भारत में छिपे हुए गद्दार

भारत को विदेशी दुश्मनों से पहले देश के अंदर छिपे गद्दारों से सख्ती से निपटना होगा। इसका ताजा उदाहरण नौ सेना जवान हैं। उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) ने भारतीय नौसेना के एक जवान को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि जवान ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी को भारतीय नौसेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और तस्वीरें साझा की थीं। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है और पूरे मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 24 वर्षीय आदर्श कुमार उर्फ लकी के रूप में हुई है। वह उत्तर प्रदेश के आगरा जिले का निवासी है।
आदर्श कुमार भारतीय नौसेना में लांस नायक के पद पर तैनात था और उसकी पोस्टिंग केरल के कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसैनिक कमान में थी। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के संपर्क में आने और संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।उत्तर प्रदेश एटीएस को इस मामले में शुरुआती जानकारी खुफिया इनपुट के माध्यम से मिली थी। इनपुट में संकेत मिला था कि एक व्यक्ति पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसी के एक हैंडलर के संपर्क में है और वह भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां साझा कर रहा है। इस सूचना के आधार पर एटीएस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की और संदिग्ध व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक तथा भौतिक निगरानी में रखा।जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि संदिग्ध व्यक्ति आदर्श कुमार है, जो आगरा जिले के कागरोल थाना क्षेत्र के चितापुर गांव का रहने वाला है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आदर्श कुमार का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के एक एजेंट से संपर्क स्थापित हो गया था और वह लंबे समय से उसके साथ बातचीत कर रहा था।एटीएस के अनुसार, आरोपी ने अपने बैंक खाते से कथित रूप से उस हैंडलर को पैसे भी ट्रांसफर किए थे। इसके अलावा उस पर भारतीय नौसेना से जुड़े रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण युद्धपोतों की तस्वीरें और अन्य संवेदनशील जानकारियां साझा करने का भी आरोप है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की जानकारी अगर दुश्मन देश के हाथ लगती है तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी द्वारा साझा की गई जानकारी का दायरा कितना बड़ा है और वह कब से पाकिस्तान के संपर्क में था, इसका पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस जासूसी नेटवर्क में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है या नहीं। सुरक्षा एजेंसियां आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरणों, संचार रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की गहन जांच कर रही हैं। इससे यह पता लगाया जाएगा कि उसने किन-किन जानकारियों को साझा किया और उसका नेटवर्क कितना व्यापक था। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दुश्मन देशों की खुफिया एजेंसियां किस तरह से भारत की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने की कोशिश करती रहती हैं। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के कारण समय रहते इस मामले का खुलासा हो गया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



