व्यापार समझौते में राष्ट्र हित सुरक्षित

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच घोषित अंतरिम व्यापार समझौता केवल आयात-निर्यात शुल्क तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की कृषि नीति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। इस समझौते के अंतर्गत भारत ने अपने संवेदनशील कृषि और दुग्ध उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है, जबकि अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत ने मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, मुर्गी पालन उत्पाद, दूध, पनीर, ईंधन एथेनॉल, तंबाकू, कुछ सब्जियों और मांस जैसे उत्पादों पर किसी भी प्रकार की आयात शुल्क रियायत नहीं दी है। ये सभी उत्पाद देश के छोटे और सीमांत किसानों की आजीविका से सीधे जुड़े हुए हैं, इसलिए इन्हें अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है।भारत में कृषि केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि जीवनयापन का आधार है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र- जैसे पशुपालन और दुग्ध उत्पादन-देश की 70 करोड़ से अधिक जनसंख्या को रोजगार प्रदान करते हैं। विकसित देशों की तुलना में भारत में खेती आज भी बड़े पैमाने पर मशीनीकरण या औद्योगिक ढांचे पर आधारित नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक और परंपरागत व्यवस्था के रूप में संचालित होती है। ऐसे में सस्ते विदेशी कृषि उत्पादों का खुला आयात भारतीय किसानों के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।इसी कारण भारत ने अब तक किए गए अधिकांश मुक्त व्यापार समझौतों में कृषि और दुग्ध उत्पादों को विशेष संरक्षण दिया है। हाल के वर्षों में यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए व्यापार समझौतों में भी भारत ने यही नीति अपनाई है। आयात शुल्क और नियामक प्रावधानों के माध्यम से घरेलू किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाया जाता है।आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में अमेरिका से भारत को होने वाला कृषि निर्यात लगभग 1 अरब 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर का रहा। इसमें सबसे अधिक योगदान बादाम, पिस्ता, सेब और एथेनॉल का था। दूसरी ओर, वित्तीय वर्ष 2025 में भारत का कुल कृषि निर्यात बढ़कर 51 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया, जबकि अमेरिका को होने वाला कृषि निर्यात लगभग 5 अरब डॉलर रहा। इसी अवधि में भारत का कुल निर्यात 437 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में यह भी कहा गया है कि भारत कुछ अमेरिकी कृषि उत्पादों- जैसे पशु आहार के लिए ज्वार, सूखे औद्योगिक अनाज अवशेष, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और अन्य पेय पदार्थों पर आयात शुल्क में कमी या समाप्ति करेगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने संवेदनशील और गैर-संवेदनशील उत्पादों के बीच संतुलन बनाते हुए समझौता किया है।आगे की योजना के तहत भारत अगले चार वर्षों में कृषि, समुद्री उत्पाद, खाद्य और पेय पदार्थों के संयुक्त निर्यात को
100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। चाय, कॉफी, चावल, अनाज, मसाले, काजू, तिलहन और फल-सब्जियां इसमें प्रमुख भूमिका निभाएंगे।कुल मिलाकर, यह अंतरिम व्यापार समझौता दर्शाता है कि भारत वैश्विक व्यापार में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ अपने किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा से कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



