विश्व-लोक

भारत निकाल रहा डालर का तेल, रुपये की बढ़ेगी कीमत

एक तरफ ईरान ने पूरे मिडिल-ईस्ट में अमेरिका के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों पर हमला करके अमेरिका को बड़ी मुश्किल में फंसा दिया है। दूसरी तरफ भारत ने एक बड़ा खेल करते हुए डॉलर का तेल निकालने वाला कदम उठाया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार मिडिल-ईस्ट की परिस्थितियों के मद्देनजर भारत ने डॉलर की बजाय रुपये में खरीदारी शुरू कर दी है, जिससे पूरी दुनिया दंग रह गई है।
मिडिल-ईस्ट की जंग में फंसी दुनिया जहां एक तरह अपनी जहाजों को निकालने के लिए डॉलर या युआन में खरीदारी को मजबूर है, वहीं भारत की तेल रिफायनरियां अब रुपये में भुगतान कर पूरी दुनिया को चैंका रही हैं। यह बदलते भारत का नया रूप है। भारतीय रिफाइनरियां अब रूसी तेल की खरीदारी के भुगतान में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर रही हैं। इसके बजाय वे रुपये का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो विदेशी खातों में जमा किए जाते हैं और फिर यूएई के दिरहम या चीनी युआन में बदल दिए जाते हैं। यह बदलाव भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी नीतियों में बदलाव के बीच आया है।रूसी कंपनियां भी अब लंबे समय तक चलने वाले इंतजाम चाहती हैं, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों या नीति परिवर्तन से बच सकें। ऐसे में भारत ने अपनी मुद्रा को मजबूत करने के लिए रुपये में खरीदारी शुरू कर दी है। इसके लिए कुछ ऐसे भारतीय बैंक जिनकी ऑफशोर उपस्थिति सीमित है, वह इन ट्रेड्स को सुविधा प्रदान कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में भारतीय रुपये को विशेष ओवरसीज अकाउंट्स में जमा किया जाता है, जिसे बाद में दिरहम या युआन में कन्वर्ट कर दिया जाता है। इससे डॉलर आधारित सिस्टम से बचाव होता है और ट्रांजेक्शन आसान बनता है। कुछ मामलों में सिंगापुर डॉलर या हांगकांग डॉलर पर भी विचार किया जा रहा है, हालांकि यह बैंक की सुविधा पर निर्भर करता है।
अमेरिका के तमाम दावों के बावजूद भारत लगातार रूसी तेल खरीद रहा है, जो उसकी स्वतंत्र और किसी के दबाव में नहीं आने की कूटनीति का जीता जागता उदाहरण है। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भारत ने अप्रैल 2026 के लिए रूस से करीब 6 करोड़ बैरल तेल खरीदा है, जो मध्य पूर्व युद्ध के कारण सप्लाई में आई कमी को पूरा करने में मदद कर रहा है। इससे पहले रूस से तेल आयात में रेट महंगा होने के चलते थोड़ी कमी आई थी, लेकिन अब फिर बढ़ोतरी हो रही है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और डी-डॉलराइजेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत द्वारा रुपये में तेल की खरीदारी शुरू करने से अब डॉलर की दादागिरी दांव पर लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले दिनों में रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूती मिलेगी। अभी पिछले कुछ महीनों से रुपया डॉलर के आगे कमजोर होता जा रहा था। मगर भारत ने अब बड़ा कदम उठाया है। भारत ऐसा पहला देश बन गया है, जो मिडिल-ईस्ट युद्ध के दौरान अपनी मुद्रा में तेल की खरीदारी कर रहा है।

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