिक तनाव और बढ़ा है। इन घटनाओं
की जड़ में 2,611 किलोमीटर लंबी ड्यूरंड रेखा है, जिसे अफगानिस्तान औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता। यह सीमा दशकों से विवाद और संघर्ष का कारण रही है। अक्टूबर में भी यहां घातक झड़पें हुई थीं, जिनके बाद कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था, लेकिन छिटपुट संघर्ष जारी रहे। ताजा टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों पड़ोसी देशों के
बीच अविश्वास गहरा है। बढ़ती सैन्य गतिविधि और परस्पर विरोधी दावों
के बीच कूटनीतिक समाधान की राह कठिन दिख रही है। यदि जल्द
संवाद की पहल नहीं हुई, तो यह तनाव व्यापक क्षेत्रीय अस्थिरता में बदल सकता है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



