ईरान पर हमला व बदला

अमेरिका व इजरायली अब ईरान को पूरी तरह तबाह कर देना चाहते हैं। तेहरान के अस्पतालों पर भी हमला हो रहा है। उधर, ईरान भी बदले मंे पूरी ताकत झोंक रहा है। कुवैत मंे अमेरिका का घातक एफ-15 लड़ाकू विमान क्रैश हुआ। ईरान का दावा है कि हमने उसे मार गिराया। ईरान की राजधानी तेहरान की रात एक बार फिर धमाकों और धुएँ से भर उठी। उत्तरी हिस्से में स्थित गांधी अस्पताल की इमारत पर हुए हमले की खबर ने न केवल स्थानीय लोगों को, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी झकझोर दिया। अस्पताल, जहाँ जीवन बचाने की कोशिशें चलती हैं, जब युद्ध की चपेट में आ जाए, तो सवाल सिर्फ रणनीति का नहीं, इंसानियत का भी होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसुस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, “स्वास्थ्य कोई लक्ष्य नहीं है।” उन्होंने अस्पताल को हुए नुकसान की खबरों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएँ अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत संरक्षित हैं और उन्हें किसी भी संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन घटना की पुष्टि करने में जुटा है, पर शुरुआती रिपोर्टों ने ही चिंता बढ़ा दी है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह हमला संयुक्त अमेरिकी-इजराइली सैन्य अभियान के दूसरे दिन हुआ। इजराइल ने कहा है कि वह तेहरान के “हृदय” तक अपनी कार्रवाई ले जा रहा है। इससे एक दिन पहले ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या की खबर ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुँचा दिया था।ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी ने दावा किया कि अस्पताल “जायनिस्ट-अमेरिकी हवाई हमलों” की चपेट में आया। वहीं फार्स न्यूज एजेंसी, मिजान न्यूज एजेंसी और तसनीम न्यूज एजेंसी द्वारा साझा किए गए वीडियो में अस्पताल के भीतर बिखरा मलबा, टूटे शीशे और अफरा-तफरी का दृश्य दिखा। कुछ क्लिप्स में नर्सें शिशुओं को गोद में उठाकर वार्ड खाली कराती नजर आईं, तो बाहर लोग अपने परिजनों को पुकारते दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गांधी स्ट्रीट इलाके में स्थित इस अस्पताल को भारी क्षति पहुँची और मरीजों को तत्काल बाहर निकाला गया। देर रात तक उत्तरी तेहरान में धमाकों की आवाजें गूंजती रहीं। धुएँ के गुबार और सायरनों के बीच शहर के लोगों के लिए यह सिर्फ एक और सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि असुरक्षा का गहरा अनुभव था। युद्ध में अस्पतालों पर हमले अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के खिलाफ माने जाते हैं। स्वास्थ्य संस्थान न केवल इलाज के केंद्र होते हैं, बल्कि संकट के समय उम्मीद के प्रतीक भी बन जाते हैं। जब वही इमारतें निशाने पर आ जाएँ, तो समाज के सबसे कमजोर लोग-बीमार, बुजुर्ग, बच्चे-सबसे पहले प्रभावित होते हैं। तेहरान की इस घटना ने दुनिया को याद दिलाया है कि संघर्ष चाहे कितना भी तीखा क्यों न हो, स्वास्थ्य और मानव जीवन की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। युद्ध की आग में जब अस्पतालों की रोशनी बुझने लगे, तो वह केवल एक शहर की नहीं, पूरी मानवता की हार होती है।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



