पाक रक्षा मंत्री का निराधार आरोप

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद 6 फरवरी को उस समय दहल गई जब एक भीषण आत्मघाती हमले ने जुमे की नमाज के समय मस्जिद परिसर को निशाना बनाया। इस हमले में इन पंक्तियों के लिखे जाने तक 69 लोगों की मौत हो गई, जबकि 170 से अधिक लोग घायल थे। हाल के वर्षों में यह हमला पाकिस्तान के सबसे घातक आतंकी हमलों में गिना जा रहा है। नमाज के दौरान हुए इस विस्फोट ने न सिर्फ राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि इसके बाद शुरू हुई कूटनीतिक बयानबाजी ने पूरे दक्षिण एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुरक्षा कर्मियों द्वारा रोके जाने के बाद आत्मघाती हमलावर ने मस्जिद के भीतर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिससे बड़ी संख्या में उपासक इसकी चपेट में आ गए।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने दावा किया कि हमलावर के तार अफगानिस्तान से जुड़े थे और उन्होंने भारत तथा अफगान तालिबान के बीच कथित ‘गठजोड़’ का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत “प्रत्यक्ष युद्ध की हिम्मत खो चुका है” और अब प्रॉक्सी तरीकों से पाकिस्तान को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।इन आरोपों पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। नई दिल्ली से जारी एक सख्त बयान में विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए मृतकों के प्रति संवेदना जताई, लेकिन भारत की किसी भी भूमिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। बयान में कहा गया कि अपने “घरेलू संकटों और सामाजिक विफलताओं” से ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तान दूसरों पर दोष मढ़ने की आदत में पड़ गया है। भारत ने इन आरोपों को “बेबुनियाद और निरर्थक” बताया।अफगानिस्तान ने भी पाकिस्तान के दावों को सिरे से नकार दिया। तालिबान-शासित अफगान सरकार के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान बिना किसी जांच के अफगानिस्तान पर आरोप लगाता रहा है। काबुल ने सवाल उठाया कि यदि पाकिस्तान हमले के तुरंत बाद अपराधियों की पहचान कर सकता है, तो उन्हें रोकने में वह पहले क्यों असफल रहा। अफगान सरकार ने इस हमले को निर्दोषों की हत्या बताते हुए इसकी निंदा की और कहा कि वह ऐसे किसी भी कृत्य का समर्थन नहीं करती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा की कमजोरियों को उजागर करती है। एक क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषक के अनुसार, “पड़ोसी देशों को दोष देना अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य
नहीं रह गया है। भारत और अफगानिस्तान दोनों यह संकेत दे रहे हैं
कि पाकिस्तान को अपने भीतर पनप रहे उग्रवाद और कट्टरपंथ से गंभीरता से निपटना होगा।”इस्लामाबाद के इस हमले ने न केवल दर्जनों परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि पाकिस्तान को उसकी सुरक्षा नीतियों और कूटनीतिक रुख पर आत्ममंथन करने के लिए मजबूर कर दिया है। सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान इस त्रासदी से सबक लेकर ठोस कदम उठाएगा या फिर आरोपों और टकराव की राजनीति में उलझा
रहेगा।(वीपी राहुल-हिफी फीचर)



