भारत में ब्लू इकोनॉमी की नई लहर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इजराइल यात्रा के दौरान भारत और इजराइल के बीच मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ, जिसने दोनों देशों की ब्लू इकोनाॅमी को नई दिशा दी है। गत 26 फरवरी को हस्ताक्षरित इस समझौता ज्ञापन पर भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर और इजराइल की ओर से कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मंत्री एवी डिख्टर ने दस्तखत किए। यह केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की ब्लू इकोनॉमी और तटीय विकास की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। इस समझौते का उद्देश्य भारत के मत्स्य और एक्वाकल्चर क्षेत्र को तकनीक-आधारित, टिकाऊ और जलवायु-अनुकूल मॉडल की ओर ले जाना है। आधुनिक रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), जल पुनः उपयोग तकनीक, स्वचालित खेती और डेटा-आधारित प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में सहयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। विशेष रूप से जल-संकट और जलवायु-प्रभावित क्षेत्रों के लिए जैव-सुरक्षित और लचीले मॉडल विकसित करने पर बल दिया गया है।
भारत की लंबी तटीय रेखा और विशाल अंतर्देशीय जल संसाधन लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं। ऐसे में यह साझेदारी सीधे तौर पर मछुआरा समुदायों और छोटे किसानों को लाभ पहुँचा सकती है। रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक अनुसंधान पर विशेष ध्यान देकर जलीय जीवों में होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करने, नई चिकित्सकीय तकनीकों और रोग-प्रतिरोधक उपायों को बढ़ावा देने की भी योजना है। इससे उत्पादन हानि कम होगी और निर्यात क्षमता में सुधार आएगा। समझौते का एक महत्वपूर्ण आयाम समुद्री कृषि यानी मैरिकल्चर और समुद्री शैवाल आधारित प्रणालियों का विकास है। एकीकृत बहु-ट्रॉफिक एक्वाकल्चर (आईएमटीए) मॉडल के तहत समुद्री शैवाल को जैव-फिल्टर और वैकल्पिक आहार स्रोत के रूप में उपयोग करने की दिशा में संयुक्त अनुसंधान होगा। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगा, बल्कि पोषण सुरक्षा और आय विविधीकरण के नए अवसर भी खोलेगा। क्षमता निर्माण और ज्ञान आदान-प्रदान इस साझेदारी के प्रमुख स्तंभ हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम, एक्सपोजर विजिट और विशेषज्ञ स्तर की बैठकों के माध्यम से अधिकारियों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ा जाएगा। स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों और उद्योग के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को भी प्रोत्साहन मिलेगा। इससे जल पुनर्चक्रण, उन्नत उत्पाद विकास और मूल्य संवर्धन जैसे क्षेत्रों में नए अवसर बनेंगे। इस सहयोग को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया जाएगा, जो वार्षिक समीक्षा और कार्ययोजनाओं की निगरानी करेगा। दोनों देश वैकल्पिक रूप से बैठकें आयोजित करेंगे और नामित अधिकारी समन्वय का दायित्व संभालेंगे। यह संरचना सुनिश्चित करेगी कि समझौता केवल कागज तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दे। भारत-इजराइल का यह समझौता दर्शाता है कि द्विपक्षीय संबंध अब रक्षा और तकनीक से आगे बढ़कर कृषि, खाद्य सुरक्षा और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भी गहराई प्राप्त कर रहे हैं। ब्लू इकोनॉमी की दिशा में यह कदम न केवल आर्थिक अवसरों का विस्तार करेगा, बल्कि जलवायु-संतुलित और पर्यावरण-अनुकूल विकास की राह भी मजबूत करेगा।
(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



