अमेरिका-कनाडा रिश्तों की कसौटी बना ब्रिज

अमेरिका और कनाडा के बीच दशकों से सहयोग, व्यापार और भरोसे का प्रतीक रहे गॉर्डी हाउ इंटरनेशनल ब्रिज पर अचानक सियासी बादल छा गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट और व्हाइट हाउस की तीखी टिप्पणियों ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को एक बार फिर विवाद के केंद्र में ला खड़ा किया है। मिशिगन और ओंटारियो को जोड़ने वाला यह पुल अब केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों की परीक्षा बन गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक कनाडा अमेरिका के साथ “न्याय और सम्मान” से पेश नहीं आता, तब तक पुल को खुलने नहीं दिया जाएगा। उनका तर्क है कि अमेरिका को इस पुल पर कम से कम 50 प्रतिशत स्वामित्व, साझा नियंत्रण और इससे होने वाले आर्थिक लाभों में हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी कहा कि दोनों ओर की जमीन पर कनाडा का नियंत्रण “अस्वीकार्य” है। इसके जवाब में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने संयमित लेकिन स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने ट्रंप से हुई बातचीत को “सकारात्मक” बताते हुए याद दिलाया कि पुल का पूरा खर्च कनाडा सरकार ने उठाया है। कार्नी ने यह भी कहा कि इस पुल का निर्माण अमेरिकी और कनाडाई श्रमिकों ने मिलकर किया है और इसमें दोनों देशों का स्टील इस्तेमाल हुआ है। उनके मुताबिक यह परियोजना द्विपक्षीय सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है और इसे राजनीति की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। लगभग 6.4 अरब कनाडाई डॉलर की लागत से बने इस पुल का निर्माण 2018 में शुरू हुआ था, लेकिन इसकी योजना और मंजूरी को लेकर विवाद इससे कहीं पहले शुरू हो गए थे। विंडसर-डेट्रॉइट ब्रिज अथॉरिटी, जो एक कनाडाई संघीय क्राउन कॉरपोरेशन है, इस परियोजना का संचालन कर रही है। योजना के अनुसार पुल का स्वामित्व सार्वजनिक होगा और इसका लाभ दोनों देशों को मिलेगा।अमेरिका के भीतर भी ट्रंप के रुख को लेकर असहमति दिख रही है। मिशिगन की डेमोक्रेट सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन ने चेतावनी दी है कि पुल को रोकना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए “विनाशकारी” होगा। इससे व्यापारिक लागत बढ़ेगी, सप्लाई चेन कमजोर होगी और नौकरियां जाएंगी। पूर्व रिपब्लिकन गवर्नर रिक स्नाइडर ने भी इसे “अमेरिका के लिए शानदार सौदा” बताते हुए कहा कि पुल को रोकने से सबसे ज्यादा नुकसान अमेरिकियों को ही होगा। विवाद की एक और परत पुराने व्यापारिक हितों से जुड़ी है। पास के एंबेसडर ब्रिज के मालिक मोरोन परिवार ने पहले भी नए पुल का विरोध किया था, क्योंकि इससे उनके टोल-आधारित कारोबार पर असर पड़ता है। हालांकि पहले कार्यकाल में ट्रंप और तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस पुल को “महत्वपूर्ण आर्थिक कड़ी” बताया था।ट्रंप ने इस पूरे मामले को डेयरी टैरिफ, चीन-कनाडा व्यापार समझौते और यहां तक कि आइस हॉकी जैसे मुद्दों से भी जोड़ दिया है, जिससे बयानबाजी और तीखी हो गई है लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि गॉर्डी हाउ ब्रिज दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए जरूरी है। अगर यह पुल समय पर खुलता है, तो यह केवल ट्रैफिक नहीं, बल्कि भरोसे और साझेदारी को भी आगे बढ़ाएगा। अगर नहीं, तो यह उत्तरी अमेरिका के रिश्तों में एक नई दरार की कहानी बन सकता है।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



