अध्यात्म

भाई को दीर्घायु व समृद्धि का टीका

भाई दूज हिन्दुओं का एक प्रमुख तथा प्रसिद्ध त्यौहार है जो अधिकतर हिन्दुओं द्वारा देश भर में प्रमुखता से मनाया जाता है। भाई दूज का पर्व पांच दिवसीय दिवाली उत्सव का अंतिम दिन होता है। भाई दूज एक ऐसा पर्व है जो भाई-बहन के बीच के पवित्र बंधन के प्रति श्रद्धा को व्यक्त करता है। यह भाई-बहन को एक दूसरे के प्रति सम्मान एवं प्रेम प्रकट करने का शानदार अवसर है। इस तिथि पर सभी बहनें अपने भाइयों के लिए एक सुखी, स्वस्थ और समृद्धि जीवन की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों के प्रति अपना स्नेह जताने के लिए कोई उपहार भेंट करते हैं। भाई-बहन के इस पवित्र पर्व पर पूरा परिवार एक साथ एकत्रित होता है, मिठाई और अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं।
इस बार दीपावली के दूसरे दिन प्रतिपदा न होने से तीसरे दिन अर्थात् 10 नवम्बर को गोवर्द्धन पूजा की जाएगी। उसके बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया अर्थात् गुरुवार 11 नवम्बर को भैयादूज अथवा यम द्वितीया का पर्व मनाया जाएगा।
भारत के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में इसके अनेक नाम मिलते हैं। गुजरात में भाई बीज, बंगाल मंे भाईफोटा, पंजाब में टिक्का, महाराष्ट्र में भाऊ बीज नाम से यह प्रसिद्ध है। नेपाल में इसे टीका नाम से जाना जाता है। इस दिन यहां बहनें अपने भाई की समृद्धि शांति और सुरक्षा के लिये यम के शीश का प्रतीक अखरोट द्वार के चैखट पर तोड़कर बाहर फेंकती हैं। यह अखरोट हिरण्यकश्यप के सिर का प्रतीक है। इस पर्व पर बहनें उपवास रखकर अपने-अपने आंगन में भैयादूज की चैक बनाती हैं। इस त्योहार मंे ऋषि मार्कण्डेय, यमुना तथा यमराज का अनुपम अंकन गरिमापूर्ण है। भ्राताओं के सुखमय जीवन, समृद्धि, दीर्घायु आदि की मंगल कामना होती है। पूजा के बाद पारम्परिक कथाओं का कथन एवं श्रवण होता है। ब्रह्मपुराण, स्कन्द पुराण में यह पर्व यम द्वितीया नाम से प्रसिद्ध है। दिनकर तनया यमुना द्वारा अपने भाई यम की दीर्घायु के लिये विधाता से विनम्र प्रार्थना इसी पर्व पर की गयी थी।
पौराणिक आख्यानों के अनुसार यम देवता पर सारे विश्व के शासन का भार रहता था। आरम्भ में यम देवता इससे प्रसन्न थे परन्तु बाद में वे ऊबते चले गये। इसी मध्य दीपावली का महापर्व आ गया। छोटी बहन यमुना ने अपने ज्येष्ठ भ्राता यमदेव को अपने घर पर टीका लगवाने का निमंत्रण दिया। यम के उपस्थित होने पर यमुना ने प्रसन्न भाव से भरपूर सम्मान प्रदान किया। इसी समय अपनी बहन के विमल भाव को देखकर यमदेव ने वरदान दिया कि जो भी भ्राता आज के दिन यमुना स्नान कर अपनी बहन के कर कमलों से निर्मित भोजन करेगा, वह दीर्घजीवी होगा। इसीलिए यम द्वितीया पर यमुना स्नान का महत्व बढ़ गया। प्रीति के पर्व भैयादूज के पावन दिन बहन और भ्राता आकर यमुना में स्नान करते हैं। मथुरा पहुंचकर पुण्य पाते हैं। लोकश्रुति के अनुसार इस पर्व पर यमुना के किनारे बहन के हाथों निर्मित जो भाई भोजन करता है, उनका स्वास्थ्य, बल बढ़ता है साथ ही आयु की वृद्धि भी होती है। यमुना तट पर इस परम्परा के साक्ष्य प्राप्त होते हैं। पाप-पुण्य की सूची बनाने वाले चित्रगुप्त तथा पापों का कठोर दण्ड प्रदान करने वाले यमदेव के साथ यमदूतों की अर्चना की जाती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है।
इस पर्व की पारम्परिक कथाओं में एक प्रचलित कथा यह भी बतायी गयी है। भातृ द्वितीया का पर्व आने वाला था। एक परिवार के साले और बहनोई परस्पर शत्रुता का भाव रखते थे। बहन ससुराल मंे थी। बहनोई ने अपने साले को निमंत्रण दिया कि यदि तुम्हें अपनी बहन से आत्मीयता हो तो भैया दूज पर टीका लगवाने न आना। तुम्हारी प्रतीक्षा मैं तलवार के साथ करूंगा।
भाई बहन से टीका लगवाने चल पड़ा। आने पर देखा कि बहन का पति तलवार लेकर प्रतीक्षा मंे खड़ा था। भाई ने कुत्ते का रूप धारण करके घर में पिछले द्वार से प्रवेश किया। बहन घर में चैक निर्मित करने के लिये हल्दी, चावल पीसती हुई सिसक रही थी। अपने पति के क्रोध को सोचकर वह चिंतित थी। अचानक कुत्ते को देख उसने बट्टा फेंक कर मारना चाहा। हाथ की रोली भी बट्टे में लगी थी। रोली भ्राता के भाल पर लग गयी। वह मनुष्य रूप मंे हो गया। बहन को आश्चर्य तो हुआ पर उसने विधि-विधान से टीका लगाया। भाई पुनः कुत्ते का शरीर धारण कर बाहर चला गया। भाई ने बहन के पति का चरण स्पर्श किया। भाई के मस्तक पर टीका देखकर कहा, यह टीका कैसे लगा? भाई का त्याग देखकर बहनोई को दया आ गयी उसने कहा कोई बहन न होने के कारण मैं यह पीड़ा अनुभव नहीं कर पाया। उसने पत्नी के भाई से क्षमा मांगकर इस पर्व की महिमा स्वीकार किया। इससे बहन प्रसन्न हुई। इस प्रकार प्राचीनकाल से यह पर्व मनाया जाता है।
(पं. आर.एस. द्विवेदी-हिन्दुस्तान समाचार-फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button