क्या गठबंधन से दूर ही रहेंगी मायावती

गठबंधन की राजनीति के कई सियासी रंग दिखाई पड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश के लोग जब 15 जनवरी को खिचड़ी खाकर और खिचड़ी का दान कर मकर संक्रांति मना रहे थे, उसी समय बसपा प्रमुख और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अपना जन्मदिन मना रही थीं। मायावती ने इस अवसर पर गठबंधन को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिया। उन्हांेने कहा कि जब बसपा को भरोसा होगा कि गठबंधन करने वाली पार्टी अपना वोट बसपा को ट्रांसफर कराएगी, तभी गठबंधन के बारे में सोचेंगे। पत्रकारों से बात करते हुए मायावती ने कहा कि अभी गठबंधन की कोई जल्दबाजी नहीं है। इस प्रकार बसपा प्रमुख ने पक्ष और विपक्ष के सभी दलों को बता दिया कि उन्हंे किसी से परहेज नहीं है। सवाल सिर्फ वोटों का है। गिव एण्ड टेक की तर्ज पर ही बसपा गठबंधन करेगी। यूपी में चार बार सरकार बना चुकीं मायावती ने दूसरे दलों के बारे में अपना नजरिया भी बताया। अपने जन्मदिन के अवसर पर मायावती ने कहा कि कांगे्रस और भाजपा ने बसपा के मूवमेंट को रोकने का ही सदैव प्रयास किया है। इसी प्रकार सपा को लेकर उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासन में गुंडागर्दी चरम पर रहती थी। उन्हांेने स्टेट गेस्ट हाउस हमले की याद भी दिलाई। इस प्रकार मायावती ने तीनों प्रमुख राजनीतिक दलों की आलोचना की लेकिन एक चुनावी पांसा भी फेंका। अभी हाल मंे ब्राह्मण विधायकों की बैठक का विशेष रूप से जिक्र करते हुए उन्हांेने ब्राह्मणों के प्रति हमदर्दी दिखाई। यहां पर ध्यान देने की बात है कि 2007 में ब्राह्मणों के समर्थन से ही बसपा की स्वतंत्र रूप से सरकार बनी थी। उसी समय यह नारा लगा था कि हाथी नहीं गणेश हैं, ब्रह्मा विष्णु महेश हैं। मायावती मुस्लिम वोट बैंक को भी सहेजना चाहती हैं, इसीलिए बिहार में महिला डाक्टर का हिजाब उठाने पर नाराजगी जतायी थी।मायावती की चैंकाने वाली सियासत
बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने 15 जनवरी को अपने जन्मदिन पर पार्टी की उपलब्धियों और गठबंधन के बारे में बात की। मायावती ने कॉन्फ्रेंस में गठबंधन को लेकर साफ-साफ कहा कि जब बसपा को भरोसा होगा कि गठबंधन करने वाली पार्टी अपना वोट बसपा को ट्रांसफर कराएगी तब गठबंधन के बारे में सोचेंगे ,अभी इसमें बहुत टाइम लगेगा। मायावती ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात पर जोर दिया कि अभी गठबंधन की कोई जल्दबाजी नहीं है और इसके लिए सही समय का इंतजार किया जाएगा।मायावती ने अपने जन्मदिन पर बात करते हुए कहा, नव वर्ष के पहले महीने में ही आज के दिन पूरे देशभर में बसपा के लोग मेरा जन्मदिन पार्टी व मूवमेंट के हित में इसे जनकल्याणकारी दिवस के रूप में बहुत सादगी के साथ मनाते हैं। इस मौके पर पार्टी के वरिष्ठ लोग आमजन से जुड़ी उन जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताते हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश में बसपा की 4 बार मेरे नेतृत्व में रही सरकार में शुरू किया गया था। हमने उन्हें जमीनी हकीकत में लागू करके दिखाया था, जिससे उत्तर प्रदेश में गरीबों, मजदूरों, बेरोजगारों, किसानों, व्यापारियों, युवाओं, महिलाओं व अन्य मेहनतकश लोगों के साथ-साथ यहां दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के लोगों की भी स्थिति में काफी सुधार आया।
इस अवसर पर मायावती ने ब्राह्मण कार्ड भी खेला। मायावती ने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी बसपा के मूवमेंट को देश में रोकने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाती रहती हैं। उन्होंने विधानसभा सत्र के दौरान ब्राह्मण विधायकों की मीटिंग का जिक्र करते हुए कहा कि ब्राह्मणों ने अपनी चिंताओं पर स्वाभाविक रूप से चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बसपा ने हमेशा ब्राह्मणों को उचित सम्मान दिया है और ब्राह्मणों को किसी की चाटुकारिता या बहकावे की जरूरत नहीं है। मायावती ने ब्राह्मणों से अपील की कि वे भाजपा, सपा या कांग्रेस के बहकावे में न आएं। मायावती ने आश्वासन दिया कि यदि बसपा की सरकार बनी तो ब्राह्मणों को पूरा सम्मान मिलेगा, साथ ही क्षत्रियों, जाट समाज, दलितों और अल्पसंख्यकों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
मायावती ने कहा कि बसपा की सरकार में कभी मंदिर, मस्जिद या चर्च नहीं तोड़ा गया। सपा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सपा के शासन में गुंडागर्दी चरम पर रहती थी, उनके ऊपर स्टेट गेस्ट हाउस में हमला हुआ और दलितों पर अत्याचार हुए। वहीं, उन्होंने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि आम जनता खासकर दलित बहुत परेशान हैं, कानून-व्यवस्था बिगड़ी हुई है और जनता बसपा सरकार चाहती है। मायावती ने ईवीएम में धांधली का आरोप लगाते हुए मांग की कि बैलेट पेपर से चुनाव हों। उन्होंने देश में चल रहे एसआईआर के काम में भी गड़बड़ियों की शिकायतों का जिक्र किया।कांशीराम ने दलितों को दी सियासी ताकत
इस मौके पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी और उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री ने लिखा कि वे प्रभु श्रीराम से मायावती के दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ की कामना करते हैं। बसपा सुप्रीमो 15 जनवरी 2026 को 70 साल की हो गईं। उन्होंने 40 साल की उम्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाली थी। मायावती का जन्म दिल्ली के एक साधारण परिवार में हुआ था और राजनीति में आने से पहले वे एक शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम से प्रभावित होकर वे राजनीति में शामिल हुईं और जल्द ही उनकी मुख्य उत्तराधिकारी बनकर उभरीं।
मायावती ने कुल चार बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और वे भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनीं। उनके 2007 से 2012 के कार्यकाल को विशेष रूप से याद किया जाता है, क्योंकि उस दौरान उन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और सोशल इंजीनियरिंग (दलित और प्रशासनिक तौर पर मायावती को एक आयरन लेडी के रूप में देखा जाता है, जो अपनी सख्त कार्यशैली और बेहतरीन कानून-व्यवस्था के लिए जानी जाती थीं। उनके शासनकाल में उत्तर प्रदेश में कई एक्सप्रेसवे, पार्कों और स्मारकों का निर्माण हुआ, जिनमें डॉ. बी.आर. अंबेडकर और कांशीराम के सम्मान में बनाए गए विशाल स्थल शामिल हैं।
हालांकि, इन स्मारकों पर भारी खर्च को लेकर वे कई बार विवादों और आलोचनाओं के घेरे में भी रहीं। आज भी भारतीय राजनीति में वे करोड़ों वंचितों और दलितों के लिए आत्मसम्मान का प्रतीक मानी जाती हैं। मायावती ने बिहार चुनाव की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए थे। मायावती ने कहा कि अगर चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष होते तो बसपा और सीट जरूर जीतती। मालूम हो कि बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 243 सीट में बसपा को मात्र एक सीट पर जीत मिली है। मायावती ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा मुस्लिम महिला डाक्टर का हिजाब उठाने की भी कड़ी आलोचना की थी।(अशोक त्रिपाठी-हिफी फीचर) (हिफी)



