विश्व-लोक

हूती विद्रोहियों के ऐलान से सऊदी अरब चिंतित

होर्मुज में अमेरिका और ईरान दोनों ने नाकेबंदी कर रखी है। दुनिया फिर से तेल संकट की ओर मुंह बाए खड़ी है। ऐसे में यमन में बैठे ईरान के सहयोगी हूती ने एक ऐसा ऐलान कर दिया है कि पूरा
ग्लोबल तेल मार्केट डर गया है। हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊद अरब के जहाजों की घेराबंदी करके युद्ध का दायरा बढ़ाने की धमकी दी। हूती के लड़ाके वही करने की धमकी दे रहे हैं जो वह पहले कर चुके हैं- वे सऊदी जहाजों को लाल सागर के दक्षिणी एंट्री प्वाइंट, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से नहीं गुजरने देंगे। हूती सऊदी की नब्ज दबाने को तैयार हैं लेकिन बड़ा झटका एशिया को लग सकता है। ध्यान रहे बाब अल-मंदेब लाल सागर का प्रवेश द्वार यानी एंट्री गेट है। यहां से दुनिया का लगभग 12 फीसद व्यापार होता है। दुनिया का एक-चैथाई कंटेनर व्यापार इसी 32-किलोमीटर चैड़े समुद्री रास्ते से होकर स्वेज नहर तक जाता है। हूती विद्रोहियों ने यहां पहले भी जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने की अपनी क्षमता दिखाई है। गाजा में इजरायल-हमास युद्ध के दौरान उन्होंने महीनों तक जहाजों को निशाना बनाया और 100 से ज्यादा जहाजों पर हमले किए थे। अमेरिका के टेक्सास स्थित रिस्टैड एनर्जी के अनुसार अगर हूती लाल सागर में नाकेबंदी कर देते हैं तो अब सऊदी का रोजाना का लगभग 25 लाख बैरल तेल का व्यापार खतरे में पड़ सकता है। बाब अल-मंदेब से आवाजाही में रुकावट आने पर शिपिंग कंपनियों को अपने जहाज दक्षिण अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते भेजने पड़ते हैं, जिससे लागत काफी बढ़ जाती है। अमेरिकी सरकार पहले भी कह चुकी है कि केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाने से सऊदी अरब से अमेरिका तक की यात्रा में लगभग 4,345 किलोमीटर की दूरी बढ़ जाएगी। सऊदी अरब के लिए इस नौसैनिक नाकेबंदी का मतलब है कि वे अब पूर्वी एशिया को तेल निर्यात करने के लिए बाब अल-मंदेब का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। इसका सऊदी अरब की सालाना तेल आय पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button