लेखक की कलम

टूट गया जहांगीर महल का भ्रम

आतताइयों ने हमारे देश की सिर्फ धन-दौलत ही नहीं लूटी बल्कि बिरासत को भी हथियाने का प्रयास किया। दिल्ली से लेकर कई राज्यों तक अब ऐसी बिरासतों का भ्रम तोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत भाजपा के अन्य मुख्यमंत्री भी देश की गौरवशाली सम्पदा पर साजिशन डाले गये पर्दे को हटा रहे हैं। बुंदेलखण्ड का क्षेत्र तो वीरता की खान रहा है। यह वीरों की धरती उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के हिस्से में है। वीरगाथा काल की कहानियां इसी धरती से उपजी हैं। आल्हा-ऊदल जैसे वीर नायक ही नहीं ओरछा नरेश वीर सिंह और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता को सुनकर आज भी युवा खून में उबाल आ जाता है। ओरछा राजा वीर सिंह ने एक भव्य महल बनवाया था, जिसे मुगलकालीन इतिहासकारों ने जहांगीर महल का नाम दे दिया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओरछा का दौरा किया। उन्हांेने कहा जहांगीर तो कभी ओरछा आया ही नहीं, तो उसने महल कैसे बनवा दिया? सीएम मोहन यादव ने कहा कि वास्तव मंे इस आलीशान महल को राजा वीर सिंह ने बनवाया था और इसे सूर्य मंदिर कहा जाता था। मुगलों के शासनकाल मंे देश के बड़े-बड़े मंदिर तोड़े गये और वहां मुगलों का नाम जोड़ दिया गया। अयोध्या मंे कथित बाबरी मस्जिद को रामलला की जन्मभूमि का मालिकाना हक देश की सबसे बड़ी अदालत दे ही चुकी है। इसी तरह वाराणसी मंे ज्ञानवापी मस्जिद मंे भी शिव-पार्वती मंदिर होने के साक्ष्य मिले हैं। अब ओरछा के इस महल को लेकर नई बहस छिड़ गयी है। इसका नाम निश्चित रूप से राजा वीर सिंह के नाम पर रखा जाना चाहिए। जहांगीर की राजा वीर देव सिंह के साथ मित्रता थी। कुछ इतिहासकारों का ऐसा मत है कि ओरछा नरेश ने इसी महल में जहांगीर का स्वागत किया था।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के जहांगीर को लेकर दिए बयान के बाद इतिहास पर बहस छिड़ गई है। जब जहांगीर महल का दौरा किया तो उन्होंने कहा कि ओरछा में रामराज लोक के बनने के बाद यहां पर श्रद्धालुओं का बढ़ना और धार्मिक केंद्र बनना वाकई यह अद्भुत है। जहांगीर महल का नाम बदलने को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि जहांगीर यहां कभी आया ही नहीं था। महल तो राजा वीर सिंह ने बनवाया था, जिसे सूर्यदेव मंदिर कहते हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद अब राज्य में ओरछा के महलों के नामकरण और उनके इतिहास को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है। सीएम के बयान पर कांग्रेस का भी बयान सामने आया है। बुंदेलखंड की धरती पर स्थित ओरछा का जहांगीर महल ऐतिहासिक है। इसे बुंदेला शासक वीर सिंह देव और मुगल बादशाह जहांगीर के रिश्तों से जोड़कर देखा जाता है। इतिहास के अनुसार, वीर सिंह देव और मुगल शहजादे सलीम यानी जहांगीर के बीच राजनीतिक संबंध थे। 1602 में अबु फजल की हत्या के बाद दोनों के रिश्ते और मजबूत हुए। 1605 में सलीम जहांगीर के नाम से मुगल बादशाह बने और वीर सिंह देव ओरछा के शासक।
यहीं से जहांगीर महल की कहानी शुरू होती है। सरकारी पर्यटन सामग्री में दर्ज विवरणों के अनुसार, वीर सिंह देव ने जहांगीर के ओरछा आगमन की याद में इस महल का निर्माण कराया। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल इन्क्रेडिबल इंडिया पर भी जहांगीर के ओरछा आने और वीर सिंह द्वारा उनके सम्मान में महल बनवाने का उल्लेख है। महल में बुंदेली और मुगल शैली का मेल देखने को मिलता है। महल में विशाल प्रवेश द्वार, गुंबद, छतरियां, झरोखे और बहुमंजिला संरचना भी मौजूद है। इमारत उस दौर की स्थापत्य शैली को दिखाती है, जब बुंदेला और मुगल के बीच राजनीतिक रिश्ते और टकराव भी होता था। बुंदेलखंड सिर्फ पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बुंदेलखंड की राजनीति का भी प्रतीक है, जहां रिश्ते सत्ता की दिशा तय करते थे। वीर सिंह देव और जहांगीर के रिश्ते हों या फिर मुगल और बुंदेला राजाओं के बीच बदलते समीकरण, ओरछा का इतिहास कई परतों में दर्ज है। सीएम ने अब इस पर सवाल उठाए हैं। ओरछा दौरे के दौरान सीएम ने कहा था, जहांगीर महल को राजा वीर सिंह देव ने बनवाया था और इसे सूर्य मंदिर कहते हैं। जहांगीर कभी ओरछा आए ही नहीं थे। मेरा इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं है।
इस पर राजनीति शुरू हो गयी। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आपको इसलिए नहीं चुना कि आप गड़े मुर्दे उखाड़ें, इधर-उधर झूठे इतिहास के तथ्य प्रस्तुत करें। आपको प्रदेश, किसान, छात्र, युवाओं के कल्याण के लिए चुना है। जिस तरह से हाल ही में युवाओं ने केंद्रीय मंत्री को सबक सिखाया है, आप इधर उधर की बात करेंगे तो आपकी भी बारी आ जाएगी।
राजा वीर सिंह जू देव बुंदेला का शासन 1605 से 1627 ई. माना जाता है। वह बुंदेलखंड के ओरछा राज्य के सबसे प्रतापी और प्रसिद्ध राजा थे। उनके पिता राजा मधुकर शाह बुंदेला थे। उनके शासनकाल को बुंदेला वंश के इतिहास का स्वर्ण काल कहा जाता है, क्योंकि कला और वास्तुकला का अभूतपूर्व विकास हुआ था। राजकुमार सलीम (मुगल बादशाह जहाँगीर) के साथ उनकी घनिष्ठ मित्रता थी। जहाँगीर के कहने पर ही वीर सिंह देव ने अकबर के प्रिय दरबारी और सलाहकार अबुल फजल की हत्या की थी, जहाँगीर के राजा बनने के बाद वीर सिंह देव को ओरछा की गद्दी मिली और उन्हें मुगल दरबार में विशेष सम्मान प्राप्त हुआ। जहाँगीर के स्वागत के लिए ओरछा में इस विशाल महल का निर्माण कराया गया था। राजा वीर सिंह देव को भवन निर्माण का बहुत शौक था। उन्होंने अपने काल में कई भव्य किलों, महलों और तालाबों का निर्माण करवाया। दतिया में प्रसिद्ध नौखंडा महल या वीर सिंह पैलेस का निर्माण भी इन्होंने ही करवाया था। राजा वीर सिंह देव के 12 पुत्र थे। उनकी मृत्यु के बाद उनके सबसे बड़े पुत्र झुझार सिंह ओरछा के अगले शासक बने। उनके पुत्रों में हरदौल भी शामिल थे, जिन्हें बुंदेलखंड में आज भी लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। वीर सिंह जू देव जब दतिया के जागीरदार थे तब दतिया में ही हरदौल का जन्म सन 1608 मे हुआ था। इनकी एक बहिन कुंज कुंअर थी जिनका विवाह बेरछा के सुजान राय परमार से हुआ था इन्हें महराजा वीर सिंह ने अपने राज्य के दो गांव पचोखरा और खडउआ (दतिया-इन्दरगढ़ के) जागीर में दिए थे। हरदौल की शादी दुर्गापुर के परमार वंश की हिमांचल कुंअरि से हुई थी।
हरदौल की बहिन कुंजकुंअंरि जिन्हें कुंजीवती भी कहा जाता है की रुपुत्री रुरतन कुँअर का विवाह रुमान सिंह आत्मज प्रीतम सिंह निवासी खडउआ के साथ होना तय हुआ था जिसमें रुहरदौल के भात देने की कथा प्रसिद्ध है जिसके बाद हरदौल लोक देवता की तरह प्रसिद्ध हुए थे।

(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button