बिहार में चूड़ा-दही भोज की सियासत

भारत मंे मकर संक्रांति विशेष पर्व है। इसी दिन से भगवान भास्कर दक्षिण दिशा से उत्तर दिशा में प्रयाण करते हैं और खुशी का प्रतीक माना जाने वाला दिन बड़ा होने लगता है जबकि दुःख का प्रतीक रात्रि छोटी होती जाती है। इस दिन से मंगल कार्य भी प्रारम्भ होते हैं। हमारे देश के विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग रूप से मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश के लोग खिचड़ी खाकर और खिलाकर यह त्योहार मनाते हैं तो बिहार मंे दही-चूड़ा भोज होता है। इस त्योहार के माध्यम से सियासत भी होने लगी है। बिहार मंे इस बार दही-चूड़ा भोज की जबर्दस्त सियासत देखने को मिल सकती है। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अलग पार्टी बना ली है लेकिन राज्य के विधानसभा चुनाव मंे उनको एक भी विधायक नहीं मिल पाया। वह भी हर साल दही-चूड़ा भोज करते हैं। इस बार भी करेंगे। चूड़ा भोज से पहले उनकी मुलाकात अलग-अलग दलों के नेताओं से हुई है। इसके सियासी मतलब भी निकाले जा रहे हैं। उधर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे की भी सक्रिय राजनीति मंे एन्ट्री होने की संभावना जतायी जा रही है। इसके लिए भी दही-चूड़ा भोज से बेहतर अन्य कोई अवसर नहीं हो सकता।बिहार का जंगल राज कब तक!
इस साल भी तेज प्रताप यादव मकर संक्रांति पर चूड़ा-दही भोज का आयोजन करने वाले हैं। मंत्री दीपक प्रकाश और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से तेज प्रताप यादव की मुलाकात के पीछे यही चूड़ा-दही भोज असली वजह है। तेज प्रताप यादव चूड़ा-दही भोज के लिए अलग-अलग नेताओं को आमंत्रित कर रहे हैं। बताते चलंे कि बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर होने वाला चूड़ा-दही भोज नेताओं के मेल-जोल का एक बड़ा मौका बनता है। लालू यादव भी अपने समय में चूड़ा-दही भोज का आयोजन किया करते थे। इस भोज में अपने खेमे में नेताओं को एकजुट रखकर शक्ति प्रदर्शन भी किया जाता था। यह त्योहार हर साल जनवरी के महीने में आता है और इस दिन बिहार के लोग बड़े उत्साह के साथ दही, चूड़ा (चिवड़ा/पोहा), और तिलकुट का सेवन करते हैं। इस अवसर पर, यह भोजन न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि इसे सौभाग्य का प्रतीक भी माना जाता है।
बिहार की राजनीति में भी इस दिन का विशेष महत्व है, जहाँ नेता अक्सर मिलन और एकजुटता का संदेश देने के लिए दही-चूड़ा भोज का आयोजन करते हैं। सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने बीते कुछ दिनों से अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। बिहार चुनाव में जनशक्ति जनता दल बनाकर चुनाव लड़ने वाले तेज प्रताप यादव ने 7 जनवरी को डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से मुलाकात की। इससे एक दिन पहले तेज प्रताप यादव ने उपेंद्र कुशवाहा के बेटे और मंत्री दीपक प्रकाश से मुलाकात की थी। तेज प्रताप यादव ने इन दोनों मंत्रियों से हुई मुलाकात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की। इससे पहले राबड़ी देवी के जन्मदिन के दिन तेज प्रताप राबड़ी आवास भी पहुंचे थे।
नीतीश बने 10वीं बार बिहार के सीएम
दीपक प्रकाश और डिप्टी सीएम विजय सिन्हा से तेज प्रताप यादव की मुलाकात के पीछे बिहार की राजनीति की सालों पुरानी परंपरा है। दरअसल बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के मौके पर पटना में चूड़ा-दही भोज के आयोजन की पुरानी परंपरा है। बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय सिन्हा से मुलाकात के बाद तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर लिखा, मंत्री के सरकारी आवास पर पहुंचकर आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर 26 स्ट्रैंड रोड स्थित मेरे सरकारी आवास पर दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम हेतु आमंत्रित किया। साथ ही विजय सिन्हा को नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामना दिया। मंत्री दीपक प्रकाश से मुलाकात के बाद तेज प्रताप ने सोशल मीडिया पर लिखा था- आज पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश से उनके सरकारी आवास पर पहुंचकर आगामी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर 26 ड स्ट्रैंड रोड स्थित मेरे सरकारी आवास पर दही-चूड़ा भोज कार्यक्रम हेतु आमंत्रण पत्र देकर आमंत्रित किया। साथ ही नए जिम्मेदारियों हेतु दीपक प्रकाश जी को बधाई दिया।
बिहार में चूड़ा-दही के भोज के साथ-साथ राजनीति भी लगातार जारी रहती है। बीते साल राजनीतिक दलों की ओर से सियासी चूड़ा-दही भोज का आयोजन हो रहा था। चिराग पासवान ने भी अपने आवास पर चूड़ा-दही का भोज दिया था। इसमें कई दलों के नेता पहुंचे मुख्यमंत्री के जाने को लेकर भी काफी विवाद हुआ। वहीं, पशुपति पारस ने अपने आवास पर चूड़ा-दही का भोज दिया था, जिसमें राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेज प्रताप यादव पहुंचे, जिससे राजनीतिक कयासबाजी और माहौल तेज हो गया था।
इन दिनों बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर भी चल रही अटकलों के बीच उनके बेटे निशांत कुमार के राजनीति में सक्रिय होने की मांग पार्टी के भीतर लगातार जोर पकड़ती जा रही है। विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नाम पर मिले ऐतिहासिक जनादेश के बाद तस्वीरों में दिखे निशांत कुमार को पार्टी में भूमिका देने पर भी मंथन चल रहा है। जेडीयू सूत्रों के अनुसार इस साल मार्च में दिल्ली में होने वाले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में भूमिका को लेकर कोई संकेत दिया जा सकता है।
पिछले साल विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद ही निशांत कुमार सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखने लगे हैं। वे गांधी मैदान पर नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में भी
सबसे आगे की पंक्तियों में बैठे नजर आए थे।
नीतीश की बिहारियों को ईदी
पटना और अन्य जिलों में पोस्टर-बैनर, नारेबाजी और सोशल मीडिया अभियान चल रहे हैं। इनमें निशांत को पार्टी का भविष्य और उत्तराधिकारी बताते हुए 2026 को नेतृत्व परिवर्तन का साल बनाने की मांग हो रही है। पटना के चैक-चैराहों पर नीतीश सेवक, मांगे निशांत जैसे बैनर लगाए गए। जेडीयू समर्थक दावा कर रहे हैं कि करोड़ों लोग निशांत को सक्रिय राजनीति में देखना चाहते हैं। जेडीयू की जीत के बाद पटना के फ्रेजर रोड, बोरिंग रोड और गांधी मैदान जैसे इलाकों में नव वर्ष की नई सौगात, नीतीश सेवक, मांगे निशांत, 2026: निशांत का समय, चाचाजी के हाथों में सुरक्षित अपना बिहार। अब पार्टी के अगले जेनरेशन का भविष्य संवारे निशांत कुमार जैसे पोस्टर लगे। जेडीयू युवा ब्रिगेड और कार्यकर्ताओं ने भूख हड़तालें, पदयात्राएं और सोशल मीडिया कैंपेन चलाए। जेडीयू कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निशांत कुमार
की मौजूदगी में ही कहा, जदयू के कार्यकर्ता और नेता चाहते हैं कि निशांत कुमार पार्टी के लिए काम करें और इसे आगे बढ़ाएं। इस प्रकार बिहार की सियासत में बदलाव दिखाई पड़ सकते हैं। (अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर)



