अमीर-गरीब सभी तक पहुंची दीपावली की खुशी

इस वर्ष दिवाली ने देशभर में व्यापार की दुनिया में नया रिकार्ड बनाया है। कारोबार से लेकर सेवा सेक्टर तक सब को यह दीवाली रोशन कर गयी इतना ही नहीं भविष्य के लिए भी बेहतर उम्मीद की किरन पैदा कर गयी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की रिसर्च शाखा, रिसर्च एंड ट्रेड डेवलपमेंट सोसाइटी के एक शोध के अनुसार, इस त्योहारी सीजन में देश में जमकर व्यापार हुआ। वस्तुओं के व्यापार का आंकड़ा 5.40 लाख करोड़ रुपये पर जाकर ठहरा तो सेवाओं में करीब 65 हजार करोड़ रुपये का बिजनेस हुआ। यह भारतीय रिटेल मार्केट के लिए अब तक का सबसे बड़ा त्योहारी सीजन साबित हुआ। 2024 में त्योहारी बिक्री 4.25 लाख करोड़ रुपये रही थी। यह इस साल की बिक्री से 25 फीसद कम थी।
इस वृद्धि का एक बड़ा कारण जीएसटी दरों में हुई कटौती भी रही। कन्फेक्शनरी, होम डेकोर, फुटवियर, रेडीमेड गारमेंट्स, उपभोक्ता ड्यूरेबल्स और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर जीएसटी कम होने से कीमतें प्रतिस्पर्धात्मक हुईं और उपभोक्ता खरीदारी के लिए अधिक प्रोत्साहित हुए। 72 फीसद व्यापारियों ने इस बात की पुष्टि की कि उनके बिक्री के आंकड़े सीधे जीएसटी में कटौती के कारण बढ़े।
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक दिवाली पर रिकॉर्ड तोड़ सेल हुई है। लोगों ने जमकर भारतीय चीजों की खरीदारी की है। 5.40 लाख करोड़ रुपये की चीजें बिकीं हैं, जबकि सेवाओं में 65,000 हजार करोड़ रुपये का कारोबार हुआ है। दिवाली पर यह बंपर सेल भारत की आर्थिक मजबूती और स्वदेशी भावना को दर्शाता है। दिवाली पर स्वदेशी सामानों की खूब बिक्री हुई है। पिछले साल की तुलना में इस बार दिवाली पर 25 फीसदी ज्घ्यादा सेल हुई है। लोगों ने चीनी प्रोडक्ट्स को छोड़कर भारतीय निर्मित प्रोडक्ट्स को खरीदना पसंद किया है।
इस बार की दिवाली ने देशभर के छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए भी नई ऊर्जा पैदा की। लगभग 50 लाख लोगों को अस्थायी रोजगार मिला, जिसमें लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्ट, रिटेल सहायता, पैकेजिंग और डिलीवरी शामिल हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में खरीद शक्ति बढ़ी और इसने कुल बिक्री में लगभग 28 प्रतिशत योगदान दिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि दिवाली का व्यापार केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गांव और छोटे शहरों तक इसकी रौनक पहुंची।
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ की दिवाली त्यौहारी बिक्री 2025 पर रिसर्च रिपोर्ट राज्यों की राजधानियों और टियर 2 व 3 शहरों समेत 60 प्रमुख वितरण केंद्रों पर किए गए एक व्यापक राष्ट्रव्यापी सर्वे पर बेस्ड है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल दिवाली पर कुल बिक्री रिकॉर्ड 6.05 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसमें वस्तुओं में 5.40 लाख करोड़ रुपये और सेवाओं में 65,000 करोड़ रुपये शामिल है। यह भारत के व्यापारिक इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा फेस्टिवल कारोबार है। चांदनी चैक से सांसद और व्यापार संगठन के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने और स्वदेशी अपनाने के एक ‘मजबूत ब्रांड एंबेसडर’ के रूप में उभरे हैं, जिससे व्यापारिक समुदाय और ग्राहक दोनों ही प्रेरित हुए हैं।
खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और स्वदेशी दिवाली नारों ने लोगों को बहुत प्रभावित किया है। 87 फीसद कंज्यूमर्स ने विदेशी सामानों की तुलना में भारतीय निर्मित वस्तुओं को प्राथमिकता दी यानी 100 में से 87 लोगों ने भारतीय सामान खरीदें, जिस कारण चीनी वस्तुओं की मांग में भारी गिरावट आई. व्यापारियों ने पिछले साल की तुलना में भारतीय निर्मित उत्पादों की बिक्री में 25 फीसद की वृद्धि दर्ज की है।
दिवाली 2025 के व्यापार के आंकड़े पिछले साल के 4.25 लाख करोड़ रुपये की बिक्री की तुलना में 25 फीसद की ग्रोथ दिखाता है। नॉन-कॉर्पोरेट और पारंपरिक बाजारों ने कुल व्यापार में 85 फीसद का योगदान दिया।
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने प्रमुख त्यौहारी वस्तुओं की बिक्री के बारे में जानकारी दी। उनके मुताबिक, किराना और एफएमसीजी 12 फीसद, सोना और आभूषण, 10 फीसद, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स, 8 फीसद, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं 7 फीसद, रेडीमेड वस्त्र 7 फीसद, गिफ्ट प्रोडक्ट्स 7 फीसद, गृह सज्जा, 5 फीसद फर्निशिंग और फर्नीचर, 5 फीसद मिठाई और नमकीन 5 फीसद, कपड़ा और फैब्रिक 4 फीसद, पूजा सामग्री 3 फीसद, फल और सूखे मेवे 3 फीसद, बेकरी और कन्फेक्शनरी 3 फीसद, जूते 2 फीसद, अन्य वस्तुएं, 19 फीसद कुल व्यापार का हिस्सा हैं।
उन्होंने आगे कहा कि सेवा क्षेत्र के विस्तार से 65,000 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है। खुदरा व्यापार के साथ-साथ पैकेजिंग, हॉस्पिटैलिटी, कैब सर्विस, यात्रा, कार्यक्रम प्रबंधन, टेंट और सजावट, जनशक्ति और डिलीवरी जैसी सेवाओं से अनुमानित 65,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो विभिन्न क्षेत्रों में त्योहारी अर्थव्यवस्था के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
आत्मविश्वास, उपभोक्ता रुझान, त्योहारी फुटफॉल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए स्वदेशी संदेश का प्रभाव सभी को मापा गया. सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “स्वदेशी अपनाओ” के आह्वान ने इस बार व्यापार और उपभोक्ता व्यवहार दोनों पर गहरा असर डाला।
शोध के अनुसार, व्यापारी और उपभोक्ता दोनों ही भारतीय उत्पादों के प्रति अधिक आकर्षित हुए। सर्वेक्षण में लगभग 87 फीसद उपभोक्ताओं ने आयातित वस्तुओं की तुलना में भारतीय वस्तुओं को प्राथमिकता दी। इससे साफ झलकता है कि देशवासियों में स्वदेशी भावना की गहरी जड़ें हैं, और त्योहारी सीजन में इसे बड़े पैमाने पर अपनाया गया।
व्यापारियों की दृष्टि से भी यह त्योहारी सीजन बेहद सफल रहा। इस बार की कुल बिक्री में मुख्य रिटेल यानी मेनलाइन रिटेल ने लगभग 85 फीसद का योगदान दिया। इसका मतलब है कि ब्रिक-एंड-मोर्टार मार्केट्स में फिर से रौनक लौट आई है। सोने-चांदी और आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रेडीमेड कपड़े, एफएमसीही, होम डेकोर, मिठाई और उपहार सामग्री जैसी सभी प्रमुख श्रेणियों में मजबूत बिक्री रही।
व्यापारियों की उम्मीद है कि यह उत्साह सर्दियों और शादी के सीजन तक बना रहेगा, और जनवरी से
अगले त्योहारी सीजन तक व्यापारिक रौनक जारी रहेगी। इस वृद्धि ने छोटे और मध्यम विनिर्माण क्षेत्र को भी
नई गति दी है, जिससे रोजगार में
वृद्धि और कर्मचारियों का सशक्तिकरण होगा।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)



