ईरान पर मिसाइल के साथ बातचीत का दबाव

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका की रणनीति अब खुलकर सामने आने लगी है। बाहर से सैन्य कार्रवाई और भीतर से बातचीत। यह दोहरी नीति अब छिपी नहीं रही। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के ताजा बयान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ ‘हाफ-मेजर’ नहीं, बल्कि पूरी तरह दबाव वाली रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
अमेरिका एक तरफ ईरान पर सैन्य हमले तेज कर रहा है, तो दूसरी तरफ बंद दरवाजों के पीछे बातचीत का रास्ता भी खुला रखे हुए है। यह रणनीति महज संयोग नहीं, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल है। इसका मकसद है, ईरान को हर मोर्चे पर दबाव में लाकर अपनी शर्तों पर झुकाना। प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के बयान से यह संकेत मिला है कि अमेरिका अब ईरान को लेकर किसी तरह की नरमी के मूड में नहीं है। बातचीत केवल एक विकल्प है, लेकिन प्राथमिकता दबाव बनाकर रणनीतिक बढ़त हासिल करना है। यानी ‘टॉक भी, स्ट्राइक भी’ दोनों एक साथ। इस डबल गेम का असर पूरे मिडिल ईस्ट में दिख रहा है। एक तरफ जंग का खतरा गहराता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक हल की उम्मीद भी जिंदा रखी जा रही है। लेकिन सवाल यही है कि क्या यह रणनीति हालात को संभालेगी या और ज्यादा भड़का देगी? विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका मैक्सिमम प्रेशर की नीति पर काम कर रहा है, जहां सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक तीनों स्तरों पर ईरान को घेरा जा रहा है।



