लेखक की कलम

अपराध मुक्त उत्तराखण्ड का संकल्प

जीवन में सुख, शांति और संतुष्टि की कामना मनुष्य ही नहीं सभी जीवधारियों की होती है। मनुष्य इस बारे में ज्यादा सोचता है क्योंकि उसके पास संसाधन जुटाने की क्षमता दूसरे प्राणियों की अपेक्षा ज्यादा होती है। इसके लिए सुरक्षा पहली शर्त है। यदि हम सुरक्षित नहीं हैं तो हमारे संसाधनों पर दूसरा कोई कब्जा कर सकता है। भारत में हिन्दुओं की एक हजार साल गुलामी के पीछे यही कहानी है। सुरक्षा देना राष्ट्र-राज्य का कर्तव्य है। सुरक्षा पुख्ता होगी तो अपराधी या तो सुधर जाएंगे अथवा पलायन कर जाएंगे। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने अपने प्रदेश को अपराध मुक्त करने का गत दिनों संकल्प लिया है। इस दिशा में प्रयास तो पहले से किये जा रहे थे लेकिन अब सीएम धामी ने बाकायदा एक रोडमैप तैयार करवाया है। गत 11 फरवरी को देहरादून मंे मुख्यमंत्री आवास पर कानून-व्यवस्था की समीक्षा को लेकर बैठक हुई थी। मुख्यमंत्री ने इस बैठक मंे वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष रूप से आदतन और संगठित अपराध मंे संलिप्त लोगों पर सख्त निगरानी के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने कहा इस बैठक के नतीजे भी धरातल पर दिखने चाहिए।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि किसी भी स्तर पर ढिलाई या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी प्रकार के अपराधों में तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए और अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। धामी मुख्यमंत्री आवास में प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा को लेकर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में मुख्य सचिव, डीजीपी, सचिव गृह, एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर), गढ़वाल कमिश्नर सहित पुलिस और शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री धामी ने विशेष रूप से आदतन और संगठित अपराध में संलिप्त अपराधियों पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में कानून का भय स्थापित हो और आमजन स्वयं को सुरक्षित महसूस करें। उन्होंने कहा कि अपराधियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। कानून हाथ में लेने वालों, असामाजिक तत्वों और प्रदेश की शांति भंग करने का प्रयास करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को पूरी सक्रियता, सतर्कता और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि थानों और चैकियों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाई जाए। शहरी क्षेत्रों में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था के मामलों की नियमित समीक्षा हो और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाए। मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि परिणाम धरातल पर दिखने चाहिए और जनता को सुरक्षा का वास्तविक अनुभव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार “अपराध मुक्त उत्तराखंड” के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। प्रदेश की शांति, सुरक्षा और सुशासन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से अपेक्षा की कि कानून का राज और अधिक सशक्त बनाने के लिए समन्वित और प्रभावी कार्रवाई की जाए। बैठक में प्रदेश की वर्तमान कानून व्यवस्था की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई और अपराध नियंत्रण के लिए रणनीतिक दिशा-निर्देश तय किए गए।
उत्तराखंड, जो 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से अलग होकर बना, मुख्य रूप से एक शांतिपूर्ण पहाड़ी राज्य माना जाता है। देहरादून जैसे प्रमुख शहर देश के सबसे सुरक्षित शहरों में गिने जाते हैं। राज्य में कानून प्रवर्तन और आपराधिक न्यायिक प्रणाली के तहत अपराध रोकने व जांच करने हेतु कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग सक्रिय है। इसे बावजूद शांत वादियों और ‘रिटायरमेंट स्वर्ग’ के रूप में अब चर्चित देहरादून की आबोहवा खौफ के साये में है। हाल ही में हुए गुंजन हत्याकांड की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि बीच शहर में हुई एक गैस एजेंसी के मालिक अर्जुन शर्मा की दिनदहाड़े हत्या ने राजधानी को हिलाकर रख दिया है। देवभूमि की यह बदलती छवि स्थानीय नागरिकों के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है, जहाँ अब सुरक्षित महसूस करना एक चुनौती बनता जा रहा है।
हालांकि, पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही बदमाशों को पकड़ लिया लेकिन दिनदहाड़े ऐसी घटनाएं देहरादूनवासियों को डराने लगी हैं।
बीते दिनों जब शहर अपनी रफ्तार पकड़ ही रहा था, तभी तिब्बती मार्केट के पास स्कूटी सवार दो बदमाशों ने अर्जुन शर्मा पर गोलियां बरसा दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बदमाशों ने इस वारदात को इतनी बेखौफ तरीके से अंजाम दिया कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिल पाया, उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया गया लेकिन वह बच नहीं पाए। हत्या के बाद आरोपी हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। इस सनसनीखेज वारदात ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिए थे, लोगों के कई तरह के रिएक्शन देखने के लिए मिल रहे हैं।
राजधानी में बढ़ते हुए अपराधों को देखते हुए एसएसपी देहरादून अजय सिंह के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें शहर से लेकर देहात तक नाकेबंदी में जुट गईं। सीसीटीवी कैमरों से लेकर पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई हैं। बीती रात अर्जुन हत्याकांड के बदमाशों को गिरफ्तार करने के लिए इन्हें पैरों में गोली मारी गई है और कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती किया गया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई स्कूटी और दो तमंचे बरामद किए। देहरादून ही नहीं हल्द्वानी से भी डबल मर्डर केस की खबर सामने आई है।
अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने साल 2021 से 2023 की रिपोर्ट जारी कर बताया था कि अपराध के मामले में उत्तराखंड हिमालय राज्यों में सबसे अव्वल है। इन तीन सालों में उत्तराखंड में 8.9 प्रतिशत ज्यादा अपराधिक मामले दर्ज किए गए। देखा जाए तो 15 दिनों में ही प्रीति हत्याकांड गुंजन हत्याकांड और अर्जुन हत्याकांड जैसी घटनाओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
(मोहिता स्वामी-हिफी फीचर)

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