राहुल और राजनीति

राहुल गांधी की छवि एक साफ-सुथरे राजनेता की है लेकिन राजनीति के मैदान मंे सफलता के लिए सिर्फ अच्छी छवि ही पर्याप्त नहीं हैं समय और परिस्थिति के अनुरूप उनकी भाव भंगिमा भी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बहुत कुछ इस मामले मंे सीखा जा सकता है। राहुल गांधी ने गत 12 मार्च को रसोई गैस की कथित किल्लत का मामला उठाया। हालांकि अभी ऐसी समस्या नहीं है और कुछ लोग जमाखोरी करके जनता के बीच दहशत पैदा करना चाहते हैं। विपक्ष के नेता होने के चलते राहुल गांधी इस समस्या को उठा रहे हैं लेकिन विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनकी मुस्कुराते हुए फोटो देखकर यही लगता है कि उन्हंे इससे मजा आ रहा हैं जनता की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। राहुल गांधी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे तो जनता भी उन्हें गंभीरता से नहीं ले रही हैं यही कारण है कि चुनाव के समय उनके साथ भीड़ तो दिखती है लेकिन वोट नहीं मिलते हैं। राहुल गांधी को अभी राजनीति सीखनी होगी। संसद परिसर मंे नारेबाजी करना भी ठीक नहीं है अमेरिका, इजरायल और ईरान की लड़ाई ने पूरी दुनिया मंे ईंधन संकट खड़ा कर दिया है। गैस की कीमतें अमेरिका और इजरायल में भी बढ गयी हैं। इसलिए ऐसे मुद्दों पर राजनीति सोच-समझकर की जानी चाहिए। कांग्रेस के अंदर इस संकट को लेकन विवाद भी है। इसीलिए मणिशंकर अय्यर को शशि थरूर ने कुछ कड़ा जवाब दिया है।
लोकसभा में 12 मार्च को सदन की कार्यवाही शुरू होने के साथ ही विपक्ष की तरफ से गैस सिलेंडर को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। सदन के स्थगन के बाद विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में जमकर नारेबाजी की। राहुल ने सदन शुरू होने के बाद देश के मौजूदा फ्यूल संकट पर सदन में बोलने की अनुमति मांगी थी। हालांकि उन्हें यह अनुमति नहीं दी गई। स्पीकर की ओर से कहा गया कि अब नियम बदल गए हैं। राहुल गांधी ने लोकसभा में देश की ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की संभावित कमी को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वह संसद में एलपीजी गैस और तेल की स्थिति पर बयान देना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी ने कहा कि आमतौर पर प्रक्रिया यह होती है कि आप बोलने की अनुमति मांग सकते हैं। इसलिए मैंने देश में गैस और तेल की स्थिति के बारे में बयान देने की अनुमति मांगी लेकिन अब एक नई प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें पहले मंत्री फैसला करेंगे, फिर मैं बोलूंगा, और फिर मंत्री जवाब देंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि देश में आने वाले समय में ईंधन से जुड़ी बड़ी समस्या पैदा हो सकती है, क्योंकि भारत की एनर्जी सिक्योरिटी खतरे में पड़ गई है। उन्होंने इसका कारण सरकार की गलत विदेश नीति को बताया और कहा कि अगर समय रहते तैयारी नहीं की गई तो करोड़ों लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
राहुल ने कहा कि मुझे साफ दिख रहा है कि एक बड़ी समस्या आने वाली है। समस्या यह है कि प्रधानमंत्री देश के प्रधानमंत्री की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके पीछे भी कारण हैं, वे फंसे हुए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संघर्ष सिर्फ ईरान से तेल मिलने या न मिलने का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव से जुड़ा है। उनके मुताबिक दुनिया एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर रही है और ऐसे समय में भारत को अपनी रणनीति और सोच बदलने की जरूरत है। उन्होंने सरकार और प्रधानमंत्री से अपील की कि वे तुरंत तैयारी शुरू करें और यह सुनिश्चित करें कि देश के लोगों को किसी तरह की ऊर्जा संकट का सामना न करना पड़े। राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि आने वाले संभावित संकट को लेकर चेतावनी है।
ईधन संकट को लेकर कन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने विस्तार से बयान भी दिया है। दरअसल कांग्रेस पार्टी मतभेद की शिकार है। हाल ही में सीनियर कांग्रेस नेता मणि शंकर अय्यर ने लोकसभा सांसद और संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति के अध्यक्ष शशि थरूर की विदेश नीति पर टिप्पणियों और उनके चरित्र पर सवाल उठाते हुए एक खुला पत्र लिखा था। यह पत्र फ्रंटलाइन मैगजीन में छपा, जिसमें अय्यर ने थरूर के अमेरिका-इजराइल के साथ संबंधों, ईरान युद्ध पर उनके रुख की आलोचना की थी। थरूर ने इसका खुला जवाब दिया। अय्यर ने थरूर पर नेहरूवादी नॉन-अलाइनमेंट और गांधीवादी सिद्धांतों से दूर होने का आरोप लगाया, साथ ही उनके विचारों को अमोरल और ट्रांजेक्शनल बताया इस पत्र के जवाब में शशि थरूर ने एक बड़ा खुला पत्र लिखा है जिसका शीर्षक है, असहमति और लोकतंत्र पर मणि शंकर अय्यर के नाम एक खुला पत्र। थरूर ने इसमें लोकतंत्र में असहमति की अहमियत बताते हुए कहा कि अलग राय रखना गलत नहीं, लेकिन किसी की नीयत, देशभक्ति या चरित्र पर सवाल उठाना अनुचित है। थरूर ने अपने पत्र में कईं बिंदुओं को उठाए, उन्होंने हमेशा भारत के राष्ट्रीय हित, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वैश्विक सम्मान को प्राथमिकता दी है। विदेश नीति में सिद्धांत और व्यावहारिकता का संतुलन जरूरी है, जो नेहरू की नॉन-अलाइनमेंट से लेकर आज की मल्टी-अलाइनमेंट डिप्लोमेसी तक रहा है। थरूर ने अपने पत्र में लिखा, “मोरल सरेंडर” नहीं, बल्कि जिम्मेदार स्टेटक्राफ्ट है कि यथार्थ को समझा जाए। उदाहरण देते हुए उन्होंने सोवियत यूनियन के साथ रिश्तों के दौरान हंगरी, चेकोस्लोवाकिया और अफगानिस्तान जैसे मामलों में भारत के संतुलित रुख का जिक्र किया। खाड़ी देशों से जुड़े हितों पर कोई फैसला लेते हुए (200 अरब डॉलर व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, 90 लाख भारतीय कामगार) को ध्यान में रखना जरूरी बताया। शशि थरूर ने पत्र कहा कि “भारत बुद्ध और गांधी की भूमि है। हम शांति चाहते हैं, लेकिन शांति कमजोरी नहीं। आतंकवाद पर मजबूती से जवाब देंगे।
देश में ईंधन का संकट है, इसमंे कोई दो राय नहीं लेकिन कृत्रिम संकट ज्यादा पैदा किया जा रहा है। राहुल गांधी का मुस्कराते हुए विरोध प्रदर्शन भी कृत्रिम लगता है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली में गैस सिलेंडर को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में हाहाकार मचा हुआ है। मौजूदा हालात यह हैं कि लोग गैस एजेंसी के बाहर रात में भी लाइन लगाकर खड़े हुए हैं। भीड़ के कारण पुलिस ने यहां मोर्चा संभाला है। ग्रामीणों का आरोप है कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी गैस नहीं मिल रही है। कामर्शियल गैस न मिलने से छोटे होटल बंद होने की कगार पर हैं। राहुल गांधी को वहां जाकर जनता को आश्वासन देना चाहिए। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



