2035 तक भारत का होगा अपना स्पेस स्टेशन

भारत अपने स्पेस स्टेशन पर काम कर रहा है। 2035 तक भारत का अपना स्पेस स्टेशन होगा। इसरो चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि भारत 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहा है और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को मंजूरी मिल चुकी है।
एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत गगनयान और प्रस्तावित स्पेस स्टेशन पर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि स्पेस स्टेशन के पहले मॉड्यूल को मंजूरी मिल चुकी है और 2035 तक अपना स्पेस स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य है। अगर भारत ऐसा कर पाता है तो शायद चीन के बाद दूसरा ऐसा देश हो, जिसका अपना स्पेस स्टेशन होगा। अभी सिर्फ दो ही स्पेस स्टेशन हैं। एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है, जिसे 15 देशों ने मिलकर तैयार किया है। दूसरा है चीन का तियांगोंग स्पेस स्टेशन, जिसे उसने 2021 में स्थापित किया था।
आसान शब्दों में कहें तो स्पेस स्टेशन अंतरिक्ष में तैरती हुई एक हाई-टेक साइंटिफिक लैब है, जहां वैज्ञानिक महीनों रहकर रिसर्च करते हैं। इसमें बीच में बेलनाकार डिब्बे होते हैं जिन्हें मॉड्यूल कहते हैं। इनके दोनों तरफ विशाल चमकीले सोलर पैनल्स लगे होते हैं, जो सूरज की रोशनी से बिजली बनाते हैं। ये साइंस लैब की तरह ही होता है। इसमें वह सब कुछ होता है जो जमीन पर बनी किसी लैब में होता है।
अभी जो नासा का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है, वह 6 बेडरूम वाले घर से भी बड़ा है। इसमें 6 स्लीपिंग क्वार्टर, दो बाथरूम, एक जिम और एक खिड़की है। इसमें एक समय में 6 अंतरिक्ष यात्री रह सकते हैं। जरूरत पड़ने पर 11 यात्री तक रह सकते हैं। इसे बनाने में लगभग 150 अरब डॉलर का खर्च आया है। इस स्पेस स्टेशन में कुल 16 मॉड्यूल्स हैं, जो आपस में जुड़े हैं। इनमें से कुछ में लैब हैं, कुछ लिविंग स्पेस है तो कुछ स्टोरेज के लिए। इसके अंदर कुल 4 लैब्स बनी हैं, जिनमें अमेरिका, जापान, रूस और यूरोप के अंतरिक्ष यात्री रिसर्च और एक्सपेरिमेंट करते हैं।
नासा के मुताबिक, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन एक सिरे से लेकर दूसरे सिरे तक 356 फीट लंबा है। इसका वजन लगभग 4.20 लाख किलो है। अकेले सोलर पैनल ही एक एकड़ की जगह घेरते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में बिजली के लिए लगभग 13 किलोमीटर लंबी तो सिर्फ वायरिंग ही है। स्पेस स्टेशन से एक बार में 8 अंतरिक्ष यान जुड़ सकते हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पृथ्वी से लगभग 402 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। यह हमेशा चक्कर लगाता रहता है। यह स्पेस स्टेशन पृथ्वी की 90 फीसद आबादी वाले इलाकों के ऊपर से गुजरता है।



