पुतिन कुरिल द्वीप समूह पहुंचे, ताजा हुईं 81 साल पहले की यादें

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार, 13 अगस्त को पहली बार रूस के एकदम पूर्व में मौजूद कुरिल द्वीप समूह पहुंचे। पुतिन के इस दौरे से जापान नाराज हो गया और उसने रूस के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। वजह है कि कभी ये द्वीप जापान के हिस्से में हुआ करते थे। लेकिन 81 साल पहले तब के सोवियत रूस को लीड करने वाले स्टालिन के बाद सब कुछ बदल गया। पहले जानते हैं कि तब क्या हुआ था, दोनों देशों के लिए ये द्वीप मायने क्यों रखते हैं। शुरुआत करते हैं यह जानने से कि अभी क्या हुआ है? रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने पुतिन के कुरिल द्वीपों में होने का एक वीडियो जारी किया है। रूसी मीडिया के मुताबिक, पुतिन वहां एक मछली प्रोसेसिंग प्लांट भी गए, जहां उन्हें कैवियार खाने को दिया गया। यह मछलियों के अंड़ों से बनी खास डिश होती है। कुरिल द्वीपों पर जाने से पहले पुतिन पास के रूसी द्वीप सखालिन गए थे। वहां रूस की नौसेना सैन्य अभ्यास कर रही थी। सखालिन में पुतिन ने ‘रूस की पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने’ को लेकर एक बैठक की। पुतिन के इस दौरे पर जापान ने कड़ा ऐतराज जताया है। 2022 में रूस के यूक्रेन पर बड़े हमले के बाद रूस और जापान के रिश्ते और खराब हो चुके हैं। वहीं, इसी दौरान रूस के रिश्ते चीन और नॉर्थ कोरिया के साथ और मजबूत हुए हैं। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने एक बयान में कहा कि ‘नॉर्दर्न टेरिटरीजश् इतिहास और अंतरराष्ट्रीय कानून, दोनों के हिसाब से जापान का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि जापान इस दौरे का कड़ा विरोध करता है।



