लेखक की कलम

रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल

कहते हैं, समझने वाले समझ गये और न समझे वो अनाड़ी है…। राजनीति में ऐसे ही कारनामे होते रहते हैं। इस साल पांच राज्यों मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं। इनमंे भाजपा की निगाह विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु पर है। तमिलनाडु मंे भाजपा को अपने पैर मजबूत करने हैं, जबकि पश्चिम बंगाल मंे ममता बनर्जी से सत्ता छीननी है। अब अगर सिर्फ इन दो राज्यों के राज्यपाल बदले जाते तो यही कहा जाता कि भाजपा ने चुनावी लाभ के लिए राज्यपाल बदल दिये। इसलिए कई राज्यों के राज्यपाल बदले गये हैं। पश्चिम बंगाल मंे रवीन्द्रनारायण रवि (आरएन रवि) को राज्यपाल बनाया गया है। भौतिक शास्त्री और बिहार मंे जन्में आर.एन. रवि जाने-माने पुलिस अफसर भी रहे हैं। उन्हांेने सीबीआई और आईबी मंे भी तजुर्बा हासिल किया। तमिलनाडु में द्रमुक सरकार को तंग करते रहे, ऐसी शिकायत खुलेआम मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने की थी। पश्चिम बंगाल में राज्यपाल सीवी आनंद बोस से भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तकरार होती रहती थी। सीवी आनंद बोस ने 5 मार्च को राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया तो अमित शाह के गृहमंत्रालय ने फौरन आरएन रवि को वहां का राज्यपाल बना दिया। समझने वाले तो समझ ही रहे हैं कि रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल क्यों बनाया गया है। सीवी आनंद बोस का कार्यकाल सिर्फ साढ़े तीन साल रहा है।
तामिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को 5 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। बंगाल में होने वाले 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनकी जगह केंद्र सरकार ने तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त किया है। इस फैसले से नाराज सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र पर सीधा आरोप लगाया है कि यह सब राजनीतिक दबाव में बिना उनसे सलाह-मशविरा किए किया गया है।
3 अप्रैल 1952 को बिहार की राजधानी पटना में जन्मे रवींद्र नारायण रवि ने भौतिकी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। शुरुआत में कुछ समय पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने 1976 में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) जॉइन की और उन्हें केरल कैडर मिला। रवि कोई आम पुलिस अधिकारी नहीं रहे। उन्होंने देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसियों सीबीआई और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में दशकों तक काम किया है। आईबी में रहते हुए वे जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर के विद्रोही गुटों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के मामलों के सबसे बड़े विशेषज्ञ माने जाते थे। सन् 2012 में रिटायरमेंट के बाद 2014 में उन्हें जॉइंट इंटेलिजेंस कमेटी का चेयरमैन बनाया गया। 2018 में वे देश के डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर डिप्टी एनएसए के पद तक पहुंचे।
आरएन रवि का राजनीतिक सफर बेहद एक्शन से भरपूर रहा है। केंद्र ने उन्हें नागा विद्रोही गुटों से बातचीत के लिए वार्ताकार बनाया था। वहां 2015 के ऐतिहासिक नगा शांति समझौते में उनकी अहम भूमिका रही। इसी शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के चलते उन्हें 2019 में नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया। 18 सितंबर 2021 को जब वे तमिलनाडु के गवर्नर बने, तो सीएम एमके स्टालिन और उनकी डीएमके सरकार के साथ उनका जबरदस्त टकराव शुरू हो गया। रवि पर लगातार यह आरोप लगा कि वे चुनी हुई राज्य सरकार द्वारा पास किए गए बिलों को अपनी मेज पर रोक देते थे। विवाद इतना बढ़ा कि विधानसभा में उनके खिलाफ प्रस्ताव तक पास किया गया। सीएम स्टालिन ने उन्हें तानाशाह तक कह डाला।
अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल मंे एक तरफ ममता बनर्जी का तेज-तर्रार और आक्रामक रवैया, और दूसरी तरफ आरएन रवि जैसी सख्त शख्सियत आमने-सामने होंगी। चुनाव से ठीक पहले एक इंटेलिजेंस बैकग्राउंड वाले पूर्व आईपीएस को बंगाल भेजना केंद्र सरकार का एक बड़ा रणनीतिक दांव माना जा रहा है। तमिलनाडु में स्टालिन से पंगा लेने वाले रवि अब बंगाल में ‘दीदी’ के लिए कितनी बड़ी मुसीबत बनेंगे, यह आने वाले कुछ महीनों में साफ हो जाएगा।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने 5 मार्च को इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे का कारण अभी तक साफ नहीं हो पाया है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उनके इस्तीफे पर अश्चर्य जताया है। सीवी आनंद बोस को जगदीप धनखड़ के बाद 2022 में पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया गया था। उन्होंने साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया है। लद्दाख के एलजी कविंद्र गुप्ता ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनका भी कारण मालूम नहीं हो पाया है। बताते चलें कि यह इस्तीफा तब आया है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने से कुछ ही सप्ताह बाकी हैं। वहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) लगातार चैथी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही है और विपक्षी भाजपा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सत्ता से हटाने का प्रयास कर रही है। बनर्जी, जिनका बोस के साथ टकरावपूर्ण संबंध था। उन्होंने इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया कि वह जानती हैं कि राज्य के संवैधानिक प्रमुख के रूप में उनका स्थान कौन लेगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पता चला है कि आरएन रवि बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस की जगह लेंगे।’
ममता बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘पश्चिम बंगाल के गवर्नर सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से मैं हैरान और बहुत चिंतित हूं। उनके इस्तीफे के पीछे के कारण मुझे अभी पता नहीं हैं। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए, मुझे हैरानी नहीं होगी अगर आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से ठीक पहले गवर्नर पर केंद्रीय गृह मंत्री की तरफ से कुछ राजनीतिक फायदे के लिए दबाव डाला गया हो।’ बंगाल की राजनीति में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच टकराव कोई नई बात नहीं रही है। लेकिन चुनाव से ठीक पहले राज्यपाल का जाना राजनीतिक समीकरण बदल सकता है। यही वजह है कि इस इस्तीफे को सिर्फ एक प्रशासनिक घटना नहीं बल्कि चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दरअसल सीवी आनंद बोस और ममता बनर्जी के बीच लंबे समय से टकराव चलता रहा है। विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति से लेकर शिक्षक भर्ती जैसे कई मुद्दों पर दोनों आमने-सामने रहे। ममता बनर्जी कई बार सार्वजनिक मंचों पर राज्यपाल को केंद्र सरकार का ‘पपेट’ तक कह चुकी हैं। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा ममता के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर सकता है।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button