शेख हसीना को सत्ता से हटाने वाली एनसीपी का गठबंधन टूटा

बांग्लादेश पिछले साल शेख हसीना को सत्ता से बेदखल करने में प्रमुख भूमिका निभाने वाली छात्रों के नेतृत्व में गठित नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) का आगामी राष्ट्रीय चुनावों के लिए इस्लामी रूढ़िवादी पार्टी जमात-ए- इस्लामी के साथ गठबंधन टूट चुका है। सीट-बंटवारे को लेकर दोनों दल अलग-थलग पड़ गए हैं। ऐसे में बांग्लादेश में होने वाले चुनावों पर भी गहरे आशंका के बादल मंडराते जा रहे हैं।नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) और जमात के बीच सीटों के बंटवारे और मतों में भिन्नता के चलते यह गठबंधन टूट गया। इसके बाद एनसीपी की नेता तसनीम जारा ने पार्टी की उम्मीदवारी ठुकराने की घोषणा की है और अगले साल फरवरी में होने वाले राष्ट्रीय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। तसनीम जारा ने कहा कि मेरा सपना एक राजनीतिक पार्टी के मंच से संसद में प्रवेश करके अपने निर्वाचन क्षेत्र और देश की जनता की सेवा करना था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के कारण मैंने किसी विशेष पार्टी या गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में चुनाव न लड़ने का फैसला किया है। जारा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि मैंने आपसे और देश की जनता से वादा किया था कि मैं आपके लिए और नई राजनीतिक संस्कृति के निर्माण के लिए लड़ूंगी। परिस्थितियां चाहे जो हों, मैं उस वादे को निभाने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं। इसलिए इस चुनाव में मैं ढाका-9 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ूंगी। एनसीपी के शीर्ष नेताओं में लगातार फूट पड़ रही है। तसनीम जारा के बाद एनसीपी की एक अन्य वरिष्ठ नेता समंता शर्मिन ने भी जमात-ए-इस्लामी के साथ एनसीपी के गठबंधन का विरोध करते हुए बयान जारी किया है। उनका कहना है कि बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी विश्वसनीय सहयोगी नहीं है। मुझे लगता है कि जमात-ए-इस्लामी के साथ उसकी राजनीतिक स्थिति और विचारधारा को देखते हुए-किसी भी तरह का सहयोग या समझौता करने से एनसीपी को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।



