लेखक की कलम

सुप्रीम कोर्ट को नेताओं से फुर्सत नहीं

देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट में आम जनता से जुड़े मुकदमों की फाइलों का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है। सितम्बर 2025 तक सुप्रीम कोर्ट में लगभग 88417 मामले लम्बित थे। इनमें लगभग 69 हजार 563 दीवानी के और 18864 मामले आपराधिक बताये गये थे। सुप्रीम कोर्ट में चार हजार से अधिक तो ऐसे मामले थे जो एक दशक से अधिक समय से लम्बित थे। अब तक इनकी संख्या में और इजाफा हो चुका होगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार निर्णय प्रक्रिया मंे देरी के लिए मुख्य रूप से जजांें की कभी वकीलों की लम्बी बहस और बार-बार स्थगन होना है। लम्बित मामलों में लगभग 50 फीसद सरकारी विभागों से जुड़े हैं लेकिन हतारे देश की राजनीति भी इसमंे पीछे नहीं है। यदि यह कहा जाए कि सुप्रीम कोर्ट को राजनेताओं से ही फुर्सत नहीं है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। मीडिया में रोज ही दो-चार खबरें नेताओं और न्यायालय से जुड़ी होती हैं। अभी ताजा मामला बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के संस्थापक लालू यादव से जुड़ा है। लैंड फार जाॅब मामला तब का है जब लालू यादव रेल मंत्री हुआ करते थे। आरोप है कि नौकरी के बदले उनको जमीन मिली। लालू यादव और उनके परिजन इससे इनकार करते हैं लेकिन आरोप लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट मंे पहुंच गये हैं। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और मामला हाईकोर्ट में ही लालू यादव और उनके परिजनों के खिलाफ चला गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी लैण्ड फार जाॅब घोटाले मंे सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने से इनकार कर दिया है। दूसरा मामला असोम (असम) का है जहां अभी-अभी (9 अप्रैल) को विधानसभा के चुनाव सम्पन्न हुए हैं। यहां पर मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी सरमा पर कांगे्रस के नेता पवन खेड़ा ने कथित अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया। इस मामले को हिमंता बिस्वा सरमा ने तेलंगाना हाई कोर्ट में उठाया था। हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को राहत देते हुए फैसला सुनाया। हिमंता ने अब सुप्रीम कोर्ट मंे दस्तक दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट से लालू प्रसाद यादव को झटका लगा है। कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू यादव के खिलाफ सीबीआई की एफआईआर और चार्जशीट रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने मुकदमा चलाने के लिए कानूनी मंजूरी न लेने की दलील को भी खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान वो मंजूरी के मुद्दे को निचली अदालत में उठा सकते हैं। हालांकि सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालत में चल रही कार्रवाई के दौरान व्यक्तिगत पेशी से लालू यादव को छूट दी है। राजद नेता लालू प्रसाद यादव ने जमीन के बदले नौकरी मामले में उनके और उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ी कार्रवाई रद्द करने की मांग की थी। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लालू यादव की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इस मामले में कानून के अनुसार उचित प्रक्रिया का पालन किया गया है। हाईकोर्ट में लालू यादव की तरफ से दलील दी गई थी कि सीबीआई ने मुकदमा चलाने के लिए कानूनी मंजूरी नहीं ली थी। यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप डी नियुक्तियों में कथित धांधली से जुड़ा है। इस मामले में नौकरी के बदले जमीनें लिये जाने का आरोप है। इस मामले में लालू यादव के साथ-साथ राबड़ी देवी, मीसा भारती और तेजस्वी यादव पर भी आरोप हैं।
उधर, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। असम सरकार ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है, जिसमें खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। असम सरकार की इस याचिका ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पूरा मामला तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने पवन खेड़ा को राहत देते हुए एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत मंजूर की थी। हाईकोर्ट का उद्देश्य खेड़ा को इतना समय देना था कि वह संबंधित निचली अदालत में जाकर अपनी नियमित जमानत याचिका दायर कर सकें।
असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील की है जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी सरमा के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर असम में दर्ज एक केस के सिलसिले में पवन खेड़ा को एक हफ्ते की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। असम सरकार का तर्क है कि पवन खेड़ा के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं और उन्हें इस तरह की राहत नहीं मिलनी चाहिए। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने मानहानि और आपराधिक मामला दर्ज कराया है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन पासपोर्ट होने का झूठा दावा किया और उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हमारे कुछ समर्थकों ने विदेश से बहुत सनसनीखेज कुछ कागज भेजे हैं। ये ऐसे कागज हैं जो मुझे नहीं लगता कि आजाद भारत की राजनीति में इतनी बड़ी बात किसी सिटिंग मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के खिलाफ सामने आई हो। पवन खेड़ा का आरोप है कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास यूएई, एंटीगुआ और बारबुडा, और मिस्र का पासपोर्ट है। उन्होंने इसके समर्थन के कुछ दस्तावेजों की कॉपी भी दिखाई है।
पवन खेड़ा ने कहा हम खुद हैरान हुए कि क्या ये संभव भी है। हम देखते हैं कि कई लोग आटे में नमक डालते हैं, नमक में आटा वो भी इतनी बेशर्मी से, इतना खुलकर, इतनी निडरता से। जैसे कि उन्हें लगता है कि उन्हें कोई पकड़ ही नहीं सकता। इसके बाद उन्होंने कहा सबसे पहले एक चैंकाने वाली जानकारी कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन पासपोर्ट हैं। तीनों पासपोर्ट चालू पासपोर्ट हैं, एक्सपायर नहीं हुए हैं।
वहीं मुख्यमंत्री सरमा और
उनकी पत्नी ने कांग्रेस के इन
आरोपों को खारिज किया है और इसे कांग्रेस की हताशा बताया है। उनकी पत्नी ने कांग्रेस की ओर से पेश
किए गए दस्तावेज को फोटोशॉप बताया है।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

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