देश

लाइलाज बीमारी बना भ्रष्टाचार

देश में भ्रष्टाचार लाइलाज बीमारी बन रहा है जिससे आम आदमी को रोजाना दो चार होना पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025 के अनुसार, भारत 91वें स्थान पर है। इस सूची में 182 देशों को शामिल किया गया था, जिसमें भारत को 100 में से 39 अंक मिले हैं। 0 अंक का अर्थ अत्यधिक भ्रष्ट और 100 अंक का अर्थ पूर्णतः पारदर्शी या ईमानदार होता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत की स्थिति में पिछली रैंकिंग के मुकाबले पांच स्थानों का सुधार हुआ है।
आपको बता दें कि देश के सिस्टम से जुड़े भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों के पास भ्रष्टाचार व पद का दुरुपयोग कर जमा की गयी अकूत चल-अचल संपत्ति का भंडार है। भारत में भ्रष्टाचारी अधिकारियों की धर-पकड़ और उनसे अवैध रूप से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने के लिए बेहद कड़े कानूनी प्रावधान और सक्रिय जांच एजेंसियां काम कर रही हैं। हाल ही में जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश विजिलेंस और कर्नाटक लोकायुक्त द्वारा की गई बड़ी छापेमारी इस बात का जीवंत उदाहरण हैं, जहां भ्रष्ट अधिकारियों के गुप्त लॉकरों से करोड़ों रुपये नकद और किलो के हिसाब से सोना बरामद किया गया है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग (विजिलेंस टीम) ने जुलाई 2026 में आगरा के पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ललित कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक बड़ी कार्रवाई की है. विजिलेंस टीम ने उनके लखनऊ स्थित अलीगंज आवास पर छापेमारी कर करीब 35 करोड़ रुपये की बेहिसाब संपत्ति का खुलासा किया है, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कानूनी जांच और कार्रवाई को तेज कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश सतर्कता विभाग की छापेमारी में उनके घर के विभिन्न हिस्सों में पैकेटों में छिपाकर रखे गए 1.62 करोड़ नकद मिले.लगभग 13 किलोग्राम सोना और 9 किलोग्राम चांदी (बिस्किट, बार और आभूषण के रूप में) जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब 20 करोड़ आंकी गई है। लखनऊ, नोएडा, बाराबंकी और रायबरेली में कई मकानों, भूखंडों (प्लॉट्स), फ्लैटों और कृषि भूमि से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी कीमत 13 करोड़ रुपये के आसपास है। बैंक खातों, म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट और पोस्ट ऑफिस स्कीमों में 1 करोड़ से अधिक के निवेश के दस्तावेज मिले। इसके अलावा दो लग्जरी कारें इनोवा और आइ20 और एक रिवॉल्वर भी बरामद की गई है।
इस विशाल साम्राज्य का पर्दाफाश साल 2020 में हुई एक छोटी सी शिकायत से शुरू हुआ था। ललित कुमार जब कानपुर में तैनात थे, तब उन पर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए 300 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। तत्कालीन परिवहन आयुक्त की अनुमति के बाद एंटी-करप्शन और विजिलेंस विभाग ने उनकी गोपनीय जांच शुरू की, जिससे उनकी आय से अधिक संपत्ति के इस बड़े मामले की परतें खुलती चली गईं। ललित कुमार अक्टूबर 2025 में आगरा से सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हुए थे।
इस से छह दिन पूर्व 4 जुलाई को अकोला में हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने किरण पुरुषोत्तम चैधरी सह-जिला निबंधक तथा मुद्रांक जिलाधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। उनके खिलाफ 10,000 रुपये रिश्वत लेने का मामला दर्ज होने के बाद उनके जलगांव स्थित आवास पर छापेमारी की गई, जहां से 2.94 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति बरामद हुई। किरण पुरुषोत्तम चैधरी, तत्कालीन अतिरिक्त जिला रजिस्ट्रार और स्टाम्प ड्यूटी अधिकारी, अकोला महारा एसीबी ने उन्हें 26 जून को 10,000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा थासबरामद की गई जलगांव स्थित घर पर छापेमारी कर
1.53 करोड़ से अधिक नकद 60 लाख के सोने के बिस्किट व आभूषण तथा अन्य कीमती धातुएं लगभग 62 लाख की बेनामी संपत्ति के कागजात बरामद किये गये थे।
इसी सप्ताह तेलंगाना के हैदराबाद में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस कंप्यूटर सर्विसेज में तैनात डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस संकीरेड्डी भी रेड्डी को गिरफ्तार किया। एसीबी की टीम ने अधिकारी के तेलंगाना और कर्नाटक स्थित कुल 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। शुरुआती जांच में करीब 300 करोड़ मूल्य की बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले थे। अधिकारी के ठिकानों से 2 किलोग्राम सोने के आभूषण और 20 किलोग्राम चांदी बरामद की गई है। छापेमारी के दौरान उनके घर से 3.60 लाख और एक अन्य ठिकाने से 40 लाख रुपये कैश मिला। रिश्तेदारों और बेनामियों के नाम पर 50 एकड़ से अधिक कृषि भूमि, व्यावसायिक भूखंड, कई लग्जरी फ्लैट और आलीशान विला के दस्तावेज जब्त किए गए थे। उनके बैंक खातों में लगभग 19.91 लाख रुपये जमा पाए गए हैं।
25 फरवरी 2026 तीस हजार की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए खनन विभाग के उप निदेशक देवव्रत महांति की गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस की छापेमारी में चैंकाने वाला खुलासा हुआ था। भुवनेश्वर स्थित उनके फ्लैट से 4 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी बरामद की गई । इसके अलावा, महांति के कार्यालय की दराज और उनके पास से 1.20 लाख रुपये नकद भुवनेश्वर के पहाल क्षेत्र में लगभग 2400 वर्गफुट में बना एक भव्य दो मंजिला मकान, करीब 130 ग्राम सोना जब्त किया गया।
उधर 9 जून 2026 भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में, तेलंगाना एंटी-करप्शन ब्यूरो ने रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग के इंजीनियर-इन- चीफ जे. मोहन नाइक और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी कई प्रॉपर्टीज पर एक साथ छापे मारे. उन पर आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज्यादा संपत्ति जमा करने का आरोप है।
जांच के दौरान अधिकारियों को सोने के बिस्किट, गहने, चांदी की चीजें, कैश और प्रॉपर्टी से जुड़े कई दस्तावेज मिले। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, जांच के दायरे में आई कुल संपत्ति की मार्केट वैल्यू 100 करोड़ रुपए से ज्यादा पायी गयी।
ये तो सिर्फ बानगी नमूना भर है देश भर में करीब एक सौ सरकारी कर्मचारी अधिकारीयों के कब्जे से आय से अधिक जुटाई गयी करोड़ों अरबों की संपति मिल रही है। एक एक अधिकारी ने सौ से तीन चार सौ करोड़ तक की अवैध संपत्ति जुटाने का काम किया है जिस से पता चल जाता है कि भ्रष्टाचार किस हद तक बढ़ गया है।
केन्द्र और विभिन्न प्रदेशों में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टालरेंस का नारा तो रहा लेकिन स्थितियों में कोई विशेष अन्तर नहीं आया। भ्रष्टाचार के बारे जारी होने वाली ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की 182 देशों की रिपोर्ट में भारत 91 वें स्थान पर है। यह संस्था सरकार संस्थाओं और सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार की स्थिति का आकलन करती है और उसके आधार पर रैंकिंग तय करती है।यदि इस रैंक को न भी मानें तो भी आम आदमी से लेकर खास आदमी तक इससे प्रभावित है। सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए कि भ्रष्टाचार समाप्त होने के बजाय निरन्तर बढ़ता ही क्यों जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में अब इसे रिश्वत , घूस के बजाय सुविधाशुल्क और प्रथा के रूप में अपनाया जा चुका हैं। सिर्फ जीरो टालरेंस का नारा देने से भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो सकता है। निचले स्तर से लेकर उच्चस्तर पर कदम पर भ्रष्टाचार की विषबेल फैल रही हैं।
(मनोज कुमार अग्रवाल-हिफी फीचर)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button