ममता सरकार पर ‘सुप्रीम कमेंट’

देश की सबसे बड़ी अदालत अर्थात् सुप्रीम कोर्ट आमतौर पर दलगत राजनीति में नहीं पड़ती है। इसलिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने जब पश्चिम बंगाल सरकार पर टिप्पणी की तो लोगों का ध्यान सहज ही उधर आकर्षित हो गया। पश्चिम बंगाल मंे पुलिस प्रमुख का मामला सियासत मंे चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य मंे ममता बनर्जी की सरकार रेगुलर पुलिस डायरेक्टर जनरल (डीजीपी) की तैनाती से बच रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 5 फरवरी को इस संदर्भ में टिप्पणी की थी। अब पश्चिम बंगाल मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं और उससे पहले ही ममता बनर्जी की सरकार पूर्व डीजीपी राजीव कुमार को राज्यसभा मंे भेज रही है। वे वही राजीव कुमार हैं जिन पर शारदा डिपाजिट कलेक्शन घोटाले के सिलसिले मंे गंभीर आरोप लगा था और सीबीआई ने उनके घर पर
छापा मारा था। इस छापेमारी के
खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल मंे डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले मंे सुनवाई करते हुए तंज कसा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा पश्चिम बंगाल सरकार राज्यसभा मंे डीजीपी को भेजने मंे ज्यादा व्यस्त है। राज्य मंे पीयूष पांडेय 2 फरवरी से कार्यवाहक डीजीपी हैं। इससे पहले राष्ट्रपति के प्रोटोकाल के उल्लंघन का आरोप भी ममता बनर्जी पर लग चुका है। ममता बनर्जी ने उसका जवाब भी दिया था। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से भी पंगा ले रखा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद महाभियोग प्रस्ताव लाने की घोषणा कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल में डीजपी चयन पैनल को लेकर राज्य सरकार और यूपीएससी के बीच चल रहे कानूनी विवाद के कारण दिसम्बर 2023 से कोई स्थायी डीजीपी नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी, 2026 को कहा था कि राज्य दो साल के तय समय वाले रेगुलर पुलिस डायरेक्टर-जनरल (डीजीपी) के अपॉइंटमेंट से बच रहे हैं और इसके बजाय अपनी पसंद के एक्टिंग पुलिस चीफ चुन रहे हैं, जो 20 साल पुराने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन है। कोर्ट ने 2006 में प्रकाश सिंह केस में एक फैसले में यह साफ कर दिया था कि डीजीपी के ऑफिस को पॉलिटिकल या दूसरे बाहरी दबावों से अलग रखा जाना चाहिए और सरकारों को पॉलिटिक्स और लॉ एनफोर्समेंट को मिलाने के खिलाफ चेतावनी दी थी। अब पश्चिम बंगाल में डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने बड़ी टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार राज्यसभा में डीजीपी को भेजने में ज्यादा व्यस्त है। दरअसल, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार टीएमसी के सदस्य के रूप में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। टीएमसी के टिकट पर पूर्व डीजीपी राजीव कुमार राज्यसभा जाएंगे। राजीव कुमार का करियर विवादों से भरा रहा है। ध्यान रहे 3 फरवरी, 2019 को पश्चिम बंगाल में एक ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के बीचों-बीच “अनिश्चितकालीन धरना” शुरू किया। यह तब हुआ जब सीबीआई अधिकारियों का एक ग्रुप शारदा डिपॉजिट कलेक्शन स्कैम के सिलसिले में उस समय के कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर बिना बताए पहुंच गया। वहीं, राजीव कुमार अब राज्यसभा भेजे जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक दल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में लग गए हैं। राजनीतिक दलों के बीच जमकर बयानबाजी भी हो रही है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग जल्द ही विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा और अप्रैल महीने में राज्य में वोटिंग होगी।
विशेष बात यह भी है कि भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी आर एन रवि ने पश्चिम बंगाल के 22वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स, भारत सरकार, जो देश की सबसे बड़ी इंटेलिजेंस एजेंसी है, में काम करते हुए उन्होंने अधिकतर उग्रवाद और हिंसा वाली जगहों पर काम किया। इसमें जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ ईस्ट और माओवाद से प्रभावित इलाके शामिल हैं। उन्होंने साउथ एशिया में इंसानों के माइग्रेशन के डायनामिक्स में भी स्पेशलाइजेशन किया और बॉर्डर पर रहने वाली आबादी की पॉलिटिकल सोशियोलॉजी पर बड़े पैमाने पर काम किया। उन्होंने जातीय विद्रोह से प्रभावित इलाकों में संघर्ष सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है और कई हथियारबंद विद्रोही ग्रुप्स को देश की मुख्यधारा में शामिल किया है। वे आतंकवाद से निपटने और इंटेलिजेंस शेयरिंग में भारत के इंटरनेशनल सहयोग के आर्किटेक्ट थे।
इधर तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए चार नामों की घोषणा की है। इन नामों पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का नाम भी शामिल है। राजीव ममता के सबसे भरोसेमंद माने जाते हैं। देशभर में 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होंगे। पश्चिम बंगाल में बाबुल सुप्रियो, राजीव कुमार, मेनका गुरुस्वामी और कोएल मल्लिक प्रत्याशी हैं।
इधर, राज्य में पीयूष पांडे कार्यवाहक डीजीपी हैं। पांडे 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। राजीव कुमार के रिटायर होने के बाद उन्होंने 31 जनवरी 2026 को पदभार ग्रहण किया था। पीयूष पांडे इससे पहले महानिदेशक (जेल) के रूप में कार्यरत थे। स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और संघ लोक सेवा आयोग के बीच खींचतान चल रही है। यूपीएससी ने हाल ही में राज्य द्वारा भेजे गए नामों के पैनल को यह कहते हुए लौटा दिया था कि यह सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है।
पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों के भीतर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हालांकि चुनावों से पहले ही यहां सियासी पारा हाई है। सूबे की सीएम ममता बनर्जी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, तो वहीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल में कार्यक्रम की जगह बदले जाने पर नाराजगी जताई। राष्ट्रपति की नाराजगी के बाद सीएम ममता का स्पष्टीकरण भी सामने आया है। ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति साल में एक बार आएं तो स्वागत है, लेकिन अगर चुनाव के समय बार-बार दौरे हों तो हर कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए संभव नहीं है।
इसी प्रकार टीएमसी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के
विरोध में भी उतर चुकी है। टीएमसी उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। टीएमसी सूत्रों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इसी सत्र में महाभियोग का नोटिस दिया जाएगा। टीएमसी ने बार बार ज्ञानेश कुमार पर बीजेपी के इशारों पर चलने का आरोप लगाया है। (अशेाक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



