हाथ मिलाकर आंख दिखाना

समय और परिस्थिति के अनुसार राजनीतिक भाव-भंगिमा भी बदल जाती है। तमिलनाडु मंे जब अन्नाद्रमुक की तूती बोलती थी, तब द्रमुक को कांग्रेस के हाथ का साथ मिला था। द्रमुक मजबूत भी हुआ और 2021 के विधानसभा चुनाव में सत्ता पर कब्जा भी कर लिया। हालांकि इस दोस्ती का भरपूर लाभ कांग्रेस को भी मिला था लेकिन राहुल गांधी को उस समय पता नहीं था कि एमके स्टालिन जिस गर्मजोशी से आज हाथ मिला रहे हैं, उसी तरह एक दिन हाथ झटक कर आंखें दिखा सकते हैं। दक्षिण भारत के इस राज्य मंे इसी साल (2026) मंे विधानसभा के चुनाव होने हैं। कांग्रेस ने इस बार द्रमुक से 41 सीटों पर चुनाव लड़ने की मंशा जतायी है लेकिन स्टालिन की पार्टी 27 से ज्यादा सीटें देने को तैयार ही नहीं है। इतना ही नहीं, कांग्रेस को 2021 मंे ही 25 विधानसभा सीटों के साथ राज्यसभा की 1 सीट देने का वादा किया गया था। द्रमुक इस वादे को भी भूल गयी है। ध्यान रहे कि कांग्रेस ने पिछली बार 25 मंे से 18 सीटों पर विजयश्री हासिल की थी। इस प्रकार कांग्रेस अपने प्रदर्शन के आधार पर ज्यादा सीटें मांग रही है जो डीएमके को मंजूर नहीं है। डीएमके पिछली बार 188 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और 55 सीटों पर पराजित हो गयी थी। कांग्रेस का कहना है कि डीएमके अपनी हारी हुई 55 सीटें ही कांग्रेस को दे दे लेकिन स्टालिन इस पर भी तैयार नहीं हैं।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने 2016 में जिन 41 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इस बार भी उतनी ही सीटों की मांग की है। वहीं डीएमके 2021 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को दी गई 25 सीटों से आगे बढ़ने को तैयार नहीं दिख रही है। कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट बंटवारे को लेकर यह विवाद उस बैठक के बाद और तेज हो गया है, जिसमें कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके संसदीय दल की नेता कनिमोझी करुणानिधि से मुलाकात की थी। इसके बाद कनिमोझी ने अपने आवास पर कांग्रेस के राज्य प्रभारी गिरीश चोडणकर के साथ सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा की।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने डीएमके को एक राज्यसभा सीट देने का पुराना वादा याद दिलाया है, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। बताया जा रहा है कि डीएमके इस मांग पर सहमत हो सकती है। हालांकि पार्टी कांग्रेस को सिर्फ दो या तीन अतिरिक्त सीटें देने पर विचार कर रही है। एक अंदरूनी सूत्र के अनुसार, ‘अधिकतम 26 या 27 सीटें दी जा सकती हैं, इससे ज्यादा देना संभव नहीं है।’ डीएमके नेतृत्व का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव बेहद कड़ा होगा और कांग्रेस के पास पर्याप्त मजबूत उम्मीदवारों की कमी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2021 के चुनाव में डीएमके ने कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए अपने संगठनात्मक और वित्तीय संसाधनों का व्यापक इस्तेमाल किया था, लेकिन इस बार पार्टी अपनी मशीनरी को जरूरत से ज्यादा फैलाने से बचना चाहती है। वहीं कांग्रेस का दावा है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उसका प्रदर्शन बेहतर रहा था। कांग्रेस ने 25 में से 18 सीटें जीती थीं, जबकि डीएमके 188 सीटों में से 55 सीटें हार गई थी। इसी आधार पर कांग्रेस नेताओं ने यह तर्क दिया कि डीएमके की हारी हुई कुछ सीटें इस बार कांग्रेस को दी जानी चाहिए। हालांकि मुख्यमंत्री स्टालिन की पार्टी ने इस दलील को साफ तौर पर खारिज कर दिया।
डीएमके सूत्रों का यह भी कहना है कि अब गठबंधन में सहयोगी दलों की संख्या बढ़ गई है, ऐसे में कांग्रेस की हिस्सेदारी बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। अंदरूनी जानकारी के अनुसार, डीएमके कांग्रेस को अधिकतम 28 सीटें देने पर ही सहमत हो सकती है। इसके अलावा, यदि गठबंधन सत्ता में आता है तो कांग्रेस को सत्ता में हिस्सेदारी देने की मांग पर भी मुख्यमंत्री स्टालिन ने विचार करने से इनकार कर दिया है।
इस बीच अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम द्वारा कांग्रेस को करीब 70 सीटें देने की संभावना जताई जा रही है। सीट बंटवारे की बातचीत का नेतृत्व कनिमोझी कर रही हैं। उन्होंने कुछ सप्ताह पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इस बातचीत में डीएमके सांसद ए राजा, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और छत्तीसगढ़ के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव भी शामिल रहे।
मिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। डीएमडीके और डीएमके के बीच पहली बार चुनावी गठबंधन बनने से राज्य की सियासी तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत मिले हैं। डीएमडीके की प्रेमलता विजयकांत ने भावनात्मक और राजनीतिक दोनों पहलुओं को सामने रखते हुए इस ऐतिहासिक गठबंधन की घोषणा की। प्रेमलता विजयकांत ने कहा कि यह गठबंधन वर्ष 2016 में ही होना तय था, जब तत्कालीन डीएमके अध्यक्ष एम करुणानिधि और डीएमडीके संस्थापक विजयकांत के बीच बातचीत हुई थी। हालांकि, उस समय यह संभव नहीं हो सका, लेकिन अब दस वर्ष बाद करुणानिधि और विजयकांत के आशिर्वाद से यह गठबंधन साकार हुआ है। उन्होंने बताया कि यह निर्णय पार्टी के अधिकांश पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की इच्छा के अनुरूप लिया गया है। डीएमके और डीएमडीके के बीच चुनावी गठजोड़ कांग्रेस के लिए सियासी झटका है। राहुल गांधी की पार्टी के साथ बिहार में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। आखिरकार कांग्रेस को महागठबंधन के पाले में ही वापस आना पड़ा था। कई सीटों पर घटक दलों के बीच ही चुनावी मुकाबला हुआ था। परिणाम यह रहा कि बिहार में महागठबंधन पूरी तरह से पिट गया। तमिलनाडु में भी कुछ वैसे ही हालात बने हुए हैं।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एके स्टालिन ने डीएमडीके के गठबंधन में शामिल होने का स्वागत किया। सोशल मीडिया मंच एक्स पर उन्होंने कहा कि डीएमडीके का आगमन राज्य के विकास में योगदान देगा और दोनों दल राज्य की समग्र प्रगति के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे। स्टालिन से मुलाकात के बाद प्रेमलता ने बताया कि दोनों दलों के बीच जल्द ही सीट बंटवारे को लेकर बातचीत होगी। डीएमडीके को राज्यसभा सीट मिलने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में आधिकारिक घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की जाएगी। इस गठबंधन को भावनात्मक रंग देते हुए प्रेमलता ने करुणानिधि के प्रसिद्ध कथन ‘पझम नझुवि पालिल विझुम’ का उल्लेख किया, जिसका अर्थ है कि ‘फल फिसलकर दूध में गिरेगा’, जो उस समय संभावित गठबंधन की ओर संकेत था। उन्होंने कहा कि अब यह फल सचमुच ‘शहद मिले दूध’ में गिरा है। उन्होंने दोनों परिवारों के पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए बताया कि उनके विवाह की अध्यक्षता करुणानिधि ने की थी और विवाह समारोह अन्ना अरिवालयम में आयोजित हुआ था।
बहरहाल डीएमडीके के गठबंधन में शामिल होने से डीएमके की चल रही सीट बंटवारे पर बातचीत में स्थिति मजबूत हो गई है। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं। वर्ष 2021 में कांग्रेस ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा था। अब डीएमडीके आधिकारिक रूप से गठबंधन का हिस्सा बन गई है। यह पहला मौका है जब डीएमडीके ने 2005 में अपनी स्थापना के बाद डीएमके के साथ हाथ मिलाया है। ऐसे में गठबंधन की हिस्सेदारी को और अधिक बांटना पड़ेगा। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



