जेवर को सेमीकंडक्टर परियोजना का उपहार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 फरवरी को भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (वाईईआईडीए), जेवर, ग्रेटर नोएडा में इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (ओसैट) इकाई का शिलान्यास किया। यह कार्यक्रम वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया। यह परियोजना भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में सशक्त स्थान दिलाने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है। इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड, एचसीएल समूह और ताइवान की इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवा कंपनी फॉक्सकॉन के बीच 60ः40 के संयुक्त उपक्रम के रूप में स्थापित की गई है। इस अत्याधुनिक ओसैट सुविधा को वर्ष 2028 तक संचालित करने की योजना है। कंपनी ने इस परियोजना के लिए लगभग 3,700 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। यहां डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स का निर्माण किया जाएगा, जो मोबाइल, टेलीविजन, ऑटोमोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण घटक हैं।इस परियोजना से 3,500 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। साथ ही, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती मिलेगी और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला से जुड़े अन्य उद्योगों व स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
20,000 वेफर प्रति माह की प्रस्तावित प्रोसेसिंग क्षमता के साथ यह इकाई भारत की बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जहां भी सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित होती है, वहां डिजाइन केंद्र विकसित होते हैं, स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होता है और नवाचार की गति तेज होती है। उन्होंने कहा कि यह दशक भारत के लिए ‘तकनीकी दशक’ है और इस दौरान तकनीक के क्षेत्र में उठाए गए कदम 21वीं सदी में देश की शक्ति का आधार बनेंगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भले ही देर से शुरुआत की हो, लेकिन अब देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत अब तक 10 फैब्रिकेशन और पैकेजिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से चार इकाइयां जल्द ही उत्पादन शुरू करने वाली हैं। यह दर्शाता है कि भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है, बल्कि आत्मनिर्भर और सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लिए ठोस कदम उठा रहा है।
हाल ही में संपन्न वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रभाव शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मंच पर भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षमता और दृष्टि को वैश्विक सराहना मिली। सेमीकंडक्टर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में निवेश यह संकेत देते हैं कि भारत डिजिटल और तकनीकी महाशक्ति बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर है।ग्रेटर नोएडा में स्थापित होने जा रही यह इकाई उत्तर प्रदेश को भी एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में स्थापित करेगी। कुल मिलाकर, यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



