पंजाब के सांसद की अनुकरणीय पहल

राजनीति जन सेवा है। ग्राम प्रधान से लेकर एमएलए, एमपी तक जनता के प्रतिनिधि के रूप में चुने जाते हैं। विधान परिषदों में सदस्य इन चुने गये प्रतिनिधियों के माध्यम से आते हैं। इसी तरह राज्य सभा में भी सांसद अप्रत्यक्ष रूप से ही जनता के प्रतिनिधि होते हैं। जन सेवा इनका ऐच्छिक विषय है। पुलिस या मिलेट्री की तरह खतरा महसूस करके जनसेवा नहीं की जा सकती। इसके बावजूद जन प्रतिनिधि कदम-कदम पर खतरा महसूस करते हैं और सुरक्षा बल साथ लेकर चलते हैं। इससे जनता की सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ता है। पंजाब में सत्ता रूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य बलवीर सिंह सीचेवाल ने गत दिनों (29 जुलाई) एक अनुकरणीय पहल की है। उन्होंने राज्य के पुलिस निदेशक गौरव यादव को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि उनकी सुरक्षा में जो पुलिस कर्मी तैनात किये गये हैं, उनको पुलिस व्यवस्था की नियमित सेवा में वापस कर लें। उन्होंने डीजीपी से कहा कि चोरी और लूट की बढ़ती घटनाओं के कारण उनकी तुलना में आम लोगों की सुरक्षा की ज्यादा जरूरत है। आप सांसद बलवीर सिंह सीचेवाल की तरह सभी नेता अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को नियमित सेवा में भेज दें तो अपराध नियंत्रण में पर्याप्त पुलिस दल उपलब्ध हो सकेगा। पंजाब के राज्य सभा सदस्य की यह अनुकरणीय पहल है और इसे राजनीति का एक आदर्श अध्याय मानना चाहिये। नेताओं को जेड प्लस, जेड, वाय प्लस वाय और एक्स श्रेणी की सुरक्षा दी जाती है। सुरक्षा में लगाये गये कर्मियों का खर्च सरकार वहन करती है। इस प्रकार सरकार पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ता है। हर साल नेताओं की सुरक्षा पर 100 अरब से ज्यादा खर्च हो जाता है। उधर, राज्य सरकारें कर्ज के बोझ से दबी हैं। विकास कार्य रुक जाते हैं। पंजाब की भगवंत मान सरकार को ही ले लें तो वहां सरकार ने फंड की कमी के चलते राज्य कर्मचारियेां का डीए बढ़ाने से मना कर दिया। मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने कहा सरकार जो विज्ञापन दे रही है, उसे रोक दे और एक महीने के अंदर महंगाई भत्ता दें।
पंजाब में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल ने पंजाब पुलिस प्रमुख से अपने छह सुरक्षाकर्मियों को वापस बुलाने और उन्हें पुलिस स्टेशनों में तैनात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चोरी और लूट की बढ़ती घटनाओं के कारण उनकी तुलना में आम लोगों को सुरक्षा की अधिक जरूरत है। डीजीपी गौरव यादव को लिखे पत्र में सांसद सीचेवाल ने अनुरोध किया कि उनके साथ तैनात छह सुरक्षाकर्मियों में से तीन को लोहियान खास पुलिस स्टेशन और बाकी तीन को कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी पुलिस स्टेशन में तैनात किया जाए। सीचेवाल ने अपने पत्र में लिखा, आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूं कि जालंधर जिले के लोहियान इलाके और सुल्तानपुर लोधी में पवित्र बेइन (नदी) के किनारे लूट की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि मेरी सुरक्षा के लिए तैनात छह सुरक्षाकर्मियों में से तीन को लोहियान खास पुलिस स्टेशन और तीन को सुल्तानपुर लोधी पुलिस स्टेशन में भेज दिया जाए। इन इलाकों में चोरी, लूट और नशीली दवाओं के दुरुपयोग की बढ़ती घटनाओं को चिंताजनक बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना बहुत जरूरी है।
सांसद ने बताया कि उनके पैतृक गांव सीचेवाल में एक ही रात में चोरी की आठ घटनाएं हुईं, जिनमें बिजली के तार चोरी हो गए। उन्होंने पवित्र बेइन के आसपास कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की, जहां गुरु नानक देव से जुड़ी ऐतिहासिक जगह पर माथा टेकने के लिए रोजाना हजारों श्रद्धालु आते हैं। उन्होंने कहा, चोरी और अन्य आपराधिक गतिविधियों की बढ़ती घटनाओं ने श्रद्धालुओं के बीच डर का माहौल बना दिया है। किसी सम्मानित धार्मिक स्थल के आसपास ऐसी घटनाएं बेहद परेशान करने वाली हैं। सीचेवाल ने कहा कि उन्होंने शुरू में सुरक्षा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, यह कहते हुए कि उन्हें कोई खतरा नहीं है, लेकिन उनकी अनिच्छा के बावजूद सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए। उन्होंने डीजीपी से तुरंत अपनी सुरक्षा हटाने और उन छह सुरक्षाकर्मियों को दो पुलिस स्टेशनों में फिर से तैनात करने का अनुरोध किया।
देश की सबसे उच्च और कड़ी श्रेणी की वीवीआईपी सुरक्षा व्यवस्था है, जो उन विशिष्ट व्यक्तियों को दी जाती है जिनकी जान को अत्यधिक या गंभीर खतरा होता है। इस सुरक्षा घेरे में कुल 36 से 55 तक सुरक्षाकर्मी तैनात होते हैं। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड और एसपीजी के 10 से अधिक कमांडो शामिल होते हैं, जो अत्याधुनिक हथियारों से लैस और मार्शल आर्ट में माहिर होते हैं। यह सुरक्षा तीन स्तरों पर काम करती है। पहले घेरे में एनएसजी कमांडो, दूसरे में अन्य सुरक्षा अधिकारी और तीसरे घेरे में सीआरपीएफ या आईटीबीपी के जवान तैनात रहते हैं। सुरक्षा प्राप्त व्यक्ति के काफिले में एस्कॉर्ट और पायलट वाहन की सुविधा भी दी जाती है यह सुरक्षा आमतौर पर देश के मुख्यमंत्रियों, बड़े केंद्रीय मंत्रियों, सुप्रीम कोर्ट व हाई कोर्ट के न्यायाधीशों, प्रमुख राजनेताओं और अत्यधिक खतरे वाले चुनिंदा प्रसिद्ध नागरिकों को दी जाती है।
2014 में दायर हुई एक आरटीआई के जवाब में सरकार ने कहा था कि इन सुरक्षा घेरों का खर्चा राज्य सरकार के खाते में जाता है। सुरक्षा पाने वाला व्यक्ति जिस भी राज्य में आमतौर पर रहता है, उसे मिलनी वाली सुरक्षा का खर्च वो ही राज्य सरकार उठाती है। वहीं इस तरह की व्यवस्था में कई सारी एजेंसियां शामिल होती हैं। इसलिए सुरक्षा कवर पर होने वाले खर्च का सटीक आंकड़ा नहीं बताया जा सकता है।
देश के प्रधानमंत्री को देश की सबसे उन्नत और कड़ी सुरक्षा यानी विशेष सुरक्षा समूह की सुरक्षा मिलती है। रिपोर्ट्स और पूर्व में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, पीएम मोदी की सुरक्षा पर प्रतिदिन लगभग 1.17 करोड़ से 1.62 करोड़ तक का खर्च आता है। रक्षा पर होने वाले कुल खर्च में जवानों का वेतन, अत्याधुनिक हथियार, बुलेटप्रूफ गाड़ियां, काफिला, और यात्रा के दौरान का प्रशासनिक खर्च शामिल होता है।
नेताओं पर हर साल जनता की गाढ़ी कमाई के 100 अरब रुपए से ज्यादा खर्च किए जाते हैं। देश में कुल 4120 एमएलए और 462 एमएलसी हैं यानि कुल 4582 विधायक। एक विधायक पर वेतन भत्ता मिलाकर हर महीने 2 लाख का खर्च होता है यानि 4582 विधायकों पर हर महीने 91 करोड़ 64 लाख का खर्च और हर साल 1100 करोड़ का खर्च।’’ ’भारत में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों को मिलाकर कुल 776 सांसद हैं। सांसदों को वेतन भत्ता मिलाकर हर महीने 5 लाख रुपए दिए जाते हैं। इस हिसाब से 776 सांसदों के वेतन पर हर महीने 38 करोड़ 80 लाख रुपए खर्च होते हैं और हर साल देश के 465 करोड़ 60 लाख रुपया खर्च होता है।’’ अब गौर कीजिए विधायकों और सांसदों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के वेतन पर एक विधायक की सुरक्षा में 7 पुलिसकर्मी तैनात होते हैं। एक पुलिसकर्मी का वेतन 25 हजार रुपए महीना, तो 7 पुलिसकर्मियों के वेतन पर हर महीने खर्च 1 लाख 75 हजार रूपये। इस हिसाब से 4582 विधायकों की सुरक्षा का सालाना खर्च 9 अरब 62 करोड़ 22 लाख है। सांसदों की सुरक्षा पर हर साल 164 करोड़ रूपये खर्च होते हैं। जिन नेताओं
को श्रेणी की सुरक्षा मिली है यानि मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, प्रधानमंत्री की
सुरक्षा के लिए लगभग 16000 जवान अलग से तैनात हैं। इस सुरक्षा पर
हर साल करीब 776 करोड़ रुपए खर्च होते हैं।
(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



