श्रीदेवी की फिल्मों ने उत्तर-दक्षिण को जोड़ा

फरवरी 1983 में जब सिनेमाघरों में जितेंद्र और श्रीदेवी की फिल्म हिम्मतवाला लगी तो शुरुआती कई दिनों तक बहुत सीटें खाली रहती थीं। उत्तर भारत के दर्शकों को मालूम ही नहीं था कि श्रीदेवी नाम की ये हीरोइन कौन हैं। जितेंद्र भी उन दिनों हाशिए पर चल रहे थे। अमिताभ बच्चन के सुपरस्टारडम के आगे उनकी भी फिल्में बहुत सफल नहीं हो रही थीं। नतीजा ये हुआ कि हिम्मतवाला को लेकर दर्शकों में कोई रुचि नहीं थी। हालांकि हिम्मतवाला के तड़क-भड़क भरे गाने लोकप्रिय हो चुके थे- नैनों में सपना सपनों में सजना और जब शहर में रिक्शे पर उन गानों के साथ फिल्म का प्रचार किया जाता तो युवाओं की टोलियों की मस्ती परवान चढ़ जाती। दीवारों पर चिपके पोस्टर देखकर उल्लास से भर जाते। उस दौर का यही सबसे बड़ा सोशल मीडिया था। सबसे पहले इस फिल्म को इन्हीं युवाओं की टोलियों ने देखा, जिनके दिलों दिमाग पर किशोर कुमार-आशा भोंसले की आवाज में इसके खनकदार गानों ने धमाल मचा रखा था। सबसे ज्यादा प्रभाव श्रीदेवी की अदाओं और खूबसूरती ने जमाया। जुबान दर जुबान जब श्रीदेवी के हुस्न और यौवन के साथ उनकी नृत्य भंगिमाओं की चर्चा फैलने लगी तो चंद दिनों के बाद ही हिम्मतवाला देखने वालों की भीड़ भी धीरे-धीरे बढ़ती गई। हफ्ते भर बाद ही सिनेमा घर हाउसफुल हो गए। दो हफ्ता, तीन हफ्ता, चार हफ्ता, पांच हफ्ता लगातार हाउसफुल। इस प्रकार यह फिल्म अगले दो-तीन महीने तक शहर दर शहर में धूम मचाती रही। गांव-गांव से दर्शक इस फिल्म को देखने के लिए सिनेमा घरों में उमड़े। फिल्म आज की भाषा में ब्लॉकबस्टर हो गई। जितेंद्र, कादर खान, असरानी, शक्ति कपूर आदि कलाकारों को तो लोग पहचानते थे लेकिन अभिनेत्री श्रीदेवी अनजानी-सी थीं। गौरतलब है कि ये वो समय था जब हेमा मालिनी, रेखा, जीनत अमान, परवीन बॉबी, नीतू सिंह, रीना रॉय आदि अभिनेत्रियों का जलवा खत्म तो नहीं हुआ था, हां धीरे-धीरे ढलान की ओर बढ़ने लगी थीं। ऐसे में श्रीदेवी एक ताजा हवा का झोंका की तरह आईं और सबके दिलों दिमाग पर छा गईं। हेमा मालिनी के बारे में विख्यात है कि उनके अभिनय, खूबसूरती और डांस देखने के लिए दर्शक थिएटर में उमड़ते थे, ऐसी तस्वीर
उनके बाद अगर किसी और हीरोइन के लिए दिखी तो वह थीं- श्रीदेवी। भारतीय दर्शकों को उत्तर से दक्षिण तक जोड़ने का जो काम बैजयंती माला ने अपने दौर में किया, हेमा मालिनी ने अपने समय में किया, श्रीदेवी ने उस विरासत को और भी आगे बढ़ाया। श्रीदेवी की फिल्मों के मनोरंजन ने उत्तर-दक्षिण को एकसूत्र में जोड़ा। (हिफी)



