जापान में सानाए ताकायची की प्रचंड जीत

जापान की राजनीति में 8 फरवरी को हुए निचले सदन के चुनाव ने एक नया इतिहास रच दिया। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के नेतृत्व वाले उदार लोकतांत्रिक दल ने ऐसी प्रचंड जीत दर्ज की, जिसने न केवल सत्तारूढ़ खेमे को अभूतपूर्व शक्ति प्रदान की, बल्कि विपक्ष को भी गहरे संकट में डाल दिया। सरकारी प्रसारक के अनुमान के अनुसार, निचले सदन की कुल चार सौ पैंसठ सीटों में से उदार लोकतांत्रिक दल ने अकेले तीन सौ सोलह सीटें जीत लीं। यह युद्धोत्तर जापान में किसी भी एक दल का अब तक का सबसे बड़ा प्रतिनिधित्व है। चुनाव से पहले इस दल के पास केवल एक सौ अट्ठानवे सीटें थीं, लेकिन जनता के भारी समर्थन ने इसे दो तिहाई से भी अधिक बहुमत दिला दिया। अपने सहयोगी जापान नवाचार दल के साथ मिलकर सत्तारूढ़ गठबंधन ने कुल तीन सौ बावन सीटें हासिल कीं। इस भारी बहुमत के कारण अब सरकार ऊपरी सदन में किसी विधेयक या बजट को रोके जाने की स्थिति में भी निचले सदन में दोबारा मतदान कराकर उसे पारित करा सकती है। इस चुनाव परिणाम ने विपक्षी केंद्रीय सुधार गठबंधन को लगभग हाशिए पर पहुँचा दिया। चुनाव से पहले एक सौ सड़सठ सीटों वाले इस गठबंधन की ताकत घटकर केवल उनचास सीटों तक सिमट गई। यह पराजय गठबंधन के सह-नेता और पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिको नोदा के राजनीतिक भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस ऐतिहासिक जीत के पीछे सानाए ताकाइची की व्यक्तिगत लोकप्रियता एक बड़ा कारण रही। जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में उनके उभार ने उन्हें एक नया और ताजा चेहरा दिया, जबकि विपक्षी गठबंधन जनता को पुराना और प्रभावहीन लगा। यह स्थिति वर्ष दो हजार बारह के चुनाव की याद दिलाती है, जब उदार लोकतांत्रिक दल ने सत्ता में शानदार वापसी की थी और लंबे समय तक शासन किया था। इस प्रचंड बहुमत के साथ सरकार अब कर कटौती, बजट पारित करने और सुरक्षा से जुड़े कठोर कानूनों जैसे मुद्दों पर आक्रामक संसदीय रणनीति अपना सकती है।
हालाँकि कुछ विवादास्पद प्रस्तावों पर विपक्ष और सामाजिक
समूहों के विरोध की संभावना बनी रहेगी। दूसरी ओर, सहयोगी जापान नवाचार दल की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर हो गई है, क्योंकि उदार लोकतांत्रिक दल अब अकेले ही बहुमत में है।चुनाव में कुछ नए और छोटे दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन वामपंथी दलों को नुकसान उठाना पड़ा। यह चुनाव सानाए ताकाइची के नेतृत्व को मजबूत जनादेश देता है और जापान की राजनीति में एक ऐसे दौर की शुरुआत करता है, जहाँ सत्ता लगभग निर्विवाद रूप से सत्तारूढ़ दल के हाथों में केंद्रित हो गई है।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



