अमेरिका के मुकाबले इस बार ईरान का पलड़ा भारी

पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच पीस डील को लेकर दूसरे राउंड की बैठक होने जा रही है। सब कुछ ठीक रहता है तो इस मीटिंग में दोनों देश के बीच समझौते पर सहमति बन सकती है। इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्रस्ताव की मानें तो समझौते में अमेरिका के मुकाबले इस बार ईरान का पलड़ा ज्यादा भारी है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि वे 2015 में ओबामा शासन से बेहतरीन समझौता करेंगे।
अमेरिकी आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक पाकिस्तान की मदद से जो प्रस्ताव तैयार हुआ है, उसमें ईरान से 20 साल के लिए युद्धविराम की बात कही गई है। यानी अगले 20 साल तक ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध नहीं होगा। इस दौरान ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश भी नहीं करेगा। ईरान की कोशिश इसे 10 साल तक समेटने की है। ओबामा के साथ जो समझौता हुआ था, उसमें यह डेडलाइन 15 साल के लिए थी। 20 साल तक ईरान यूरेनियम संवर्धन का काम नहीं करेगा। इस दौरान ईरान पर अमेरिका का कोई भी हमला नहीं होगा। 2015 में जो समझौता हुआ था, उसमें 15 साल का डेडलाइन रखा गया था। ईरान के 200 अरब डॉलर की राशि को अमेरिका अनफ्रीज करेगा। ईरान की मांग समझौते के तुरंत बाद 27 अरब डॉलर को अनफ्रीज कराने की है। इन पैसों का इस्तेमाल राहत एवं बचाव के लिए किया जाएगा। अब तक अमेरिका ईरान को किसी भी तरह के यूरेनियम को रखने की इजाजत नहीं दे रहा था, लेकिन नए प्रपोजल के अनुसार ईरान ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए यूरेनियम का इस्तेमाल कर सकता है।
दोनों के बीच 2 चीजों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पहला, होर्मुज में पर्मानेंट टोल बूथ बनेगा या नहीं और दूसरा यूरेनियम का खात्मा अमेरिका में होगा या ईरान में। ईरान चाहता है कि यूरेनियम को उसी की जमीन पर पतला किया जाए। ईरान की तरफ से पीस डील का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद बाघेर गालिबफ का कहना है कि अमेरिका समझौते को अपनी जीत बताने की कोशिश कर रहा है। हम इन सबके बहकावे में नहीं आने वाले हैं। न तो हम पर इसका कोई दबाव है। हम अपने हिसाब से समझौता करेंगे। समझौता वही होगा, जो ईरान के हित में है।



