ईरान की ब्रिक्स से अपील

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक हल तलाशने की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं। इसी क्रम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने उभरती अर्थव्यवस्थाओं के समूह ब्रिक्स से अपील की है कि वह इस संकट में एक “स्वतंत्र” और संतुलित भूमिका निभाए। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी हालिया बातचीत ने इस पूरे मुद्दे को नई कूटनीतिक दिशा दे दी है। ईरान का स्पष्ट मानना है कि वर्तमान संघर्ष को समाप्त करने के लिए सबसे पहले अमेरिका और इजराइल को अपनी सैन्य कार्रवाई रोकनी होगी। पेजेशकियान ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक इन हमलों का तत्काल अंत नहीं होता और भविष्य में ऐसे हमलों की पुनरावृत्ति रोकने की ठोस गारंटी नहीं दी जाती, तब तक शांति संभव नहीं है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में युद्ध के और विस्तार की आशंका लगातार बढ़ रही है।भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है। एक ओर, भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और ऊर्जा आधारित संबंध हैं, तो दूसरी ओर वह वैश्विक मंच पर संतुलित कूटनीति अपनाने के लिए भी जाना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान साफ कहा कि “युद्ध किसी के हित में नहीं है” और सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। उन्होंने ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों को लेकर भी चिंता जताई, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
इस बातचीत का एक महत्वपूर्ण पहलू ब्रिक्स की भूमिका को लेकर भी सामने आया। पेजेशकियान ने भारत की अध्यक्षता का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिक्स को इस संकट में निष्पक्ष और स्वतंत्र मध्यस्थ के रूप में आगे आना चाहिए। उनका मानना है कि यह समूह पश्चिमी दबावों से अलग हटकर एक संतुलित समाधान निकाल सकता है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक शांति को मजबूती मिलेगी। ईरान ने यह भी दोहराया कि वह संवाद के लिए तैयार है। पेजेशकियान ने संकेत दिया कि संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर परमाणु कार्यक्रम की पारदर्शिता और निगरानी को लेकर बातचीत की जा सकती है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया के देशों के बीच एक क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे का प्रस्ताव भी रखा, जो बाहरी हस्तक्षेप के बिना शांति और स्थिरता सुनिश्चित कर सके।
ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस युद्ध की शुरुआत नहीं की है। उसने अमेरिका और इजराइल पर बिना किसी ठोस आधार के हमले शुरू करने का आरोप लगाया। इसके अलावा, ईरान ने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें उसे क्षेत्रीय अस्थिरता का कारण बताया जाता है। उसका कहना है कि इजराइल ने विभिन्न देशों में हमले कर खुद ही तनाव को बढ़ावा दिया है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम दर्शाता है कि जहां एक ओर सैन्य तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी जारी हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय है, जहां उन्हें अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक शांति में भी योगदान देना है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ब्रिक्स वास्तव में इस संकट में कोई निर्णायक भूमिका निभा पाता है। (वीपी राहुल-हिफी फीचर)



