कर्नाटक में मई क्रांति का सस्पेंस

कांगे्रस का नेतृत्व पंजाब मंे आपरेशन लोटस को देखकर भी क्या कर्नाटक मंे सचेत है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है कि आगामी 3 मई को जब पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होंगे, तभी कर्नाटक मंे भी सत्ता परिवर्तन की संभावनाएं जतायी जा रही थीं। इसे कांगे्रस की मई क्रांति का नाम दिया जा रहा था लेकिन अब यह कहा जाने लगा है कि मई क्रांति का सस्पेंस खत्म हो गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने साफ-साफ कह दिया कि अभी राज्यों मंे नेतृत्व परिवर्तन नहीं होगा। दरअसल, इससे पहले गृहमंत्री परमेश्वर ने कहा था कि मल्लिकार्जुन खरगे मुख्यमंत्री बन जाएं तो सभी स्वागत करेंगे। उससे पहले कर्नाटक सरकार मंे मंत्री प्रियांक खड़गे ने राज्य के उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री बनने का अभियान चला रहे डीके शिवकुमार के दिल्ली दौरे को विशेष महत्व नहीं दिया। ध्यान रहे कि कर्नाटक मंे सिद्धा रमैया और डीके शिवकुमार के बीच ढाई-ढाई वर्ष के मुख्यमंत्री रहने का मौखिक समझौता हुआ था। उस हिसाब से सिद्धारमैया अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस नेतृत्व डीके शिवकुमार को सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठा रहा है। बहरहाल, मई क्रांति का सस्पेंस अभी खत्म नहीं माना जा रहा है क्योंकि डीके शिवकुमार के समर्थक अब अपना सब्र खो चुके हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 30 अप्रैल को साफ कर दिया कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलाव को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में नेतृत्व को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा। खड़गे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस पार्टी के अंदर और राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व परिवर्तन को लेकर जोरदार अटकलें चल रही हैं। खासतौर पर 4 मई को चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद कर्नाटक में कैबिनेट रिशफल और सीएम बदलाव की संभावना पर चर्चा तेज हो गई। कलबुरगी में मीडिया से बात करते हुए खड़गे ने कहा, “आप लोग (मीडिया), परमेश्वर और ऊपर बैठे लोग कह रहे हैं कि मुझे मुख्यमंत्री बनना चाहिए। लेकिन मेरे लिए भाग्य से ज्यादा मेरी विचारधारा और पार्टी की सेवा ज्यादा महत्वपूर्ण है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राज्य में नेतृत्व को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उन्हें जल्द ही सुलझा लिया जाएगा।
खड़गे का कहना है कि अभी यह सवाल ही नहीं उठता। कर्नाटक मंे पहले से मुख्यमंत्री हैं। अगर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मुझे मिलकर कोई बदलाव का फैसला करना भी हो, तो वह कुछ समय लेगा। आइए इंतजार करते हैं और देखते हैं।” यह बयान गृह मंत्री जी. परमेश्वर के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनें तो पूरे कांग्रेस दल का स्वागत होगा। कांग्रेस के अंदर सत्ता संघर्ष की अटकलें तब से तेज हुई हैं जब नवंबर 2025 में सिद्धारमैया सरकार ने अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लिया। ध्यान रहे 2023 के विधानसभा चुनाव के समय सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच कथित पावर शेयरिंग फॉर्मूले की चर्चा रही थी, जिसके तहत दो साल बाद नेतृत्व परिवर्तन की बात कही जा रही थी। शिवकुमार के समर्थक लगातार उनकी मुख्यमंत्री पद पर पदोन्नति की मांग कर रहे हैं।
खड़गे ने जेडीएस नेता और केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि नेतृत्व संकट के बीच करीब 40 कांग्रेस विधायक दिल्ली के लिए टिकट बुक करा चुके हैं। खड़गे ने कहा, “मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। डिटेल्स के लिए उनसे पूछिए।” कांग्रेस अध्यक्ष के इस बयान से पार्टी में अस्थिरता की अटकलें कुछ हद तक थमने की उम्मीद है, हालांकि सिद्धारमैया और शिवकुमार गुट के बीच तनाव अभी भी जारी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि 4 मई के चुनाव नतीजों के बाद कर्नाटक कांग्रेस में बड़े फेरबदल की संभावना बनी हुई है। अब सबकी नजरें कांग्रेस हाईकमान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं
कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियांक खड़गे ने उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार के दिल्ली दौरे को ज्यादा तवज्जो नहीं दी और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं को खारिज कर दिया। बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए, एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मंत्री प्रियांक ने शिवकुमार की हालिया दिल्ली यात्रा से जुड़े विवाद पर बात करते हुए कहा कि उपमुख्यमंत्री ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी, और उन्होंने इस यात्रा को लेकर हो रही आलोचना को खारिज कर दिया। खड़गे ने सवाल किया, “केंद्रीय मंत्री से मिलने में क्या गलत है? वह बेंगलुरु से जुड़े मुद्दों और विकास कार्यों पर चर्चा करने गए थे। क्या उन्हें नेताओं से नहीं मिलना चाहिए?” उन्होंने आगे कहा कि पार्टी के आम कार्यकर्ता भी नेताओं से मिलते हैं, और ऐसी मुलाकातों पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा नेता भी वैसी ही चिंताएं जताएंगे अगर कांग्रेस नेता आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलें? उन्होंने पूछा, “अगर हमारे नेता भागवत से मिलते हैं, तो क्या आप उसी तरह सवाल उठाएंगे?”
कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के मुद्दे पर, खड़गे ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर फैसला लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे वरिष्ठ नेता करते हैं। उन्होंने पूछा, “यहां कोई भ्रम नहीं है। खड़गे साहब के अलावा ऐसे फैसले और कौन ले सकता है?” किसी बड़े राजनीतिक उथल-पुथल की अफवाहों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, “यहां कोई ‘मई क्रांति’ या वैसी कोई चीज नहीं होने वाली है। खड़गे की ये टिप्पणियां कर्नाटक और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के अंदरूनी समीकरणों और नेतृत्व से जुड़े सवालों को लेकर तेज हुई राजनीतिक अटकलों और चल रही बहसों के बीच आई हैं। प्रियांक खड़गे ने राष्ट्रीय स्तर पर कथित राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी अटकलों पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसमें ‘आप’ नेता राघव चड्ढा के भाजपा में शामिल होने के दावे और ‘ऑपरेशन लोटस’ को लेकर चल रही चर्चाएं शामिल हैं। भाजपा पर तंज कसते हुए, खड़गे ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें ‘ऑपरेशन लोटस’ के बारे में जानकारी नहीं है? यह शब्द अक्सर दलबदल कराने की कथित कोशिशों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, “क्या यह आप ही लोग नहीं थे जिन्होंने ‘ऑपरेशन लोटस’ को राष्ट्रीय मंच पर पेश किया था? हर कोई जानता है कि इस तरह के ऑपरेशन कैसे चलाए जाते हैं।” राघव चड्ढा और संजय सिंह जैसे ‘आप’ नेताओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय लोग इस तरह के घटनाक्रमों से अच्छी तरह वाकिफ होते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मीडिया के एक हिस्से की चुप्पी पर भी सवाल उठाया, और इशारों-इशारों में मीडिया पर चुनिंदा कवरेज करने का आरोप लगाया। लेकिन डीके शिवकुमार क्या शांत होकर बैठ जाएंगे इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



